तेंदूपत्ता तोड़ने गए ग्रामीणों पर भालू का हमला, जंगल में मचा हड़कंप — गले और हाथ पर गंभीर चोट, लहूलुहान हालत में पहुंचे अस्पताल

छुरा। गरियाबंद जिले के छुरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम कसारबाय-हरदी के समीप जंगल में तेंदूपत्ता तोड़ने गए दो ग्रामीणों पर अचानक जंगली भालू ने हमला कर दिया। इस दर्दनाक घटना से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया है। दोनों ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनके गले, हाथ और शरीर के अन्य हिस्सों में गहरे जख्म आए हैं। ग्रामीणों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार दोनों अब खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं।

मिली जानकारी के अनुसार ग्राम मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर कसारबाय-हरदी के घने जंगलों में दोपहर करीब 2 बजे रानू साहू पिता गिरधारी साहू एवं सुरेश साहू पिता भगवाराम अन्य ग्रामीणों के साथ तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए पहुंचे थे। दोनों ग्रामीण जंगल के भीतर तेंदूपत्ता तोड़ने में व्यस्त थे, तभी अचानक झाड़ियों के बीच से एक जंगली भालू निकलकर उन पर टूट पड़ा।
हमला इतना अचानक और भयावह था कि दोनों ग्रामीण संभल ही नहीं पाए। भालू ने पहले रानू साहू पर हमला करते हुए उसके गले और हाथ को बुरी तरह जख्मी कर दिया, वहीं सुरेश साहू को बचाने की कोशिश में वह भी भालू के हमले का शिकार हो गया। भालू ने दोनों को लहूलुहान कर दिया और फिर जंगल की ओर भाग निकला।
घटना के बाद आसपास मौजूद अन्य संग्राहकों में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने शोर मचाया, जिसके बाद बड़ी मुश्किल से घायल दोनों को जंगल से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और स्थानीय प्रशासन भी सक्रिय हुआ।

जान जोखिम में डालकर तेंदूपत्ता तोड़ने को मजबूर ग्रामीण

क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि तेंदूपत्ता, महुआ, चार, कुसुम, चिरौंजी जैसी लघु वनोपज ही उनकी आजीविका का मुख्य आधार है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए जंगल ही जीवन का सहारा है। ऐसे में जान का खतरा होने के बावजूद ग्रामीण हर साल जंगलों में प्रवेश कर तेंदूपत्ता संग्रहण करते हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि छुरा विकासखंड के लगभग 80 प्रतिशत परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जंगलों पर निर्भर हैं। गर्मी के मौसम में यही लघु वनोपज उनकी सालभर की आर्थिक व्यवस्था को संभालती है। लेकिन जंगली जानवरों का खतरा हर बार मौत का डर बनकर सामने खड़ा रहता है।

भालू के हमले आम, सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी

ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग द्वारा तेंदूपत्ता तोड़ाई का कार्य तो नियमित रूप से कराया जाता है, लेकिन जंगलों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर है। भालू, जंगली सूअर, तेंदुआ और अन्य हिंसक वन्यजीवों के हमले अब आम बात हो गई है। पिछले कई वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जहां ग्रामीणों ने अपनी जान गंवाई है।

लोगों का कहना है कि केवल मुआवजा देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जंगल में काम करने वाले संग्राहकों की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था होनी चाहिए। वन विभाग को निगरानी, सुरक्षा दल और समय-समय पर चेतावनी तंत्र मजबूत करना चाहिए।

वन विभाग ने दी तत्काल सहायता

घटना के बाद वन विभाग ने अपनी नियमावली के तहत दोनों घायल ग्रामीणों को प्रारंभिक आर्थिक सहायता प्रदान की है। विभागीय अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल जाना और आगे भी हर संभव मदद का आश्वासन दिया।

फिलहाल दोनों ग्रामीणों का इलाज जारी है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक गरीब ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर जंगलों में काम करने को मजबूर रहेंगे। जंगल उनकी रोजी-रोटी है, लेकिन वही जंगल अब उनके लिए मौत का मैदान बनता जा रहा है।

मुख्य खबरें