पगडंडियों, डर और दुर्गमता के बीच पहुँचे पुलिस अधीक्षक, नक्सल प्रभावित गांवों में सुनी जमीनी पीड़ा

गरियाबंद :- घने जंगल, टूटी सड़कें, सीमित संचार और हर कदम पर सुरक्षा का खतरा—इन हालातों के बीच गरियाबंद जिले के नवपदस्थ पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर ने घोर नक्सल प्रभावित इलाकों में स्थित पुलिस कैंप छिंदौला, ओढ़ और कुल्हाड़ीघाट का औचक निरीक्षण किया। यह दौरा केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि दुर्गम अंचलों की जमीनी हकीकत को समझने की एक गंभीर कोशिश रहा।
पुलिस अधीक्षक ने दुर्गम मार्गों से होते हुए कैंपों तक पहुंचकर वहां तैनात जवानों से आमने-सामने संवाद किया। नक्सल संवेदनशील इलाकों में तैनात जवानों की कठिन ड्यूटी, सीमित संसाधन और लगातार बनी रहने वाली चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों की जानकारी ली। उन्होंने जवानों को मानसिक मजबूती बनाए रखने, नियमित व्यायाम और योग को दिनचर्या का हिस्सा बनाने की सलाह दी।
कैंप निरीक्षण के बाद पुलिस अधीक्षक गांव छिंदौला, ओढ़, कुल्हाड़ीघाट और अमलोर पहुंचे, जहां वर्षों से उपेक्षा झेल रहे ग्रामीणों ने खुलकर अपनी पीड़ा रखी। आदिवासी बहुल इन गांवों में आज भी बिजली, शुद्ध पेयजल, स्कूल भवन, सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव ग्रामीणों के रोजमर्रा के संघर्ष को और कठिन बना रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि दुर्गम भौगोलिक स्थिति और नक्सल प्रभाव के चलते विकास की योजनाएं कागजों से आगे नहीं बढ़ पाईं। बच्चों की पढ़ाई, महिलाओं की सुरक्षा और बुजुर्गों के इलाज तक हर जरूरत संघर्ष बन चुकी है।
ग्रामीणों की बातों को गंभीरता से सुनते हुए पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर ने आश्वासन दिया कि यह इलाका केवल सुरक्षा के नजरिये से नहीं, बल्कि मानवीय और विकास के दृष्टिकोण से भी प्राथमिकता में रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों से समन्वय कर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस पहल की जाएगी।
यह दौरा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में डर के साए से बाहर निकलकर संवाद और भरोसे की ओर बढ़ता एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जहां पुलिस केवल वर्दी नहीं बल्कि उम्मीद बनकर पहुंची।
