नगर में पागल गाय का आतंक, आधा दर्जन से अधिक लोग घायल बच्चों-महिलाओं में दहशत, नगर पंचायत की चुप्पी पर सवाल

छुरा :-छुरा नगर में इन दिनों एक पागल गाय का आतंक इस कदर हावी हो चुका है कि आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि लोग अपने छोटे बच्चों को घर से बाहर भेजने में भी डर महसूस कर रहे हैं। दो दिनों के भीतर यह गाय आधा दर्जन से अधिक लोगों पर हमला कर चुकी है, जिससे नगरवासियों में भय और आक्रोश दोनों चरम पर हैं।
जानकारी के अनुसार, बीते दिन शीतला मंदिर के पास यह पागल गाय अचानक छोटे बच्चों पर झपट पड़ी। बच्चों को बचाने के लिए आसपास के लोग दौड़े, तब तक अफरा-तफरी मच चुकी थी। इसी दौरान नगर के एक व्यापारी भी गाय के हमले का शिकार हो गए और घायल हो गए। शनिवार सुबह एक बार फिर गाय ने राह चलते लोगों को मारने दौड़ाया। इतना ही नहीं, गोबर बीनने निकली महिलाओं पर भी गाय ने हमला करने का प्रयास किया, जिससे महिलाएं जान बचाकर इधर-उधर भागती नजर आईं।
लगातार हो रहे हमलों से नगर में भय का माहौल बन गया है। बाजार, मंदिर परिसर और मुख्य सड़कों पर लोग सतर्क नजर आ रहे हैं। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा सहमे हुए हैं।
नगरवासियों की प्रतिक्रियाएं
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह समस्या आज की नहीं है, लेकिन अब स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है।
एक व्यापारी ने आक्रोश जताते हुए कहा, “हम टैक्स देते हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं मिलता। अगर किसी बच्चे के साथ बड़ी घटना हो जाती, तब कौन जिम्मेदार होता?”
एक महिला ने बताया, “हम रोजमर्रा के काम के लिए निकलते हैं, लेकिन अब हर वक्त डर लगा रहता है। गाय अचानक दौड़ पड़ती है, संभलने का मौका भी नहीं मिलता।”
वहीं एक बुजुर्ग नागरिक ने कहा, “नगर पंचायत को कई बार बताया गया, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगता है प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।”
नगर पंचायत पर उठे सवाल
नगरवासियों ने नगर पंचायत से मांग की है कि तत्काल इस पागल गाय को नगर सीमा से बाहर भेजा जाए या फिर उसका समुचित इलाज कराया जाए। लोगों का साफ कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो किसी दिन कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी नगर प्रशासन की होगी।
अब सवाल यह है कि क्या समाचार प्रकाशन के बाद नगर पंचायत नींद से जागेगी?
या फिर किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही प्रशासन हरकत में आएगा?
नगरवासियों की निगाहें अब नगर पंचायत पर टिकी हैं, क्योंकि मामला सीधे जन-सुरक्षा से जुड़ा है और इसमें जरा-सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है।
