मैनपुर का सामुदायिक भवन बदहाली की कगार पर,मवेशियों का अड्डा बना परिसर, लाखों की आय के बाद भी सुधार नहीं—जनता बोली “अब तो जागे प्रशासन!”

मैनपुर :- ब्लॉक मुख्यालय मैनपुर का एकमात्र सामुदायिक भवन इस समय अपनी बदहाली का ऐसा मंजर पेश कर रहा है कि लोग हैरान हैं और नाराज़ भी। जहां कभी सामाजिक उत्सवों की चहल-पहल रहती थी, आज वहीं जर्जर दीवारें, टूटे शौचालय, कीचड़ भरा परिसर और मवेशियों की आमद‐जावत ने इसे बेकार और उपेक्षित बना दिया है।
यह भवन मैनपुर के हर विवाह, सांस्कृतिक कार्यक्रम, सामाजिक आयोजन और सरकारी बैठकों का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है। लेकिन इसकी दयनीय हालत देखकर अब लोग खुलकर सवाल उठा रहे हैं कि “जब जनपद लाखों की आय इसी भवन से कमाता है, तो सुविधा देने में इतनी लापरवाही क्यों?”
आय तो भारी—सुविधा शून्य!
नगरवासियों ने बताया कि सामुदायिक भवन से जनपद पंचायत को प्रतिदिन 2500 रुपये किराया मिलता है और सालाना यह भवन अच्छी-खासी आय जनपद को देता है। शादी-ब्याह से लेकर सरकारी कार्यक्रमों तक, हर आयोजन के लिए यह भवन हमेशा बुक रहता है।
लेकिन इस आय के बावजूद भवन की मरम्मत, सफाई और उन्नयन को पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। लोग पूछ रहे हैं—
“जब आय का स्रोत यही भवन है तो सुविधा सुधार पर खर्च क्यों नहीं? आखिर पैसा जा कहां रहा है?”
बगल में घेरा नहीं—मवेशियों ने बना लिया स्थायी ठिकाना
मुख्य प्रवेश द्वार पर घेरा बनने के बाद थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन बगल में घेरा न होने से मवेशी रोज परिसर में घुस रहे हैं।
गंदगी, बदबू और अव्यवस्था की वजह से कई आयोजकों को अपना कार्यक्रम बीच में रोककर सफाई करनी पड़ती है। लोग इसे “बेपरवाह व्यवस्था” और “जनपद की लापरवाही का बड़ा उदाहरण” बता रहे हैं।
कंक्रीटीकरण न होने से बारिश में पूरा परिसर दलदल में बदल जाता है
आंगन और आसपास का बड़ा हिस्सा आज भी कच्चा है। बारिश के समय फिसलन ऐसी कि महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग कई बार गिरते‐गिरते बचे हैं। कार्यक्रमों के दौरान बाहर खड़े होने तक में लोग डरते हैं।
टूटे शौचालय—महिलाओं के लिए सबसे बड़ी परेशानी
वर्षों पुराने शौचालय अब पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं।
स्वच्छता का नामोनिशान नहीं है।
महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा असुविधा झेलनी पड़ रही है।
लोगों का कहना है कि “भवन में शौचालय की हालत देखकर ही प्रशासन की गंभीरता समझी जा सकती है।”
जनता की मांग—अब मरम्मत नहीं, संपूर्ण उन्नयन चाहिए!
स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने शेयर माँगें रखी हैं
सामुदायिक भवन का तत्काल जीर्णोद्धार
बगल की दिशा में मजबूत घेरा निर्माण
आंगन व परिसर का संपूर्ण कंक्रीटीकरण
भवन में आधुनिक और स्वच्छ शौचालयों का निर्माण
परिसर की नियमित सफाई और स्थायी सुरक्षा व्यवस्था
लोगों का सीधा सवाल प्रशासन से
“सालों से आय लेने में जनपद तेज है, लेकिन सुविधा देने में सुस्त क्यों?”
“मैनपुर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में एकमात्र सामुदायिक भवन ही अगर खस्ताहाल है, तो विकास की बात करना मज़ाक नहीं तो और क्या है?”
कार्रवाई की मांग तेज, जनभावना उफान पर
नागरिकों का कहना है कि आने वाले समय में बड़े कार्यक्रमों की मेजबानी करना मुश्किल हो जाएगा।
लोगों ने साफ कह दिया है—
“अब बयानबाज़ी नहीं, काम चाहिए—और वह भी तुरंत!”
