नक्सल-वालांचल में 12 साल की सेवा, 10 साल से मातृ मृत्यु शून्य 15 अगस्त पर RMA दुर्गेश कुमार साहू सम्मानित, रिसगांव के इतिहास में पहली बार किसी कर्मी को मिला जिला स्तरीय सम्मान

मैनपुर/रिसगांव। दुर्गम वनांचल, नक्सल प्रभावित क्षेत्र और टाइगर रिजर्व की चुनौतियों के बीच स्वास्थ्य सेवा की ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने पूरे अंचल का मान बढ़ाया है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त 2026 को धमतरी में आयोजित जिला स्तरीय समारोह में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र साँकरा के अंतर्गत उप स्वास्थ्य केंद्र रिसगांव में पदस्थ आरएमए दुर्गेश कुमार साहू को कठिन एवं अति-संवेदनशील क्षेत्र में उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए जिला प्रशासन द्वारा सम्मानित किया गया।

इस सम्मान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि रिसगांव क्षेत्र के इतिहास में पहली बार किसी विभागीय कर्मचारी को जिला स्तरीय सम्मान प्राप्त हुआ है। वर्षों से सड़क, बिजली, पुल-पुलिया और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे इस दुर्गम इलाके में स्वास्थ्य सेवा को निरंतर जारी रखना अपने आप में बड़ी चुनौती है।

चार महीने कट जाता है मुख्यालय से संपर्क

विकासखंड नगरी का रिसगांव क्षेत्र बेहद दुर्गम और संवेदनशील माना जाता है। क्षेत्र में न तो पक्की सड़क की समुचित सुविधा है, न पर्याप्त बिजली व्यवस्था और न ही बरसात में आवागमन के लिए पर्याप्त पुल-पुलिया। बारिश के मौसम में करीब चार महीने तक नगरी मुख्यालय से संपर्क बाधित हो जाता है। ऐसे समय में सामान्य जरूरतों के लिए भी ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

इन्हीं विषम परिस्थितियों के बीच दुर्गेश कुमार साहू वर्ष 2012 से रिसगांव में मुख्यालय निवास कर लगातार स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं। दुर्गम रास्तों, जंगल और बारिश की बाधाओं के बावजूद उन्होंने क्षेत्र के ग्रामीणों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने को अपना दायित्व ही नहीं, बल्कि जनसेवा का मिशन बना लिया।

10 वर्षों से मातृ मृत्यु शून्य

श्री साहू की सेवा और मेहनत का सबसे बड़ा परिणाम यह है कि उनके कार्यक्षेत्र में पिछले 10 वर्षों से एक भी मातृ मृत्यु दर्ज नहीं की गई है। साथ ही शिशु मृत्यु दर को भी न्यूनतम स्तर पर बनाए रखने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है।

टीकाकरण, संस्थागत प्रसव, कुपोषण नियंत्रण और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में भी क्षेत्र ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। स्वास्थ्य संबंधी आपात परिस्थितियों में वे दुर्गम गांवों तक पैदल पहुंचकर ग्रामीणों को उपचार और जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराते रहे हैं।

जब सड़क नहीं थी, तब सेवा का रास्ता खुद बनाया

रिसगांव जैसे वनांचल में स्वास्थ्यकर्मी के लिए नियमित सेवाएं देना आसान नहीं है। कई बार खराब मौसम और रास्तों की बाधाओं के कारण वाहन भी गांवों तक नहीं पहुंच पाते। ऐसे समय में दुर्गेश कुमार साहू ने पैदल ही गांवों तक पहुंचकर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराईं। यही समर्पण उन्हें अपने क्षेत्र के लोगों के बीच अलग पहचान देता है।

सम्मान से बढ़ा पूरे रिसगांव का गौरव

जिला प्रशासन द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर मिले इस सम्मान से न केवल आरएमए दुर्गेश कुमार साहू का बल्कि पूरे रिसगांव और वनांचल क्षेत्र का गौरव बढ़ा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जहां सुविधाओं का अभाव अक्सर लोगों को पीछे हटने के लिए मजबूर कर देता है, वहीं श्री साहू ने कठिनाइयों के बीच भी सेवा का रास्ता नहीं छोड़ा।

रिसगांव को पहली बार मिला जिला स्तरीय सम्मान अब पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गया है। 12 वर्षों की लगातार सेवा, 10 वर्षों से मातृ मृत्यु शून्य रखने की उपलब्धि और विषम परिस्थितियों में घर-घर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने वाले दुर्गेश कुमार साहू का सम्मान यह संदेश देता है कि सच्ची सेवा के सामने दुर्गम रास्ते और कठिन परिस्थितियां भी छोटी पड़ जाती हैं।

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