तीन दिन में जांच का आदेश, 28 दिन बाद भी जांच अधूरी! पोड़ स्कूल में कथित अनियमितता की जांच करने पहुंची टीम बैरंग लौटी, प्राचार्य ने कहा—“जांच आदेश की प्रति ही नहीं मिली” शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, आखिर जांच आदेश पहुंचाने की जिम्मेदारी किसकी?

 

संवाददाता – अनीश सोलंकी 
छुरा :- शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पोड़ के प्राचार्य के खिलाफ बिना बैठक एवं प्रस्ताव के राशि आहरण किए जाने संबंधी शिकायत की जांच को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। शिकायत के बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा 07 सितंबर 2026 को विकासखंड शिक्षा अधिकारी छुरा को जांच अधिकारी नियुक्त करते हुए तीन दिवस के भीतर जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन निर्धारित समय-सीमा के काफी समय बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी। अब 05 अक्टूबर को जांच करने पहुंची टीम को बिना जांच किए ही वापस लौटना पड़ा।

मामला इसलिए भी गंभीर है कि शिकायत की जांच के लिए विभागीय स्तर पर आदेश जारी होने के बावजूद संबंधित विद्यालय के प्राचार्य का कहना है कि उन्हें अब तक जांच आदेश की प्रति प्राप्त ही नहीं हुई है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर जांच आदेश जारी होने के बाद उसे संबंधित अधिकारी/प्राचार्य तक पहुंचाने में इतनी लंबी देरी क्यों हुई?

पहले जांच टीम पर उठी आपत्ति, फिर बदली गई टीम

जानकारी के अनुसार, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पोड़ के प्राचार्य के खिलाफ बिना बैठक एवं प्रस्ताव के राशि आहरण किए जाने की शिकायत सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जांच के लिए टीम गठित की गई थी। विकासखंड शिक्षा अधिकारी छुरा को जांच अधिकारी नियुक्त करते हुए तीन दिवस के भीतर जांच पूर्ण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।

हालांकि, प्रारंभिक जांच के दौरान जांच टीम में शामिल विकासखंड शिक्षा कार्यालय के एक लिपिक को लेकर आपत्ति सामने आई। इसके बाद जांच अधिकारी की ओर से उक्त लिपिक को जांच टीम से हटाकर दूसरे कर्मचारी को शामिल करने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी से अनुरोध किया गया। इसके चलते जांच प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

बताया जा रहा है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा इसके बाद नई जांच टीम गठित कर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।

28 दिन बाद जांच करने पहुंची टीम, लेकिन नहीं हो सकी जांच

इसी क्रम में 05 अक्टूबर 2026 को विकासखंड शिक्षा अधिकारी छुरा अपनी टीम के साथ शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पोड़ पहुंचे, ताकि शिकायत से संबंधित दस्तावेजों एवं अभिलेखों की जांच की जा सके। लेकिन मौके पर पहुंचने के बाद जांच टीम को कथित तौर पर जांच किए बिना ही वापस लौटना पड़ा।

प्राचार्य की ओर से जांच टीम को बताया गया कि उन्हें जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जांच आदेश की प्रति प्राप्त नहीं हुई है। जब तक अधिकृत जांच आदेश प्राप्त नहीं होता, तब तक जांच कराना संभव नहीं है।

जांच टीम के वापस लौटने से अब पूरा मामला एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है।


आदेश जारी हुआ तो पहुंचा क्यों नहीं?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने जांच के लिए आदेश जारी कर दिया था, तो उसकी प्रति संबंधित प्राचार्य तक क्यों नहीं पहुंची? जांच आदेश भेजने और उसकी प्राप्ति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आखिर किस अधिकारी या कर्मचारी की थी?

दूसरा बड़ा सवाल यह है कि जब शिकायत पर तीन दिवस में जांच पूरी करने का निर्देश था, तो प्रक्रिया बदलने और टीम गठन के बाद भी करीब 28 दिन तक जांच लंबित क्यों रही?

तीसरा सवाल यह भी है कि यदि विभाग को जांच जल्द पूरी करनी थी, तो 05 अक्टूबर को टीम भेजने से पहले संबंधित विद्यालय को जांच आदेश की प्रति उपलब्ध कराना सुनिश्चित क्यों नहीं किया गया?

शिकायत की जांच से ज्यादा ‘आदेश पहुंचा या नहीं’ पर उलझा विभाग

पूरे घटनाक्रम से ऐसा प्रतीत होता है कि शिकायत की वास्तविकता सामने लाने के बजाय जांच प्रक्रिया ही कागजी औपचारिकताओं में उलझती जा रही है। एक ओर विभागीय आदेश में समय-सीमा तय की गई, दूसरी ओर जांच टीम के मौके पर पहुंचने के बाद भी जांच नहीं हो सकी।

अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करता है या फिर जांच की फाइल एक बार फिर आदेश, टीम गठन और पत्राचार के बीच उलझकर रह जाएगी।

अब उठ रही निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग

विद्यालय में राशि आहरण से संबंधित शिकायत की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन जांच प्रक्रिया में हुई देरी ने विभागीय व्यवस्था पर जरूर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में जरूरत है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पूरे घटनाक्रम की समीक्षा करे और यह स्पष्ट करे कि जांच आदेश संबंधित प्राचार्य तक समय पर क्यों नहीं पहुंचा, जांच में देरी के लिए कौन जिम्मेदार है और शिकायत की जांच आखिर कब तक पूरी होगी।

अब निगाहें शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या 28 दिन से अटकी जांच को गति मिलेगी या फिर यह मामला भी कागजी कार्रवाई के फेर में लंबा खिंचता रहेगा?

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