इलाज या जान से खिलवाड़? गरियाबंद में कथित झोलाछापों का बढ़ता जाल, 10 दिन में दो मौतों के बाद स्वास्थ्य निगरानी पर सवाल, गरियाबंद, छुरा, मैनपुर, फिंगेश्वर, अमलीपदर, देवभोग, इलाके बढ़ रहा झोलाछाप डॉक्टरो का साम्राज्य 

अमलीपदर में दो ग्रामीणों की मौत, सरनाबहाल मेडिकल स्टोर में अनधिकृत व्यक्ति द्वारा दवा और इंजेक्शन लगाने का वीडियो; अब मैनपुर के शोभा में भी गांव-गांव कथित इलाज के आरोप, संपत्ति को लेकर भी उठी जांच की मांग

संवाददाता – अनीश सोलंकी 
गरियाबंद/मैनपुर। गरियाबंद जिले के दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में कथित अनधिकृत चिकित्सा गतिविधियों को लेकर सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं। अमलीपदर क्षेत्र में करीब 10 दिनों के भीतर दो ग्रामीणों की मौत, सरनाबहाल के एक मेडिकल स्टोर में अनधिकृत व्यक्ति द्वारा दवा देने और इंजेक्शन लगाने का वीडियो सामने आने तथा अब मैनपुर विकासखंड के ग्राम शोभा में कथित रूप से बिना आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता के गांव-गांव जाकर इलाज करने के आरोपों ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था को सवालों के घेरे में ला दिया है।

मामलों में मौत के वास्तविक कारण और उपचार की भूमिका जांच के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतों ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि जिले के दूरस्थ गांवों में निजी स्तर पर होने वाली चिकित्सा गतिविधियों की निगरानी आखिर कितनी प्रभावी है।

10 दिन में दो मौतों ने बढ़ाई चिंता

अमलीपदर इलाके में 5 सितंबर
को सराईपानी निवासी 54 वर्षीय डिगने यादव की मौत हुई थी। इसके बाद परिजनों का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें निजी स्तर पर उपचार के बाद मौत होने का दावा किया गया था। मामले की जानकारी मिलने पर जिला स्तर से जांच टीम पहुंची, हालांकि जांच के दौरान आरोप लगाने वाले परिजन अपने पूर्व के आरोप से पीछे हट गए।

इसके करीब 10 दिन बाद 15 सितंबर को सरनाबहाल के कुरलापारा निवासी 55 वर्षीय अभिलाष नेताम की मौत हो गई। इस मामले में भी निजी स्तर पर उपचार कराए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि परिजनों की ओर से अब तक दवा या उपचार को लेकर कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच कराने की बात कही है।

तेज सांस की शिकायत, पीएचसी से किया गया रेफर

जानकारी के अनुसार अभिलाष नेताम की तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे उरमाल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे थे। वहां चिकित्सक सनत कुम्भकार ने मरीज की जांच की। चिकित्सक के अनुसार मरीज की सांस तेज चल रही थी। मलेरिया और शुगर की जांच कराई गई, जिसकी रिपोर्ट निगेटिव बताई गई।

चिकित्सक के मुताबिक पूछताछ के दौरान परिजनों ने निजी स्तर पर मलेरिया का उपचार और इंजेक्शन लगाए जाने की जानकारी दी थी। रेफरल लेटर में भी मलेरिया का उल्लेख होने की बात सामने आई है।

इसके बाद परिजन मरीज को ओडिशा के धर्मगढ़ स्थित निजी क्लिनिक ले गए। वहां उपचार नहीं मिलने पर उसे सरकारी अस्पताल ले जाया गया। परिजनों के अनुसार रातभर उपचार के बाद स्थिति सामान्य हुई और वे मरीज को घर लेकर लौटे, लेकिन अगले दिन अभिलाष नेताम की मौत हो गई।
मौत किस कारण हुई और पूर्व में कराए गए उपचार की इसमें कोई भूमिका थी या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

मेडिकल स्टोर के वीडियो ने खोली निगरानी की पोल?

इसी बीच सरनाबहाल में संचालित एक मेडिकल स्टोर का वीडियो सामने आया, जिसमें एक अनधिकृत व्यक्ति द्वारा दवा देने और इंजेक्शन लगाने जैसी गतिविधि दिखाई देने का दावा किया गया। मामले में औषधि विभाग ने कार्रवाई करते हुए संबंधित मेडिकल स्टोर को सील कर दिया।

इस कार्रवाई के बाद सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि किसी मेडिकल स्टोर में चिकित्सकीय उपचार अथवा इंजेक्शन लगाने जैसी गतिविधियां हो रही थीं, तो इसकी जानकारी संबंधित विभागीय निगरानी तंत्र तक पहले क्यों नहीं पहुंची?

अब शोभा से सामने आया ‘गांव-गांव इलाज’ का दावा

इसी कड़ी में मैनपुर विकासखंड के ग्राम शोभा से भी कथित झोलाछाप प्रैक्टिस का मामला सामने आने का दावा किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के अनुसार एक व्यक्ति लंबे समय से गांव-गांव जाकर दवाइयां देने और इंजेक्शन लगाने जैसी गतिविधियां कर रहा है।

बताया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति मरीजों के घर अथवा गांवों तक मोटरसाइकिल से दवाइयों का बैग लेकर पहुंचता है। हालांकि उसके पास कौन-सी चिकित्सकीय योग्यता है, उपचार करने की वैध अनुमति है या नहीं और वह किन परिस्थितियों में मरीजों का उपचार करता है—इन तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।

कुछ वर्षों में बढ़ी संपत्ति की भी चर्चा

शोभा क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर यह दावा भी किया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति ने कथित चिकित्सा गतिविधियों के जरिए मैनपुर और शोभा क्षेत्र में बड़ी संपत्ति अर्जित की है। कुछ लोगों द्वारा करोड़ों रुपये की संपत्ति खड़ी किए जाने की चर्चा भी की जा रही है।
हालांकि संपत्ति की वास्तविक कीमत, उसके स्वामित्व, आय के स्रोत और कथित चिकित्सा गतिविधियों के बीच संबंध की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस दावे को फिलहाल आरोप और स्थानीय चर्चा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

यदि जांच में बिना आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता के उपचार किए जाने की पुष्टि होती है, तो चिकित्सा गतिविधियों के साथ-साथ संबंधित आय और संपत्ति के स्रोत की जांच की मांग भी उठ सकती है।

70 से अधिक गांव, डेढ़ लाख आबादी और डॉक्टरों की कमी
अमलीपदर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत 70 से अधिक गांव और करीब डेढ़ लाख की आबादी आने की जानकारी सामने आई है। दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में चिकित्सकों तथा स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता एक चुनौती बनी हुई है। ऐसे में समय पर सरकारी स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिलने पर ग्रामीण निजी उपचार की ओर रुख करते हैं।

यही परिस्थितियां यदि अनधिकृत चिकित्सा गतिविधियों को बढ़ावा देती हैं, तो इसका सीधा असर ग्रामीण मरीजों की सुरक्षा पर पड़ सकता है।

विभाग का पक्ष—जांच के बाद ही साफ होगी तस्वीर

गरियाबंद के सीएमएचओ वी.के. नवरत्न ने सरनाबहाल में ग्रामीण की मौत की जानकारी की पुष्टि करते हुए कहा है कि मामले की जांच के लिए टीम बनाई जा रही है और सभी मामलों की जांच कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि अमलीपदर में दो डॉक्टरों की पोस्टिंग की गई है तथा अन्य रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया भी चल रही है।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही मौत के वास्तविक कारण और उपचार से जुड़े तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

अब सवाल कार्रवाई से आगे, निगरानी व्यवस्था पर

गरियाबंद, मैनपुर, छुरा, देवभोग, फिंगेश्वर और राजिम सहित जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में समय-समय पर कथित अनधिकृत इलाज की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में अब सवाल केवल किसी एक व्यक्ति या एक मेडिकल स्टोर की कार्रवाई का नहीं, बल्कि पूरे जिले में निजी चिकित्सा गतिविधियों की निगरानी व्यवस्था का है।

कितने निजी क्लीनिक और प्रैक्टिशनर वैध रूप से पंजीकृत हैं?

बिना आवश्यक योग्यता के इलाज करने वालों की नियमित जांच कितनी होती है?

मेडिकल स्टोरों में दवा बिक्री की आड़ में उपचार अथवा इंजेक्शन लगाने की गतिविधियों की निगरानी कौन करता है?

और शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाता है या नहीं कि वही गतिविधि दोबारा शुरू न हो?

अमलीपदर की दो मौतों, सरनाबहाल के मेडिकल स्टोर पर हुई कार्रवाई और शोभा से सामने आए कथित गांव-गांव इलाज के आरोपों ने इन सवालों को और गंभीर बना दिया है। अब जांच और विभागीय कार्रवाई से ही स्पष्ट होगा कि इन मामलों में आरोपों की वास्तविकता क्या है और जिले में अनधिकृत चिकित्सा गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

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