आठ साल में भी नहीं बन सका परसापानी का रंगमंच! पंचायत बदली, सरपंच बदले, लेकिन नहीं बदली निर्माण की बदहाली…पूर्व सरपंच के पूरे पांच साल के कार्यकाल में भी अधूरा रहा निर्माण, अब नए पंचायत प्रतिनिधियों के कार्यकाल में भी नहीं बदली तस्वीर; पंचायत की कार्यप्रणाली और जनपद पंचायत की मॉनिटरिंग पर उठे गंभीर सवाल

संवाददाता – अनीश सोलंकी

छुरा :-सरकारी योजनाओं के तहत विकास कार्यों की स्वीकृति देना और निर्माण शुरू कराना जितना आसान दिखाई देता है, उन्हें समय पर पूरा कराना उतना ही बड़ी जिम्मेदारी है। लेकिन जब कोई निर्माण कार्य सात-आठ साल तक अधूरा पड़ा रहे और जिम्मेदारों की ओर से उसे पूरा कराने की ठोस पहल नजर न आए, तो पंचायत की कार्यप्रणाली और संबंधित विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। ऐसा ही एक मामला छुरा विकासखंड के ग्राम पंचायत केवटीझर के आश्रित ग्राम परसापानी से सामने आया है, जहां करीब आठ साल पहले स्वीकृत रंगमंच निर्माण कार्य आज तक पूरा नहीं हो सका है। अधूरे पड़े रंगमंच की बदहाली देखकर ग्रामीणों में नाराजगी है।

हैरानी की बात यह है कि इस रंगमंच निर्माण की स्वीकृति पूर्व सरपंच के कार्यकाल में मिली थी और निर्माण कार्य भी उसी दौरान प्रारंभ कराया गया था। लेकिन पूर्व सरपंच के पूरे पांच साल के कार्यकाल में भी यह निर्माण पूरा नहीं हो पाया। इसके बाद पंचायत चुनाव हुए, जनप्रतिनिधि बदले, पंचायत की जिम्मेदारी नए सरपंच के हाथों में आ गई, लेकिन परसापानी के रंगमंच की किस्मत नहीं बदली। वर्षों बीत जाने के बाद भी यह निर्माण अधूरा पड़ा हुआ है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस निर्माण कार्य को पूरा कराने की जिम्मेदारी किसकी थी और अब तक किसी ने इसकी सुध क्यों नहीं ली?

पांच साल का कार्यकाल बीता, फिर भी नहीं हुआ निर्माण पूरा!

पंचायत स्तर पर होने वाले विकास कार्यों में समय-सीमा और गुणवत्ता का विशेष महत्व होता है। लेकिन परसापानी का रंगमंच निर्माण सरकारी कार्यप्रणाली की ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है, जहां वर्षों तक काम अधूरा रहने के बावजूद जवाबदेही तय होती नजर नहीं आ रही है। ग्रामीणों के लिए यह रंगमंच सामाजिक, सांस्कृतिक और सार्वजनिक आयोजनों का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता था, लेकिन अधूरे निर्माण के कारण इसका वास्तविक लाभ गांव को नहीं मिल पा रहा है।

जनपद पंचायत की मॉनिटरिंग आखिर कहां है?

इस पूरे मामले में केवल ग्राम पंचायत ही नहीं, बल्कि जनपद पंचायत की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर वर्षों से अधूरे पड़े निर्माण कार्य का निरीक्षण किसने किया? क्या संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है? यदि जानकारी है तो निर्माण पूरा कराने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई? क्या जनपद पंचायत स्तर पर पंचायतों में स्वीकृत निर्माण कार्यों की नियमित समीक्षा नहीं होती? यदि होती है तो परसापानी का रंगमंच आज तक अधूरा कैसे है?

पूर्व सचिव को फोन लगाया, नहीं मिला जवाब

रंगमंच निर्माण कार्य आखिर किन कारणों से अधूरा पड़ा है और पूर्व सरपंच के कार्यकाल में इसकी प्रगति क्यों नहीं हो सकी, इसकी जानकारी लेने के लिए ग्राम पंचायत केवटीझर के पूर्व सचिव देवेंद्र ठाकुर से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया। लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। जिसके चलते निर्माण कार्य अधूरा रहने के कारणों और उस दौरान की गई कार्रवाई को लेकर उनका पक्ष सामने नहीं आ सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

अब जांच और जवाबदेही तय करने की जरूरत

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से अधूरे पड़े रंगमंच को अब और अधिक समय तक इसी हालत में नहीं छोड़ा जाना चाहिए। संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्य की स्वीकृति, तकनीकी प्राक्कलन, जारी राशि, अब तक हुए व्यय और वर्तमान भौतिक स्थिति की जांच करनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि निर्माण कार्य बीच में क्यों रुका और इतने वर्षों तक उसे पूरा कराने के लिए क्या प्रयास किए गए।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी परसापानी पहुंचकर अधूरे रंगमंच की सुध लेंगे या फिर यह निर्माण सरकारी फाइलों और जिम्मेदारों की अनदेखी के बीच यूं ही बदहाल पड़ा रहेगा? आठ साल का लंबा इंतजार ग्रामीणों के लिए अब निराशा और जिम्मेदारों के लिए जवाबदेही का सवाल बन चुका है।

पंचायत चुनाव में चेहरे बदल जाते हैं, लेकिन अधूरे विकास कार्यों की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। परसापानी का रंगमंच इसका जीता-जागता उदाहरण बन गया है।

मुख्य खबरें