खुले कुएँ बने मौत का जाल, सुरक्षा इंतजामों की चूक से मादा तेंदुआ शावक की दर्दनाक मौत

 

छुरा वन परिक्षेत्र में वन्यप्राणी सुरक्षा पर फिर सवाल, लापरवाही उजागर

छुरा :- छुरा वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम टोनहीडबरी में वन विभाग की सुरक्षा चूक एक बार फिर एक बेजुबान की जान पर भारी पड़ गई। शिकार की तलाश में जंगल से बाहर निकली मादा तेंदुआ शावक खुले और असुरक्षित कुएँ में गिर गई, जहां समय पर बचाव और पूर्व सुरक्षा इंतजाम नहीं होने के कारण उसकी दर्दनाक मौत हो गई।

जानकारी के अनुसार ग्राम टोनहीडबरी निवासी किसान राय सिंह ठाकुर जब सुबह करीब 7 बजे अपने खेत की ओर गए, तो उन्होंने गांव से कुछ दूरी पर स्थित अपने कुएँ में तेंदुआ गिरा हुआ देखा। तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दी गई। सूचना के बाद मौके पर पहुंचे वनकर्मियों ने तेंदुआ को कुएँ से बाहर निकाला, लेकिन लंबे समय तक कुएँ में फंसे रहने से शावक की जान नहीं बचाई जा सकी।

तेंदुआ की मौत की सूचना पर गरियाबंद सामान्य वन मंडल के वनमंडलाधिकारी शशिगानंदन, और उपवनमंडलाधिकारी राजिम विकास चंद्राकर घटनास्थल पहुंचे। उनकी मौजूदगी में डॉक्टरों द्वारा मादा तेंदुआ शावक का पोस्टमार्टम कर नियमानुसार दाह संस्कार किया गया। वन विभाग के अनुसार तेंदुआ कम उम्र का शावक था, जो रात के समय शिकार के लिए गांव की ओर आया था।

सुरक्षा के नाम पर खानापूर्ति, चूक का खामियाजा वन्यप्राणी ने भुगता

गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी छुरा से लगे ग्राम पंडरीपानी में इसी तरह खुले कुएँ में तेंदुआ गिर गया था, जिसे ग्रामीणों और वन विभाग की संयुक्त कोशिश से सुरक्षित रेस्क्यू किया गया था। बावजूद इसके, आज तक जंगल क्षेत्र से सटे कुओं का न तो समुचित सर्वे हुआ और न ही सुरक्षा जाली लगाई गई, जो सीधे तौर पर विभागीय लापरवाही को दर्शाता है।बचाव के उपाय क्यों नहीं किए गए?

वन्यप्राणी प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते—

जंगल से लगे सभी खुले कुओं का सर्वे,कुओं पर लोहे की जाली या मजबूत ढक्कन,रात के समय वन्यजीव मूवमेंट वाले क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड,

और संवेदनशील इलाकों में नियमित मॉनिटरिंगकी जाती, तो इस अकाल मौत को रोका जा सकता था।

जिम्मेदारी तय होगी या फिर अगली मौत का इंतजार?

लगातार हो रही ऐसी घटनाएं यह सवाल खड़ा करती हैं कि—

क्या वन्यप्राणियों की सुरक्षा केवल कागजी योजनाओं तक सीमित है?

क्या इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?

और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे?यह घटना सिर्फ एक तेंदुआ शावक की मौत नहीं, बल्कि सुरक्षा में चूक और प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम है, जिसने फिर साबित कर दिया कि समय रहते उपाय न किए गए तो मानव-वन्यजीव संघर्ष और अकाल मौतों का सिलसिला थमने वाला नहीं है।

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