अधूरी जानकारी पर फैला भ्रम, प्रशासन ने दस्तावेजों के साथ रखी वास्तविक स्थिति,,“उड़ीसा में रह रहा था कमार परिवार, लौटते ही शुरू हुई सरकारी मदद”PM-JANMAN सर्वे में शामिल, तीन माह के भीतर आवास स्वीकृति की तैयारी तेज

रिपोर्टर :- अनीश सोलंकी
गरियाबंद,। राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र बताए जा रहे विशेष पिछड़ी जनजाति कमार परिवार को लेकर सामने आए मामले पर जिला प्रशासन ने विस्तृत तथ्यात्मक जानकारी जारी करते हुए स्थिति स्पष्ट की है। प्रशासन ने कहा कि संबंधित परिवार को शासन की योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया पूरी गंभीरता और नियमानुसार की जा रही है तथा मामले को अधूरी जानकारी के आधार पर प्रस्तुत किया गया।
जिला प्रशासन के अनुसार संबंधित परिवार वर्ष 2011 और 2018 में हुए प्रधानमंत्री आवास योजना सर्वेक्षण में सूचीबद्ध नहीं था। वहीं वर्ष 2024 में हुए नवीन आवास सर्वेक्षण के दौरान भी परिवार ग्राम में निवासरत नहीं मिला। प्रशासनिक रिकॉर्ड के मुताबिक परिवार लंबे समय से पड़ोसी राज्य उड़ीसा में रह रहा था और हाल ही में वापस गरियाबंद लौटा है।
प्रशासन ने बताया कि वर्तमान में परिवार का पीएम-जनमन योजना के तहत सर्वे कराया जा रहा है। पात्रता अनुसार आगामी तीन माह के भीतर प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास स्वीकृति की प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जिले में पहले ही हजारों पात्र हितग्राहियों को आवास योजना का लाभ दिया जा चुका है तथा शेष पात्र परिवारों की सूची भारत सरकार को भेजी जा चुकी है।
मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए प्रशासन ने परिवार को तत्काल राहत उपलब्ध कराई है। राशन कार्ड, जॉब कार्ड एवं आयुष्मान कार्ड बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही ग्राम पंचायत स्तर पर रहने की व्यवस्था भी सुनिश्चित कर दी गई है। आगामी सर्वे एवं जनगणना में परिवार का नाम जोड़े जाने की कार्रवाई भी प्रारंभ हो चुकी है।
जिला प्रशासन ने दोहराया कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए शासन लगातार कार्य कर रहा है तथा किसी भी पात्र परिवार को योजनाओं से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। प्रशासन ने मीडिया और आमजनों से अपील की कि तथ्यों की पूर्ण जानकारी के साथ ही खबरों को प्रस्तुत किया जाए ताकि भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।
