पंडरीपानी में जंगल का काला खेल — आस्था के नाम पर पेड़ों का कत्लेआम, कब्जाधारियों की खुली लूट!, वन विभाग मौन, ग्रामीण आगबबूला — जांच की उठी मांग, खुलने लगे रसूखदारों के राज

✍️ रिपोर्टर- अनीश सोलंकी
छुरा जिला गरियाबंद
छुरा :- आस्था” के नाम पर अधर्म!
छुरा नगर से सटे पंडरीपानी के हरे-भरे जंगल अब धीरे-धीरे इंसानी लालच की भेंट चढ़ते जा रहे हैं। मंदिर निर्माण की आड़ में वन भूमि पर दिनदहाड़े कब्जा हो रहा है, झाड़ियां ही नहीं अब बड़े पेड़ भी कुल्हाड़ी की धार सहने को मजबूर हैं। सबसे बड़ा सवाल – वन विभाग जानता सब है, पर करता क्या है?
❗ लाइव जंगल कटाई – कुल्हाड़ी लेकर पहुंचे ‘कब्जाधारी’
सोमवार सुबह पंडरीपानी के थारघाट जंगल में दर्जनभर लोग हाथों में कुल्हाड़ी लेकर जंगल पर धावा बोल दिए। झाड़ियों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं और कब्जे की ज़मीन तैयार की जा रही थी। सूचना मिलते ही पांडुका वन परिक्षेत्र की टीम मौके पर पहुंची, कुल्हाड़ी जब्त की गई, लेकिन इससे कब्जाधारियों का हौसला कम नहीं हुआ। उल्टे, वनकर्मियों से जमकर बहस, झूमा-झटकी और आरोपों की बौछार शुरू हो गई।
😡 “हम तो कब से देख रहे हैं जंगल बिकते!” – ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
स्थानीय लोगों ने आग उगलते हुए कहा, “सालों से पंडरीपानी के जंगलों पर कब्जा हो रहा है, बेचने का धंधा चल रहा है। वन विभाग जानकर भी चुप है। अब अगर कोई मंदिर बना रहा है तो रोक क्यों?”
ग्रामीणों ने उदाहरण दिया कि जब शराब दुकान बन रही थी, तब तो वन विभाग ने बड़ा पेड़ दिखाकर निर्माण रोक दिया, लेकिन अब उसी जगह मंदिर बन रहा है, और विभाग मौन साधे है।
🏗️ नर्सरी भी हड़प ली गई!
कभी जहां पौधों की नर्सरी थी, अब वहां स्थानीय रसूखदारों ने कब्जा जमा रखा है। पंचायत और समिति के ‘सेटिंग’ से राजस्व और वन भूमि धीरे-धीरे हथियाई जा रही है। वन अधिकार पट्टों में भी भारी गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।
🔥 ग्रामीणों की गरज –
➡️ पिछली 10 वर्षों के अतिक्रमण की उच्चस्तरीय जांच हो
➡️ वन अधिकार पट्टों की पुन: समीक्षा हो
➡️ पंचायत और विभाग के गठजोड़ पर कार्रवाई हो
➡️ कब्जा करने वालों के नाम उजागर कर मुकदमा दर्ज हो
🤔 सवालों के घेरे में वन विभाग
कब तक चलेगा ‘देखो और चुप रहो’ वाला खेल?
रसूखदारों पर मेहरबानी और गरीबों पर सख्ती क्यों?
क्या जंगल की जमीन अब “जिसकी लाठी उसकी भैंस” हो गई है?
अब नहीं रुके तो जंगल बचना मुश्किल!
यदि अभी भी प्रशासन नहीं चेता, तो कुछ वर्षों में छुरा का यह हरियाली से लदा इलाका सिर्फ ‘कभी जंगल था’ की कहानी बनकर रह जाएगा।
विशेष बिंदु:
मंदिर की आड़ में कब्जे का जाल
पंचायत, समिति और रसूखदारों की मिलीभगत
नर्सरी और बड़े पेड़ों की जमीन भी हड़पी गई
ग्रामीणों में आक्रोश, वन विभाग पर पक्षपात के आरोप
👉 जल्द आ रही अगली कड़ी: किसने, कब और कैसे कब्जाया जंगल — नाम सहित खुलासा! बने रहिए हमारे साथ।
