जनपद सदस्य का बड़ा आरोप: नहर निर्माण में करोड़ों का खेल, ठेकेदार बोला– “जहां शिकायत करना है करो, ऊपर तक सब सेटिंग है”,,जल संसाधन विभाग पर मिलीभगत के गंभीर आरोप, जनसमस्या निवारण शिविर में लिखित शिकायत से मचा हड़कंप

रिपोर्टर – अनीश सोलंकी
छुरा :– किसानों को वर्षभर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने और खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए सरकार जलाशयों, डायवर्सन और नहर निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य खेत-खेत तक पानी पहुंचाकर किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना है, लेकिन छुरा जल संसाधन विभाग में इन्हीं महत्वाकांक्षी योजनाओं पर भ्रष्टाचार की काली छाया पड़ने का आरोप सामने आया है।
जनपद सदस्य नारायण सिन्हा ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और ठेकेदार की कथित मिलीभगत से नहर निर्माण कार्यों में भारी अनियमितता, गुणवत्ताहीन निर्माण और भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत जनसमस्या निवारण शिविर में सौंपते हुए उच्चस्तरीय तकनीकी जांच तथा दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
कई निर्माण कार्यों पर उठे सवाल
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि छुरा डिवीजन अंतर्गत बोड़रगांव (बोड़रडीह) जलाशय डायवर्सन, कोगीगांव जलाशय, खरखरा जलाशय, भरुवामुड़ा जलाशय सहित विभिन्न नहर निर्माण कार्यों में निर्माण एजेंसी द्वारा गुणवत्ता के सभी मानकों की अनदेखी की जा रही है। आरोप है कि निर्धारित मापदंडों के अनुरूप निर्माण नहीं हो रहा और करोड़ों रुपये की योजनाओं को कागजों में ही गुणवत्तापूर्ण दिखाया जा रहा है।
निरीक्षण करने पहुंचे जनप्रतिनिधि को दी गई कथित धमकी
जनपद सदस्य ने शिकायत में कहा है कि जब वे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता देखने मौके पर पहुंचे तो ठेकेदार के कर्मचारियों ने सहयोग करने के बजाय अभद्र व्यवहार किया। आरोप है कि कर्मचारियों ने खुलेआम कहा—
“जहां तक शिकायत करना है कर लो… ऊपर तक सब सेटिंग है… हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।”
यदि यह आरोप सही साबित होता है तो यह केवल घटिया निर्माण का मामला नहीं बल्कि पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
‘अधिकारी फोन तक नहीं उठाते’
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जल संसाधन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी जनप्रतिनिधियों की शिकायतों को गंभीरता से लेने के बजाय उनके फोन तक रिसीव नहीं करते। इससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि विभागीय अधिकारियों के संरक्षण में ही गुणवत्ताहीन निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं।
किसानों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप
सरकार का उद्देश्य किसानों को सिंचाई सुविधा देकर उत्पादन बढ़ाना है, लेकिन यदि निर्माण कार्य ही मानकों के विपरीत होंगे तो नहरें कुछ वर्षों में ही जवाब दे देंगी। इसका सीधा नुकसान किसानों को होगा, जबकि करोड़ों रुपये की सरकारी राशि भी बर्बाद हो जाएगी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर जनता के टैक्स का पैसा किसकी जेब भरने के लिए खर्च किया जा रहा है।
जनसमस्या निवारण शिविर में पहुंची शिकायत
जनपद सदस्य नारायण सिन्हा ने लिखित आवेदन देकर मांग की है कि सभी निर्माण कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की लैब जांच हो, कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए तथा दोषी ठेकेदार, इंजीनियर और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए।
जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे बड़े सवाल
यह मामला सामने आने के बाद जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है और आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह छुरा क्षेत्र में नहर निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है। अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह शिकायत को गंभीरता से लेकर निष्पक्ष जांच कराता है या फिर मामला फाइलों में ही दबकर रह जाता है।
हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोप जनपद सदस्य की शिकायत पर आधारित हैं। जल संसाधन विभाग एवं संबंधित ठेकेदार का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
