चार दशक से बसे परिवार आज भी “अपनी जमीन” के हक से वंचित छुरा के आवासपारा-गढ़ियापारा की पीड़ा उठाकर नगर पंचायत अध्यक्ष लुकेश्वरी निषाद ने सरकार से मांगा न्याय

रिपोर्टर :- अनीश सोलंकी
छुरा :- जिंदगी भर मेहनत कर मिट्टी के टुकड़े पर अपना आशियाना बनाने वाले सैकड़ों परिवार आज भी अपने ही घर पर मालिकाना हक के इंतजार में हैं। छुरा नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 02, 03 और 04 स्थित आवासपारा एवं गढ़ियापारा में रहने वाले परिवार पिछले 40 से 50 वर्षों से यहां बसे हुए हैं, लेकिन आज तक उन्हें जमीन का वैधानिक अधिकार नहीं मिल पाया है। अब इस दर्द और संघर्ष की आवाज को नगर पंचायत अध्यक्ष लुकेश्वरी थानसिंह निषाद ने सरकार तक पहुंचाते हुए छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव को पत्र भेजकर आबादी पट्टा और भूमि नियमन की मांग उठाई है।
यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं, बल्कि उन परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और भविष्य का सवाल है जिन्होंने वर्षों पहले झाड़ियों और घासधरती वाले क्षेत्र को अपनी मेहनत से बसाहट में बदल दिया। जिन गलियों में कभी सन्नाटा और वीरानी थी, वहां आज बच्चों की किलकारियां गूंजती हैं, परिवार बस चुके हैं, लेकिन विडंबना यह है कि इन लोगों के सिर पर आज भी “अपनी जमीन” का कानूनी अधिकार नहीं है।
नगर पंचायत अध्यक्ष लुकेश्वरी थानसिंह निषाद ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि क्षेत्र के सैकड़ों परिवार पीढ़ियों से यहां निवास कर रहे हैं। समय के साथ यह पूरा इलाका आबादी क्षेत्र में तब्दील हो चुका है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अब तक न सर्वे हुआ और न ही भूमि का नियमन। यही कारण है कि यहां रहने वाले गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार हर दिन अनिश्चितता और परेशानी के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं।
सबसे अधिक पीड़ा उन जरूरतमंद परिवारों को होती है जो शासन की योजनाओं का लाभ लेने के लिए दर-दर भटकते हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना हो, शौचालय निर्माण योजना हो या अन्य जनकल्याणकारी योजनाएं— वैध दस्तावेजों के अभाव में अनेक परिवार इन सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं। जिन लोगों ने वर्षों की मेहनत से अपने घर बनाए, वही लोग आज सरकारी कागजों में “अधिकारहीन” बने हुए हैं।
नगर पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि सामाजिक न्याय का विषय है। वर्षों से बसे परिवारों को उनका हक मिलना चाहिए ताकि वे सम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन जी सकें। उन्होंने मांग की है कि आवासपारा और गढ़ियापारा क्षेत्र का तत्काल सर्वेक्षण कर पात्र परिवारों को आबादी पट्टा अथवा भूमि नियमन की सुविधा प्रदान की जाए।
यदि यह मांग पूरी होती है तो सैकड़ों परिवारों को अपने घर और जमीन पर स्थायी अधिकार मिलेगा। इससे न केवल लोगों का भविष्य सुरक्षित होगा बल्कि शासन की योजनाओं का लाभ भी सीधे जरूरतमंदों तक पहुंच सकेगा।
क्षेत्रवासियों ने नगर पंचायत अध्यक्ष लुकेश्वरी थानसिंह निषाद की इस पहल को गरीबों और वर्षों से संघर्ष कर रहे परिवारों की आवाज बताते हुए स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि दशकों से चली आ रही इस समस्या के समाधान की दिशा में यह पहली गंभीर और प्रभावी पहल है, जिससे अब उन्हें न्याय की उम्मीद दिखाई देने लगी है।
