पेसा कानून को बना दिया मजाक, ग्रामसभा के अधिकारों की उड़ाई जा रही धज्जियां” AAP सांसद संजय सिंह का सरकार पर बड़ा हमला—“आम आदमी पेड़ काटे तो जेल, उद्योगपतियों के लिए लाखों पेड़ों की बलि क्यों?”

गरियाबंद में गरजे संजय सिंह: “अडानी को फायदा पहुंचाने सरकार एजेंट की तरह कर रही काम, आदिवासियों के अधिकारों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं”

रिपोर्टर :- अनीश सोलंकी 
गरियाबंद। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर गरियाबंद पहुंचे आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार पर जमकर निशाना साधा। गरियाबंद सर्किट हाउस में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने जंगलों की कटाई, आदिवासी अधिकारों, पेसा कानून, ग्रामसभा की शक्तियों, उद्योगों की स्थापना और युवाओं के मुद्दों को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकार उद्योगपतियों के हित में काम कर रही है और छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों तथा जंगलों को लेकर लिए जा रहे फैसलों में स्थानीय ग्रामसभाओं और आदिवासी समाज की आवाज को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने तीखे अंदाज में कहा कि “पेसा कानून को मजाक बना दिया गया है। पेसा क्षेत्र में किसी भी उद्योग या विकास परियोजना के लिए ग्रामसभा के अधिकारों और सहमति का महत्व है, लेकिन छत्तीसगढ़ में पेसा कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।”

ग्रामसभा के अधिकार आखिर किसलिए?”

संजय सिंह ने कहा कि पेसा कानून का मूल उद्देश्य ही अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों को उनकी जल, जंगल, जमीन और स्थानीय संसाधनों से जुड़े फैसलों में अधिकार देना है।
ग्रामसभा को मजबूत किए बिना आदिवासी क्षेत्रों का वास्तविक विकास संभव नहीं है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी क्षेत्र में बड़े उद्योग, खनन या अन्य परियोजनाओं से स्थानीय लोगों के जीवन, जंगल और जमीन पर प्रभाव पड़ता है, तो ऐसे मामलों में स्थानीय ग्रामसभा की आवाज को सर्वोच्च प्राथमिकता क्यों नहीं दी जाती?
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज वर्षों से अपने अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है। ऐसे में पेसा कानून सिर्फ सरकारी दस्तावेजों में दर्ज कानून बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका जमीन पर प्रभाव दिखाई देना चाहिए।

आम आदमी एक पेड़ काटे तो जेल, अडानी के लिए लाखों पेड़ों की बलि क्यों?”

संजय सिंह ने छत्तीसगढ़ के जंगलों की कटाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि एक तरफ यदि कोई सामान्य वनवासी या आम आदमी पेड़ काटता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है, वहीं दूसरी तरफ बड़े उद्योगों और परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई की जा रही है
उन्होंने सवाल किया—“जब एक आम आदमी के लिए एक पेड़ इतना महत्वपूर्ण है कि उसे काटने पर जेल हो सकती है, तो फिर बड़े उद्योगपतियों के लिए लाखों पेड़ों की बलि क्यों?”
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रही है। हालांकि, ये आरोप संजय सिंह के राजनीतिक बयान हैं और संबंधित सरकार अथवा कंपनियों का पक्ष इस प्रेसवार्ता में प्रस्तुत नहीं किया गया।

अडानी के एजेंट की तरह काम कर रही सरकार”

AAP सांसद ने केंद्र और राज्य सरकार पर सीधे निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि “सरकार अडानी के एजेंट की तरह काम कर रही है।”
उन्होंने कहा कि देश के प्राकृतिक संसाधन जनता और आने वाली पीढ़ियों की संपत्ति हैं। इन संसाधनों का इस्तेमाल किस प्रकार हो, इसमें स्थानीय लोगों और ग्रामसभाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की जमीन, जंगल और आजीविका से जुड़े फैसले उनकी भागीदारी के बिना नहीं किए जाने चाहिए।

“10 करोड़ आदिवासी, फिर भी प्रतिनिधित्व पर सवाल”

संजय सिंह ने देश में आदिवासी समाज की बड़ी आबादी का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में लगभग 10 करोड़ आदिवासी हैं, लेकिन देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्थाओं में उनके प्रतिनिधित्व को लेकर अभी भी सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज ने देश के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, लेकिन आज भी उसे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने आदिवासी समाज को राजनीतिक, सामाजिक और संवैधानिक स्तर पर मजबूत प्रतिनिधित्व देने की जरूरत बताई।

छात्रों पर लाठी और आंसू गैस, युवाओं के भविष्य की चिंता नहीं”

सरकार पर हमला बोलते हुए संजय सिंह ने युवाओं और छात्रों के आंदोलनों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले छात्रों के साथ सख्ती की जा रही है।
उन्होंने कहा कि छात्रों को पिटवाना और उनके ऊपर आंसू गैस छोड़ना यह दर्शाता है कि सरकार युवाओं की आवाज सुनने के बजाय उसे दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को रोजगार, बेहतर शिक्षा और सुरक्षित भविष्य चाहिए, लेकिन सरकार इन मूलभूत मुद्दों से ध्यान भटका रही है।

जनता भाड़ में जाए, सरकार को पूंजीपतियों की चिंता”—संजय सिंह

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता आम जनता की समस्याओं के बजाय बड़े पूंजीपतियों को खुश करना बन गई है। उन्होंने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, रोजगार और आदिवासी अधिकार जैसे मुद्दों पर सरकार को गंभीरता से काम करना चाहिए।
संजय सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में जनता सबसे बड़ी ताकत है और जनता चुनाव के माध्यम से सरकारों के कामकाज का जवाब दे सकती है।

2028 में जनता से सरकार बदलने की अपील

आगामी 2028 के विधानसभा चुनाव को लेकर संजय सिंह ने जनता से ऐसी सरकार चुनने की अपील की जो आम जनता, आदिवासियों, युवाओं और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए काम करे।
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि जनता अपने अधिकारों को समझे और ऐसी सरकार चुने जो जल, जंगल, जमीन, ग्रामसभा और आदिवासी अधिकारों की रक्षा करे।

पेसा, जंगल और ग्रामसभा बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा

संजय सिंह की प्रेसवार्ता में पेसा कानून, ग्रामसभा के अधिकार, जंगलों की कटाई और आदिवासी समाज के अधिकार प्रमुख मुद्दे रहे। विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर गरियाबंद में दिए गए इन बयानों ने छत्तीसगढ़ में आदिवासी अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

मुख्य खबरें