8 माह से अटका मनरेगा का भुगतान, उधारी के बोझ तले दबे सरपंच,,काम पूरा कराने में शासन का दबाव, भुगतान मांगने पर इंतजार ही इंतजार! दुल्ला के सेवा सेतु शिविर में सरपंचो ने भुगतान कराने कलेक्टर से लगाई गुहार
संवाददाता – अनीश सोलंकी
छुरा :- गांवों में विकास कार्यों को गति देने वाली मनरेगा योजना अब पंचायत प्रतिनिधियों के लिए आर्थिक परेशानी का कारण बनती जा रही है। काम पूरा हो चुका है, निर्माण सामग्री लग चुकी है, मजदूरों ने काम कर दिया, लेकिन मटेरियल भुगतान अब भी अटका हुआ है। करीब 8 माह से लंबित भुगतान ने छुरा विकासखंड के कई सरपंचों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। काम कराने के लिए उधार में सामग्री लेने वाले सरपंच अब व्यापारियों और सप्लायरों की तकादे झेलने को मजबूर हैं।
लंबित भुगतान का यह मुद्दा शनिवार को ग्राम दुल्ला में आयोजित ब्लाक स्तरीय सेवा सेतु शिविर में जोरदार तरीके से उठा। सरपंच संघ छुरा ब्लाक अध्यक्ष पन्नालाल ध्रुव के नेतृत्व में क्षेत्र के सरपंचों ने गरियाबंद कलेक्टर रणवीर शर्मा को ज्ञापन सौंपकर मनरेगा के पूर्ण हो चुके कार्यों की लंबित मटेरियल राशि शीघ्र जारी कराने की मांग की।
सरपंचों का कहना है कि पंचायतों को विकास कार्य समय पर पूरा कराने के लिए लगातार निर्देश दिए जाते हैं। पंचायत प्रतिनिधि गांव के विकास को प्राथमिकता देते हुए कई बार स्थानीय व्यापारियों से उधार में सीमेंट, गिट्टी, रेत, ईंट सहित अन्य निर्माण सामग्री लेकर काम पूरा करा देते हैं। लेकिन काम पूरा होने के बाद भुगतान की प्रक्रिया लंबी खिंचने से अब वही उधारी सरपंचों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है।
‘काम के समय दबाव, भुगतान के समय चुप्पी’—सरपंच संघ अध्यक्ष ने उठाए सवाल
सरपंच संघ छुरा ब्लाक अध्यक्ष पन्नालाल ध्रुव ने लंबित भुगतान को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों से काम समय पर पूरा कराने की अपेक्षा की जाती है, लेकिन भुगतान में हो रही देरी को लेकर उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा है।
उन्होंने कहा, “काम कराने के समय शासन-प्रशासन का दबाव रहता है कि कार्य निर्धारित समय में पूरा होना चाहिए। सरपंच भी गांव के विकास के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। जरूरत पड़ने पर अपनी पंचायत की प्रतिष्ठा और काम को बचाने के लिए व्यापारियों से उधार में सामग्री लेकर कार्य पूरा कराया जाता है। लेकिन जब भुगतान की बारी आती है तो आठ-आठ महीने तक राशि अटक जाती है। भुगतान कब होगा, इसकी स्पष्ट जानकारी तक नहीं मिलती।”
ध्रुव ने आगे कहा कि “एक तरफ सरकार की योजनाओं को गांव तक पहुंचाने और काम समय पर पूरा कराने की जिम्मेदारी सरपंचों पर है, वहीं दूसरी तरफ काम पूरा होने के बाद भुगतान के लिए सरपंचों को व्यापारियों के सामने जवाब देना पड़ रहा है। जिन लोगों से उधार में सामग्री ली गई थी, वे अब अपनी रकम मांग रहे हैं। सरपंच आखिर कहां से भुगतान करें? शासन की राशि लंबित है और उधारी का दबाव लगातार बढ़ रहा है।”
उन्होंने कहा कि सरपंचों ने किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि गांव के विकास और शासन की योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए समय पर काम कराया। ऐसे में लंबे समय तक भुगतान रोकना पंचायत प्रतिनिधियों के लिए गंभीर आर्थिक संकट पैदा कर रहा है।
व्यापारियों की तकादे से बढ़ी परेशानी
मनरेगा के तहत कई पंचायतों में काम कराने के लिए निर्माण सामग्री स्थानीय दुकानदारों और सप्लायरों से उधार ली गई थी। सरपंचों को उम्मीद थी कि कार्य पूर्ण होने के बाद शासन से मटेरियल राशि प्राप्त होते ही व्यापारियों का भुगतान कर दिया जाएगा। लेकिन महीनों बीत जाने के बावजूद राशि नहीं आने से अब व्यापारी भी लगातार अपनी रकम मांग रहे हैं।
सरपंचों का कहना है कि लगातार तकादे के कारण कई पंचायत प्रतिनिधियों को व्यक्तिगत स्तर पर आर्थिक दबाव झेलना पड़ रहा है। भुगतान में देरी केवल वित्तीय समस्या नहीं रह गई है, बल्कि इससे मानसिक परेशानी और सामाजिक दबाव भी बढ़ रहा है।
‘गांव का काम रुकना नहीं चाहिए’ सोचकर उधार में कराया निर्माण
सरपंच संघ के अनुसार पंचायत प्रतिनिधियों ने गांव में विकास कार्य रुकने नहीं दिए। शासन की योजनाओं के तहत स्वीकृत कार्यों को पूरा कराने के लिए सामग्री की व्यवस्था की गई और निर्माण कार्य पूरे कराए गए। लेकिन अब भुगतान लंबित होने से वही सरपंच आर्थिक संकट में हैं जिन्होंने काम को समय पर पूरा कराने के लिए जिम्मेदारी उठाई थी।
सरपंचों का कहना है कि यदि समय पर भुगतान नहीं हुआ तो आने वाले समय में पंचायत स्तर पर विकास कार्यों के लिए सामग्री उधार लेना भी मुश्किल हो सकता है। व्यापारियों का भरोसा प्रभावित होने पर पंचायतों को निर्माण सामग्री उपलब्ध कराने में परेशानी आ सकती है।
सेवा सेतु शिविर में कलेक्टर के सामने रखी पूरी समस्या
ग्राम दुल्ला में आयोजित सेवा सेतु शिविर में प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी का लाभ उठाते हुए सरपंच संघ ने लंबित मनरेगा भुगतान का मुद्दा सीधे कलेक्टर के सामने रखा। संघ ने ज्ञापन के माध्यम से पूर्ण हो चुके कार्यों की लंबित मटेरियल राशि का जल्द निराकरण कराने की मांग की।
सरपंच संघ ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि गांव के विकास में प्रशासन के साथ कदम से कदम मिलाकर काम कर रहे हैं। ऐसे में समय पर भुगतान भी उसी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। काम पूरा कराने की जिम्मेदारी यदि पंचायत प्रतिनिधियों की है तो किए गए काम की राशि समय पर उपलब्ध कराना शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है।
अब सरपंचों की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर है। उन्हें उम्मीद है कि कलेक्टर स्तर से मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे और लंबे समय से लंबित भुगतान की प्रक्रिया में तेजी आएगी।
सरपंच संघ की प्रमुख मांगें
मनरेगा के पूर्ण हो चुके कार्यों की लंबित मटेरियल राशि जल्द जारी हो।
लंबित भुगतान की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी खत्म की जाए।
पंचायतों को भुगतान की स्थिति की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
उधार में सामग्री लेकर कार्य पूरा कराने वाले सरपंचों को जल्द राहत मिले।
भविष्य में कार्य पूर्ण होने के बाद भुगतान अनिश्चितकाल तक लंबित न रहे।
