फाइलों में दफन न्याय, भूख से जूझते गरीब!” तीन माह का राशन गबन, प्रशासन की चुप्पी पर उठे तीखे सवाल

छुरा ।सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई एक बार फिर उजागर हो गई है। छुरा विकासखंड के ग्राम पंचायत जरगांव के आश्रित ग्राम रवेली में गरीब मजदूर परिवार तीन माह से राशन के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक तंत्र मानो गहरी नींद में सोया हुआ है। यहां “जांच” के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हुई, जबकि गरीबों का हक आज भी फाइलों में कैद है।
तीन माह का राशन डकार गया सिस्टम
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि राशन दुकान संचालक ने जनवरी, फरवरी और मार्च माह का राशन ही हजम कर लिया, जिससे सैकड़ों परिवारों के सामने भुखमरी जैसी स्थिति पैदा हो गई है। ग्रामसभा में जब यह मुद्दा उठा तो हर हितग्राही ने एक स्वर में तीन माह से राशन नहीं मिलने की पुष्टि की।
जांच पूरी… लेकिन कार्रवाई ‘गायब’!
शिकायत के बाद फूड इंस्पेक्टर सोनाली ठाकुर ने जांच कर पंचनामा तैयार किया और राशन की कमी की बात भी सामने आई। लेकिन इसके बाद पूरा मामला रहस्यमयी ढंग से ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट एस.डी.एम. कार्यालय को सौंप दी गई है—लेकिन सवाल यह है कि आखिर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
प्रशासन की चुप्पी = मिलीभगत?
अब यह मामला सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता और संभावित मिलीभगत की ओर इशारा कर रहा है।
क्या जांच रिपोर्ट सिर्फ फाइलों की शोभा बढ़ाने के लिए बनाई जाती है?
क्या गरीबों का हक कागजों में ही सीमित रह जाएगा?
आखिर दोषियों को बचाने की कोशिश किसके इशारे पर हो रही है?
“जांच–जांच” का खेल, गरीबों की भूख से खिलवाड़
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन “जांच–जांच” का खेल खेलकर मामले को लटकाए हुए है, जबकि असली पीड़ित गरीब परिवार हैं जो रोज की रोटी के लिए जूझ रहे हैं।
तीन माह का राशन नहीं मिलने से कई परिवार कर्ज लेकर या आधे पेट रहकर गुजारा करने को मजबूर हैं।
उबल रहा आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी
ग्राम रवेली के हितग्राहियों में भारी नाराजगी है। उनका साफ कहना है कि अगर जल्द ही उन्हें उनका बकाया राशन नहीं मिला और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
अब प्रशासन की परीक्षा
पूरा मामला अब एस.डी.एम. कार्यालय और खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल बनकर खड़ा है।
क्या प्रशासन नींद से जागेगा और गरीबों को न्याय दिलाएगा?
या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
यह सिर्फ राशन गबन नहीं, बल्कि गरीबों के हक, सम्मान और जिंदगी से जुड़ा सवाल है। अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह चुप्पी प्रशासन के लिए सबसे बड़ा आरोप बन जाएगी।
