आदिवासी मुख्यमंत्री को भी अपने समाज का उत्सव मनाने की आजादी नहीं!” जनक ध्रुव का भाजपा-आरएसएस पर बड़ा हमला—बोले, आदिवासियों को वोट बैंक समझती है भाजपा, ‘वनवासी’ की पहचान थोपने की कोशिश

रिपोर्टर :- अनीश सोलंकी 

गरियाबंद। विश्व आदिवासी दिवस को लेकर गरियाबंद की सियासत गरमा गई है। बिंद्रानवागढ़ विधायक जनक ध्रुव ने भाजपा और आरएसएस पर आदिवासी समाज की अस्मिता, संस्कृति और अधिकारों के खिलाफ काम करने का गंभीर आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है। स्थानीय रेस्ट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता में विधायक ने कहा कि “भाजपा ने आदिवासी को मुख्यमंत्री तो बना दिया, लेकिन उन्हें अपने ही आदिवासी भाई-बहनों के साथ विश्व आदिवासी दिवस मनाने से भी रोक रही है।”

जनक ध्रुव ने आरोप लगाया कि आरएसएस आदिवासी समाज की स्वतंत्र पहचान और संस्कृति को स्वीकार करने के बजाय उन्हें ‘वनवासी’ की पहचान देने की मानसिकता रखती है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी हजारों वर्षों पुरानी संस्कृति, परंपरा, भाषा, जीवनशैली और सामाजिक व्यवस्था है। इसे किसी दूसरी पहचान में समेटने का प्रयास आदिवासी अस्मिता का अपमान है।

सत्ता में आते ही बदल गया भाजपा का रवैया”

विधायक जनक ध्रुव ने कहा कि वर्ष 2023 से पहले भाजपा के नेता भी विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासी समाज को शुभकामनाएं देते थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार ने शासकीय स्तर पर विश्व आदिवासी दिवस का आयोजन नहीं किया।
उन्होंने कहा कि 9 अगस्त को पूरी दुनिया में आदिवासी समाज ने विश्व आदिवासी दिवस मनाया, लेकिन भाजपा के किसी नेता, यहां तक कि आदिवासी नेताओं, राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री की ओर से भी आदिवासी समाज के लिए बधाई संदेश नहीं आया।
जनक ध्रुव ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस महज नाच-गाने और उत्सव का अवसर नहीं है, बल्कि यह आदिवासी समाज की एकता, संस्कृति, सभ्यता, अधिकार और अस्तित्व को दुनिया के सामने रखने का दिन है।

“32 प्रतिशत आबादी वाले समाज का सरकारी स्तर पर सम्मान क्यों नहीं?”

विधायक ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज की आबादी करीब 32 प्रतिशत है। बस्तर से लेकर सरगुजा और गरियाबंद तक आदिवासी समाज ने अपनी संस्कृति, परंपरा और संघर्ष से प्रदेश की पहचान को समृद्ध किया है। ऐसे में विश्व आदिवासी दिवस को शासकीय स्तर पर नहीं मनाया जाना आदिवासी समाज की भावनाओं की अनदेखी है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी संस्कृति छत्तीसगढ़ की पहचान की बुनियाद है। आदिवासी संस्कृति के बिना छत्तीसगढ़ की पहचान अधूरी है।

आदिवासियों को केवल वोट बैंक समझती है भाजपा”

जनक ध्रुव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा आदिवासी समाज को केवल वोट बैंक के रूप में देखती है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी समाज की संस्कृति और अधिकारों की बात आने पर सरकार का रवैया बदल जाता है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को अपनी संस्कृति, परंपरा और अधिकारों के लिए किसी की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। विश्व आदिवासी दिवस आदिवासी समाज का गौरव है और इसे समाज आगे भी पूरी गरिमा और गर्व के साथ मनाता रहेगा।

जल-जंगल-जमीन ही आदिवासी समाज की पहचान

विधायक ने कहा कि जल, जंगल और जमीन आदिवासी समाज के लिए सिर्फ संसाधन नहीं, बल्कि जीवन और अस्तित्व का आधार हैं। जंगल उनके लिए केवल लकड़ी नहीं, नदी केवल पानी नहीं और जमीन केवल संपत्ति नहीं है। जंगल उनका जीवन है, जल उनकी सांस है, जमीन उनकी पहचान है और संस्कृति उनकी आत्मा है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज ने सदियों से प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखा है। आज जब पूरी दुनिया पर्यावरण संरक्षण की बात कर रही है, तब आदिवासी समाज की पारंपरिक जीवनशैली दुनिया के सामने एक मिसाल है।

“आदिवासी अधिकारों से कोई समझौता नहीं”

जनक ध्रुव ने कहा कि बस्तर, कांकेर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, कोरबा, जशपुर, बलरामपुर से लेकर गरियाबंद के वनांचलों तक आदिवासी समाज ने छत्तीसगढ़ की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत किया है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि आदिवासी समाज की अस्मिता, संस्कृति, सम्मान और जल-जंगल-जमीन के अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। भाजपा और आरएसएस चाहे विश्व आदिवासी दिवस को लेकर कोई भी रवैया अपनाएं, लेकिन आदिवासी समाज अपनी पहचान और संस्कृति के लिए हमेशा आवाज उठाता रहेगा।

कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी में हुई पत्रकार वार्ता

पत्रकार वार्ता के दौरान जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुखचंद बेसरा, रमेश शर्मा, छगन यादव, नीरज ठाकुर, पवन सोनकर, सुनील तिवारी, रमेश वर्मा सहित कांग्रेस के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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