गांव में दहशत का अंत: वन विभाग के ‘ऑपरेशन तेंदुआ’ को बड़ी सफलता, पिंजरे में सुरक्षित कैद हुआ खूंखार शिकारी कई दिनों से ग्रामीणों और मवेशियों पर मंडरा रहा था खतरा, हाई अलर्ट के बीच रेस्क्यू टीम ने दिखाई मुस्तैदी, स्वास्थ्य परीक्षण के बाद जंगल में छोड़ा गया तेंदुआ

 

रिपोर्टर :- अनीश सोलंकी 

गरियाबंद,। गरियाबंद वनमंडल के अंतर्गत आने वाले ग्राम केराबाहरा में कई दिनों से तेंदुए की लगातार आवाजाही से ग्रामीणों में भय और दहशत का माहौल बना हुआ था। खेतों, गांव की गलियों, मवेशियों के बाड़ों और आबादी के समीप तेंदुए के दिखाई देने की घटनाओं के बाद लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो गया था। बच्चों को अकेले बाहर भेजने से परिजन डर रहे थे, जबकि किसानों और चरवाहों में भी भय व्याप्त था। बढ़ते खतरे को देखते हुए वन विभाग ने तत्काल मोर्चा संभाला और विशेष रणनीति के तहत चलाए गए ‘ऑपरेशन तेंदुआ’ में आखिरकार बड़ी सफलता हासिल करते हुए तेंदुए को सुरक्षित रूप से पिंजरे में कैद कर लिया।
वन विभाग को लगातार मिल रही सूचनाओं के आधार पर वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में मौके पर विशेष निगरानी शुरू की गई। वनमंडलाधिकारी के मार्गदर्शन में उप वनमंडलाधिकारी, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के अधिकारियों, वन्यप्राणी चिकित्सकों तथा प्रशिक्षित लेपर्ड रेस्क्यू टीम को मौके पर तैनात किया गया। तेंदुए की गतिविधियों का लगातार अध्ययन करने के बाद उसके संभावित मार्ग पर केज ट्रैप (पिंजरा) लगाया गया। विभाग की सुनियोजित रणनीति और सतर्क निगरानी के चलते तेंदुआ सुरक्षित रूप से पिंजरे में कैद हो गया।
तेंदुए के पकड़ में आते ही पूरे क्षेत्र में राहत की लहर दौड़ गई। सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। वन विभाग ने भीड़ को नियंत्रित करते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। पूरे अभियान के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि न तो तेंदुए को कोई नुकसान पहुंचे और न ही किसी ग्रामीण की जान जोखिम में पड़े।
पकड़े गए तेंदुए का मौके पर ही तीन सदस्यीय पशु चिकित्सक दल द्वारा विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। डॉक्टरों ने उसकी शारीरिक स्थिति, संभावित चोट, बीमारी तथा प्राकृतिक आवास में वापस छोड़े जाने की क्षमता का परीक्षण किया। स्वास्थ्य परीक्षण में तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ पाए जाने के बाद विशेषज्ञों की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी गई। आवश्यक अनुमति मिलने के बाद वन विभाग ने उसे सुरक्षित तरीके से उसके प्राकृतिक वन क्षेत्र में छोड़ दिया।
वन विभाग ने बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोकना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से तेंदुए को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि यदि किसी भी क्षेत्र में तेंदुआ या अन्य वन्यजीव दिखाई दे तो अफवाह फैलाने या स्वयं पकड़ने का प्रयास न करें, बल्कि तत्काल वन विभाग को सूचना दें ताकि विशेषज्ञ टीम समय रहते आवश्यक कार्रवाई कर सके।
इस सफल अभियान ने एक बार फिर साबित कर दिया कि समय पर की गई सतर्कता, वैज्ञानिक रणनीति और प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम की मुस्तैदी से मानव और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। गांव में कई दिनों से फैली दहशत अब समाप्त हो चुकी है और ग्रामीणों ने वन विभाग की इस त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई की सराहना की है।

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