कलेक्ट्रेट में कृषि–पशुपालन विभाग की समीक्षा बैठक में नहीं बुलाए जाने पर जिला पंचायत सभापति भड़के — बोले, “निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को दरकिनार कर चल रहा अफसरशाही का खेल!”

गरियाबंद :- गरियाबंद कलेक्ट्रेट में बीते दिनों कलेक्टर भगवान सिंह उइके की अध्यक्षता में कृषि, पशुपालन एवं मत्स्यपालन विभागों की संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के आला अधिकारी मौजूद रहे, लेकिन इस बैठक में जिला पंचायत के कृषि एवं पशुपालन स्थायी समिति के सभापति लेखराज ध्रुव को नहीं बुलाया गया। इस बात को लेकर सभापति लेखराज ध्रुव ने कड़ी नाराज़गी जाहिर की है।

सभापति ध्रुव ने कहा कि — “जब बैठक हमारे विभाग की थी, तो संबंधित समिति के सभापति के रूप में मेरा आमंत्रण न होना मेरे पद का अपमान है। अधिकारी वर्ग निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की अनदेखी कर अपनी मनमर्जी चला रहे हैं, यह लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है।”

उन्होंने आगे कहा कि जिला पंचायत जनता के वोट से चुने हुए प्रतिनिधियों की संस्था है, और किसी भी विभागीय समीक्षा बैठक में निर्वाचित प्रतिनिधियों की भागीदारी जरूरी है, ताकि जमीनी स्तर की वास्तविक स्थिति अधिकारियों तक पहुँच सके। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर आगे भी जनप्रतिनिधियों की अनदेखी की गई, तो वे इस मुद्दे को जिला से लेकर राज्य स्तर तक उठाएंगे।

सभापति ध्रुव ने अफसरशाही पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि जिले में अब अधिकारी मनमानी रवैया अपनाए हुए हैं, जिससे शासन की योजनाओं का सही क्रियान्वयन बाधित हो रहा है। उन्होंने मांग की कि ऐसी बैठकों में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी सुनिश्चित की जाए, ताकि जनहित के निर्णयों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।

स्थानीय राजनीतिक गलियारों में भी इस घटना को लेकर हलचल मच गई है। कई जनप्रतिनिधियों ने भी सभापति ध्रुव के समर्थन में कहा कि प्रशासन को जनप्रतिनिधियों का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि वे जनता और सरकार के बीच की कड़ी हैं।

इस पूरे मामले ने प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा का माहौल बना दिया है — अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस नाराजगी को कितनी गंभीरता से लेता है।

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