स्वच्छता मिशन की खुली पोल, जिम्मेदारों की घोर लापरवाही से लाखों की चलित शौचालय बनी कबाड़, झाड़ियों में दफन हुआ सरकारी पैसा

छुरा :- स्वच्छ भारत मिशन और सार्वजनिक सुविधा के नाम पर सरकारी खजाने से खर्च किए गए लाखों रुपये की हकीकत छुरा ब्लॉक में शर्मनाक रूप से सामने आई है। छुरा ब्लॉक को उपलब्ध कराई गई चलित शौचालय आज उपयोग के बजाय झाड़ियों, लताओं और जंगलनुमा इलाके में पड़ी–पड़ी कबाड़ में तब्दील हो चुकी है। यह दृश्य न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोलता है, बल्कि यह भी बताता है कि जिम्मेदार अधिकारी सरकारी संपत्ति के प्रति कितने संवेदनहीन हैं।

यह वही चलित शौचालय है, जिसका उपयोग तीन वर्ष पूर्व पूर्व मुख्यमंत्री के छुरा नगर आगमन के दौरान रावनाभाठा क्षेत्र में सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए किया गया था। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद इसे न तो सुरक्षित स्थान पर भेजा गया, न ही इसके रख-रखाव की कोई व्यवस्था की गई। परिणामस्वरूप यह महंगी सुविधा खुले में पड़ी रही और धीरे-धीरे असामाजिक तत्वों की नजरों में चढ़ गई।

दरवाजा-छत चोरी, ढांचा जर्जर—अब उपयोग के लायक भी नहीं

लंबे समय तक सुनसान जगह पर पड़े रहने के कारण चलित शौचालय का दरवाजा और छत चोरी हो चुकी है। भीतर का ढांचा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है और आसपास उगी घनी झाड़ियों ने इसे पूरी तरह ढंक लिया है। हालत यह है कि अब यह शौचालय किसी भी हाल में उपयोग योग्य नहीं बचा, जबकि इसे जरूरत पड़ने पर मेलों, सभाओं और सार्वजनिक आयोजनों में इस्तेमाल किया जा सकता था।

जनपद पंचायत जिम्मेदार, लेकिन जवाबदेही शून्य

नियमों के अनुसार इस चलित शौचालय के रख-रखाव और संरक्षण की जिम्मेदारी जनपद पंचायत की थी, लेकिन अधिकारियों की घोर उदासीनता के चलते न तो निगरानी हुई और न ही समय-समय पर मरम्मत। सवाल यह उठता है कि—

क्या किसी अधिकारी ने इसके संरक्षण की सुध ली?

क्या करोड़ों की योजनाओं के बीच लाखों की इस संपत्ति की कोई अहमियत नहीं?

आखिर इस नुकसान की जिम्मेदारी किस पर तय होगी?

स्वच्छता के नाम पर दिखावा, जमीनी सच्चाई शर्मनाक

एक ओर सरकारें स्वच्छता का ढिंढोरा पीटती हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर ऐसी तस्वीरें सरकारी दावों को खोखला साबित कर रही हैं। यदि समय रहते इसकी देखरेख की गई होती तो आज यह चलित शौचालय जनता के काम आ रही होती, न कि सरकारी लापरवाही की कब्रगाह बनती।

जनता में रोष, जांच और कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों में इस मामले को लेकर भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यदि इस तरह से सरकारी संसाधनों को यूं ही बर्बाद किया जाता रहा, तो विकास योजनाओं पर से जनता का भरोसा उठना तय है। अब जरूरत है कि—

पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो

जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए

और भविष्य में ऐसी लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो

अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले को लेकर जवाबदेही तय करता है या फिर यह खबर भी बाकी मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगी।

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