छुरा अंचल से बड़ा खुलासा : कबीर पंथ की आस्था पर टूटा सामाजिक कहर, पूरे परिवार का बहिष्कार – मौत के बाद भी मनाया गया जश्न!

छुरा :- ग्राम कसेकेरा से एक दिल दहला देने वाला मामला उजागर हुआ है। यहाँ कबीर पंथ में आस्था रखने वाले एक पूरे परिवार को गाँव के ही कुछ दबंग और प्रभावशाली लोगों ने समाज से बहिष्कृत कर दिया है। आरोपियों ने पीड़ित परिवार का हुक्का-पानी, पौनी-पसारी, खेत-खार और सामाजिक लेन-देन पूरी तरह बंद कर दिया है।
धर्म की आस्था पर पाबंदी
पीड़ित परिवार ने बताया कि वे हिंदू धर्म के साथ-साथ कबीर पंथ में भी आस्था रखते हैं। कबीरपंथियों से मिलना-जुलना और आश्रम में जाना आरोपियों को नागवार गुज़रा। परिणामस्वरूप गाँव के दबंगों ने फरमान जारी कर दिया – “इनका समाज से बहिष्कार करो, कोई इनके साथ लेन-देन न करे।”
अपमान से टूटा परिवार
शिकायत के अनुसार आरोपियों ने बार-बार ग्राम सभा बुलाकर पीड़ित परिवार को सरेआम अपमानित किया। मृतक राय सिंह साहू को धमकाया गया कि – “अपने बेटों और बहू से नाता तोड़ लो, वरना समाज से बाहर कर देंगे।” मानसिक प्रताड़ना और अपमान की वजह से राय सिंह साहू तनाव में रहने लगे और असमय उनकी मौत हो गई।
मौत के बाद भी नहीं रुकी नफरत
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि राय सिंह साहू की मौत के बाद आरोपियों ने शोक प्रकट करना तो दूर, बकरा कटवाकर दावत उड़ाई और जश्न मनाया। यह कृत्य पूरे गाँव में चर्चा का विषय बना हुआ है।
खेत-खार और मजदूरी तक पर रोक
पीड़ितों का कहना है कि आरोपियों ने उन्हें गाँव की ज़मीन में खेती-बाड़ी करने से रोक दिया है। यहाँ तक कि मजदूरी, पौनी-पसारी और दैनिक ज़रूरतों तक पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। “गाँव में जीना मुश्किल हो गया है” – पीड़ित परिवार की यही गुहार है।
प्रशासन मौन, दबंग बेलगाम
परिवार ने थाना छुरा, पंचायत और अन्य जगहों पर कई बार शिकायत की, यहाँ तक कि कानूनी नोटिस भी भेजा गया, मगर आज तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। आरोपियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे खुलेआम धमकी देकर नई-नई पाबंदियाँ लगा रहे हैं।
पीड़ित परिवार का आरोप –
“हम कबीर पंथ में आस्था रखते हैं, यही हमारी सबसे बड़ी गलती बना दी गई। हमें गाँव-समाज से अलग कर दिया गया। जीने-मरने की नौबत आ चुकी है। प्रशासन से न्याय की उम्मीद है।”
अब सवाल
क्या धर्म और आस्था की स्वतंत्रता पर गाँव के दबंगों का ऐसा सामाजिक आतंक जायज़ है?
क्या प्रशासन की चुप्पी ही इस अन्याय को बढ़ावा दे रही है?
गरियाबंद जिला प्रशासन कब देगा पीड़ित परिवार को न्याय?
यह मामला सिर्फ कसेकेरा गाँव का नहीं, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता बनाम सामाजिक दबंगई की जंग बन चुका है।
