शिक्षक की कमी पर फूटा छात्रों का गुस्सा: शासकीय हाई स्कूल लचकेरा में तालाबंदी, एबीवीपी और पालकों का मिला समर्थन

रिपोर्टर :- अनीश सोलंकी 

छुरा : – विकासखंड के ग्राम लचकेरा स्थित शासकीय हाई स्कूल में शिक्षकों की कमी को लेकर बुधवार को विद्यार्थियों का गुस्सा फूट पड़ा। विद्यालय में संस्कृत और सामाजिक विज्ञान विषय पढ़ाने वाली दो शिक्षिकाओं का एक साथ तबादला होने के विरोध में विद्यार्थियों ने स्कूल में ताला जड़कर जमकर नारेबाजी की। इस छात्र आंदोलन को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं एवं पालकगणों ने भी समर्थन देकर और उग्र बना दिया।

विद्यालय में शिक्षक न होने से छात्रों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। जब अचानक दो शिक्षिकाओं का स्थानांतरण आदेश आया, तो विद्यार्थियों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कक्षाओं का बहिष्कार कर मुख्य द्वार में ताला जड़ दिया। नारेबाजी करते हुए विद्यार्थियों ने शिक्षा विभाग की लापरवाही पर सवाल उठाया।

प्रदर्शन की सूचना मिलते ही मौके पर अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम), विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ), जनप्रतिनिधि, एवं पुलिस बल भी पहुंचे। स्थिति को संभालने की कोशिश की गई लेकिन छात्रों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा था।

इस दौरान विद्यालय की प्राचार्या द्वारा विद्यार्थियों को “जेल भेजने” की धमकी देने की बात सामने आई, जिससे मामला और अधिक गरमा गया। एबीवीपी के विभाग संयोजक भिषेक पांडेय ने प्रशासन को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर शिक्षकों की पूर्ति और स्थानांतरण रद्द करने की ठोस कार्यवाही नहीं की गई तो एबीवीपी उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी। साथ ही उन्होंने प्राचार्या द्वारा दी गई धमकी की कड़ी निंदा करते हुए मांग की कि विद्यार्थियों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए।

आखिरकार, छात्रों और पालकों के दबाव में प्राचार्या को माफी मांगनी पड़ी, जिसके बाद एबीवीपी ने भी चेतावनी के साथ फिलहाल आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की। उन्होंने प्रशासन को यह भी आगाह किया कि भविष्य में यदि विद्यार्थियों को धमकाया गया तो संगठन सीधे आंदोलनात्मक कार्रवाई करेगा।

क्या कहते हैं पालक और विद्यार्थी
विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों ने बताया कि लंबे समय से शिक्षक कम हैं, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है। “हमारे बच्चे हर विषय में कमजोर हो रहे हैं, और अब जो दो शिक्षक थे, उन्हें भी भेज दिया गया। हम और चुप नहीं बैठ सकते,” – ऐसा कहना था एक पालक का।

स्थिति का जायजा लेती प्रशासनिक टीम
प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजने की बात कही है। साथ ही आश्वासन दिया गया कि जल्द ही शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया पर कार्रवाई की जाएगी।

लचकेरा स्कूल में हुई यह घटना शिक्षा विभाग के कामकाज और प्रशासनिक लापरवाही पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले समय में इस प्रकार के छात्र आंदोलनों की संख्या बढ़ सकती है।

👉 यह मामला केवल एक स्कूल का नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र को झकझोरने वाला है। शिक्षकों की कमी दूर करना अब सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिये!

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