चार महीने में महज 4-5 दिन स्कूल आने का आरोप, पालकों ने जड़ा ताला,,शराब के नशे में स्कूल पहुंचने और पढ़ाई नहीं कराने का आरोप; बोले पालक—प्रधानपाठक को हटाने का आदेश मिलने तक नहीं खुलेगा स्कूल
संवाददाता – अनीश सोलंकी
छुरा। विकासखंड छुरा के ग्राम पंचायत खरखरा के आश्रित ग्राम पंडरीपानीडीह स्थित शासकीय प्राथमिक शाला में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब पालकों और ग्रामीणों ने स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया। ग्रामीणों ने स्कूल में पदस्थ प्रधानपाठक नोहर सिंह मौर्य पर लंबे समय से नियमित रूप से स्कूल नहीं आने, कथित रूप से शराब के नशे में स्कूल पहुंचने और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पालकों का कहना है कि जब तक प्रधानपाठक को हटाकर उनके स्थान पर दूसरे प्रधानपाठक की पदस्थापना का आदेश नहीं मिलता, तब तक स्कूल का ताला नहीं खोला जाएगा।
ग्रामीणों एवं शाला प्रबंधन एवं विकास समिति द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपे गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि प्रधानपाठक विगत कई दिनों से नियमित रूप से शाला नहीं आ रहे हैं। आवेदन में यह भी कहा गया है कि यदि वे स्कूल आते भी हैं तो कथित तौर पर शराब के नशे में रहते हैं, जिसके कारण बच्चों पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधानपाठक अध्यापन कार्य में भी रुचि नहीं लेते और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

चार महीने में चार-पांच दिन आने का दावा
पालकों और छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रधानपाठक चार महीने की अवधि में महज चार से पांच दिन ही स्कूल पहुंचे, और उन दिनों भी उनके नशे में होने की बात कही गई। ग्रामीणों के मुताबिक, स्कूल आने के बाद भी वे बच्चों को नियमित रूप से नहीं पढ़ाते थे तथा स्कूल में कथित रूप से गुड़ाखू करते रहते थे। इन आरोपों के चलते पालकों में नाराजगी बढ़ती गई।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि 15 अगस्त जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर भी प्रधानपाठक स्कूल नहीं पहुंचे, जिससे ग्रामीणों और पालकों में और आक्रोश फैल गया।

48 बच्चों की जिम्मेदारी, एक शिक्षक पर पूरा भार
शाला प्रबंधन एवं विकास समिति के आवेदन में स्कूल की दर्ज संख्या 48 छात्र बताई गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रधानपाठक नियमित रूप से स्कूल नहीं आते हैं तो इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होना स्वाभाविक है। उनका कहना है कि एक शिक्षक के भरोसे इतने बच्चों की पढ़ाई सुचारु रूप से संचालित करना मुश्किल है।

समिति ने पहले भी समझाया, नहीं हुआ सुधार
ग्रामीणों के अनुसार प्रधानपाठक को शाला प्रबंधन एवं विकास समिति द्वारा दो-तीन बार समझाइश भी दी जा चुकी है। इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं आया। समिति का आरोप है कि समझाइश के बाद भी प्रधानपाठक के स्कूल आने-जाने और अध्यापन कार्य को लेकर शिकायतें बनी रहीं।

ताला लगने की सूचना पर पहुंचे अधिकारी
स्कूल में पालकों द्वारा ताला लगाए जाने की जानकारी मिलने के बाद विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय से एडिशनल बीईओ विनोद सिन्हा मौके पर पहुंचे। उन्होंने पालकों और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया तथा स्कूल का ताला खोलने के लिए बातचीत की, लेकिन पालक अपनी मांग पर अड़े रहे।
पालकों का स्पष्ट कहना है कि केवल समझाइश से अब समस्या का समाधान नहीं होगा। वे प्रधानपाठक को हटाकर उनके स्थान पर दूसरे प्रधानपाठक की पदस्थापना का आदेश चाहते हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांग पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक स्कूल खोलने पर सहमति नहीं दी जाएगी।
डीईओ को सौंपा आवेदन, कार्रवाई की मांग
शाला प्रबंधन एवं विकास समिति तथा ग्रामवासियों ने जिला शिक्षा अधिकारी गरियाबंद को आवेदन सौंपकर प्रधानपाठक नोहर सिंह मौर्य को तत्काल शाला से हटाने की मांग की है। आवेदन में कहा गया है कि यदि एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई नहीं की गई तो समिति और समस्त ग्रामवासी स्कूल में तालाबंदी कर विरोध जारी रखेंगे।
अब मामला शिक्षा विभाग के सामने है और ग्रामीणों की शिकायतों पर विभागीय जांच एवं कार्रवाई का इंतजार है। आरोपों की वास्तविकता और प्रधानपाठक की उपस्थिति/कार्यप्रणाली की स्थिति विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
