गड्ढे पाटे, आफत नहीं! डामर सड़क पर मुरुम डालकर विभाग ने बढ़ाई धूल की मुसीबत,,,लोक निर्माण विभाग की ‘मरम्मत’ पर उठे सवाल, गड्ढों से राहत मिली तो धूल के गुबार ने राहगीरों का किया जीना मुहाल

 

सड़क पर मुरुम डालकर छोड़ दिया, वाहनों के गुजरते ही उड़ रही धूल; जनता पूछ रही—सड़क सुधार रहे हैं या नई परेशानी खड़ी कर रहे हैं?

संवाददाता – अनीश सोलंकी 
छुरा :- सड़कों पर बने जानलेवा गड्ढों से परेशान लोगों को उम्मीद थी कि लोक निर्माण विभाग अब सड़क की हालत सुधारेगा और सुरक्षित सफर की राह आसान होगी। विभाग ने गड्ढे भरने की कवायद शुरू भी कर दी, लेकिन मरम्मत का तरीका अब खुद सवालों के घेरे में आ गया है। छुरा-बागबाहरा मार्ग पर डामर सड़क के गड्ढों को भरने के लिए गिट्टी और डामर की जगह मुरुम डालकर उसे सड़क पर ही फैला दिया गया। गड्ढे कुछ हद तक दबे तो जरूर, लेकिन अब सड़क से उठने वाले धूल के गुबार ने राहगीरों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है।

स्थिति यह है कि एक तरफ गड्ढों से राहत मिली तो दूसरी तरफ धूल ने सड़क पर कब्जा जमा लिया। जैसे ही कोई वाहन इस मार्ग से गुजरता है, सड़क पर पड़ा सूखा मुरुम और मिट्टी हवा में उड़ने लगता है। देखते ही देखते सड़क पर धूल का गुबार छा जाता है। दोपहिया वाहन चालक, पैदल राहगीर और आसपास रहने वाले लोग इस धूल से परेशान हैं।

गड्ढे भरने का ‘नया तरीका’, लेकिन सड़क पर छोड़ दी गई मुरुम
अब तक सड़क के गड्ढों की मरम्मत के लिए गिट्टी, डामर और अन्य निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया जाता रहा है, ताकि सड़क की सतह मजबूत और सुरक्षित हो सके। लेकिन छुरा-बागबाहरा मार्ग पर विभाग द्वारा अपनाए गए तरीके ने लोगों को हैरान कर दिया है।

गड्ढों में मुरुम डालकर उसे सड़क की सतह पर फैला दिया गया।

इसके बाद वाहनों की आवाजाही शुरू होते ही मुरुम के बारीक कण हवा में उड़ने लगे। सड़क की मरम्मत पूरी हुई या आधी-अधूरी छोड़ दी गई—यह सवाल अब राहगीरों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

लोगों का कहना है कि यदि मुरुम डालने के बाद उसे सही तरीके से दबाया जाता, आवश्यकतानुसार पानी का छिड़काव किया जाता और सड़क की सतह को व्यवस्थित किया जाता तो शायद धूल की समस्या इतनी गंभीर नहीं होती।

वाहन गुजरते ही उठता है धूल का गुबार, पीछे चलने वाले को सड़क तक नहीं दिखती

छुरा-बागबाहरा मार्ग पर वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। छोटे वाहनों से लेकर भारी वाहन तक इस मार्ग से गुजरते हैं। ऐसे में सड़क पर फैली सूखी मुरुम वाहनों के पहियों के साथ उड़कर वातावरण में फैल रही है।

खासकर दोपहिया वाहन चालकों की परेशानी ज्यादा बढ़ गई है। सामने या आगे चल रहे वाहन के पीछे धूल का गुबार उठने के कारण कुछ समय के लिए दृश्यता प्रभावित होती है। राहगीरों को मुंह और नाक ढंककर गुजरना पड़ रहा है।

गड्ढों से बचने के लिए सड़क किनारे चलें तो धूल, सड़क के बीच चलें तो मुरुम और वाहनों का खतरा—आखिर राहगीर जाएं तो जाएं कहां? स्थानीय लोगों का यही सवाल विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

जनता का सीधा सवाल—क्या विभाग को सिर्फ गड्ढे दिखाई देते हैं, धूल नहीं?

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की मरम्मत जरूरी है, लेकिन मरम्मत ऐसी होनी चाहिए जिससे समस्या का स्थायी समाधान हो। यदि गड्ढे भरने के बाद सड़क पर ही मुरुम छोड़ दी जाएगी और उससे धूल उड़ती रहेगी तो एक परेशानी खत्म करके दूसरी परेशानी पैदा करने का क्या मतलब है?

लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या सड़क निर्माण और मरम्मत का मतलब सिर्फ गड्ढे भर देना है? क्या राहगीरों की सुविधा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी भी विभाग की नहीं है?

जनता का कहना है कि विभाग को यह भी देखना चाहिए कि सड़क पर डाली गई निर्माण सामग्री वाहनों की आवाजाही के दौरान धूल का कारण न बने। सड़क की गुणवत्ता के साथ-साथ राहगीरों की सुरक्षा और सुविधा को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

‘गड्ढा मुक्त’ सड़क के नाम पर ‘धूल मुक्त’ कब होगी सड़क?

बारिश के मौसम में सड़क पर गड्ढे बनना और उनका बढ़ना आम समस्या है। ऐसे में विभाग द्वारा गड्ढों की मरम्मत किया जाना जरूरी है। लेकिन लोगों का कहना है कि मरम्मत के नाम पर केवल मुरुम डालकर जिम्मेदारी पूरी कर देना पर्याप्त नहीं है।

सड़क पर डाली गई मुरुम यदि ठीक से दबाई नहीं गई तो आने वाले दिनों में बारिश और भारी वाहनों की आवाजाही से वह फिर फैल सकती है और सड़क की सतह भी खराब हो सकती है। वहीं सूखे मौसम में यही मुरुम धूल बनकर उड़ती रहेगी। सड़क की गुणवत्ता, वाहन चालकों की दृश्यता और राहगीरों की परेशानी तीनों का सवाल खड़ा हो गया है।

 

स्वास्थ्य को लेकर भी बढ़ी चिंता, सांस लेना हो रहा मुश्किल

लगातार उड़ती धूल को लेकर स्थानीय लोगों में स्वास्थ्य संबंधी चिंता भी बढ़ गई है। राहगीरों का कहना है कि सड़क से गुजरते समय धूल सीधे चेहरे पर आती है। कई लोगों को मुंह पर कपड़ा रखकर सफर करना पड़ रहा है।

विशेषकर बच्चे, बुजुर्ग और सांस संबंधी संवेदनशीलता वाले लोगों को धूल से परेशानी होने की आशंका जताई जा रही है। लोगों का कहना है कि सड़क विकास के नाम पर ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिए कि सुरक्षित आवागमन के बजाय लोगों को धूल और प्रदूषण से जूझना पड़े।

हालांकि केवल सड़क की धूल को किसी बीमारी का प्रत्यक्ष कारण बताना चिकित्सकीय जांच के बिना उचित नहीं होगा, लेकिन धूल से होने वाली असुविधा और वायु गुणवत्ता को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल, स्थायी मरम्मत की मांग

स्थानीय लोगों ने लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि छुरा-बागबाहरा मार्ग पर डाली गई मुरुम को व्यवस्थित तरीके से दबाया जाए और धूल उड़ने की समस्या का तत्काल समाधान किया जाए। जरूरत के अनुसार पानी का छिड़काव कराने के साथ सड़क की सतह को यातायात के अनुकूल बनाया जाए।

लोगों का कहना है कि सड़क पर गड्ढे रहना भी परेशानी है और गड्ढे भरने के बाद धूल का गुबार उठना भी। इसलिए विभाग को ऐसी मरम्मत करनी चाहिए जो कुछ दिनों की राहत देने के बजाय लंबे समय तक सड़क को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाए।

अब देखना यह है कि लोक निर्माण विभाग इस ‘मुरुम वाली मरम्मत’ को अंतिम समाधान मानकर चुप बैठता है या फिर सड़क पर उड़ रही धूल को देखकर आगे की ठोस कार्रवाई करता है।

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