30 साल से भवन का इंतज़ार: हायर सेकेंडरी का दर्जा मिला, लेकिन आज भी हाई स्कूल के कमरों में ठूंसे जा रहे 250 विद्यार्थी!,1998 में हुआ था उन्नयन, 2026 में भी नहीं बना भवन — एक कमरे में कई कक्षाएं, शिक्षा व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल

गरियाबंद । सरकारें हर साल शिक्षा बजट बढ़ाने, आधुनिक स्कूल बनाने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के बड़े-बड़े दावे करती हैं। लेकिन गरियाबंद जिले के छुरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम कनसिंघी का शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल इन दावों की हकीकत बयां कर रहा है।

यहां वर्ष 1990-91 में हाई स्कूल की स्थापना हुई और 27 अगस्त 1998 को इसे हायर सेकेंडरी में उन्नत कर दिया गया, लेकिन विडंबना देखिए कि उन्नयन के 30 साल बाद भी हायर सेकेंडरी का अपना भवन तक नहीं बन सका।

सबसे गंभीर बात यह है कि लगभग 250 विद्यार्थी कला, विज्ञान और वाणिज्य संकाय में अध्ययनरत हैं, लेकिन पर्याप्त कक्ष नहीं होने के कारण अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों को एक ही कमरे में बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है। ऐसे माहौल में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कल्पना करना भी मुश्किल है।

30 साल… 11 हजार से ज्यादा दिन… लेकिन एक भवन तक नहीं!

1998 में जब स्कूल को हायर सेकेंडरी का दर्जा दिया गया था, तब उम्मीद थी कि जल्द ही नया भवन बनेगा, विज्ञान प्रयोगशाला बनेगी, पुस्तकालय होगा और विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिलेगी। लेकिन तीन दशक गुजर गए, सरकारें बदलीं, अधिकारी बदले, योजनाएं बदलीं, लेकिन नहीं बदली तो कनसीही स्कूल की बदहाल तस्वीर।

आज भी विद्यार्थी उसी पुराने भवन में पढ़ने को मजबूर हैं, जो हाई स्कूल के लिए बना था।

एक कमरे में कई कक्षाएं… आखिर कैसे होगी पढ़ाई?

स्कूल में कमरों की भारी कमी के कारण कई बार अलग-अलग कक्षाओं और संकायों के विद्यार्थियों को एक साथ बैठाया जाता है। एक तरफ शिक्षक पढ़ाते हैं तो दूसरी तरफ दूसरे विषय के विद्यार्थी शोर और व्यवधान के बीच पढ़ाई करने को मजबूर रहते हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह व्यवस्था सीधे तौर पर विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ है।

न प्रयोगशाला… न पुस्तकालय… न स्टाफ रूम

भवन के अभाव में विद्यालय में—
विज्ञान प्रयोगशाला की समुचित व्यवस्था नहीं।

समृद्ध पुस्तकालय नहीं।

शिक्षकों के लिए अलग स्टाफ रूम नहीं।

विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त कक्ष नहीं।

यानी जिस स्तर की सुविधाएं हायर सेकेंडरी विद्यालय में अनिवार्य मानी जाती हैं, वे आज भी यहां अधूरी हैं।

मुख्यमंत्री से लगाई गुहार, सौंपा गया मांग पत्र

विद्यालय प्रबंधन समिति, ग्राम पंचायत, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि कनसिंघी हायर सेकेंडरी विद्यालय के लिए तत्काल नए भवन की स्वीकृति प्रदान की जाए।
ज्ञापन में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और वर्तमान भवन में पढ़ाई कराना अत्यंत कठिन हो गया है।

250 विद्यार्थियों का भविष्य आखिर किसके भरोसे?

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते भवन निर्माण नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भयावह हो जाएगी। शिक्षा के अधिकार की बात करने वाली व्यवस्था में यदि विद्यार्थी एक कमरे में ठूंसकर पढ़ने को मजबूर हों, तो यह पूरे शिक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

सबसे बड़ा सवाल

जब 1998 में स्कूल को हायर सेकेंडरी बनाया गया था, तो भवन क्यों नहीं बनाया गया?

क्या 30 साल भी सरकार और शिक्षा विभाग के लिए कम समय है?

आखिर 250 विद्यार्थियों के भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा?

क्या कनसीही के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकारu मिलेगा या वे यूं ही बदहाल व्यवस्था का शिकार बने रहेंगे?

“30 साल से सिर्फ आश्वासन… अब विद्यार्थियों को भवन चाहिए, बहाने नहीं!”

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