एक ही कुर्सी, वर्षों से वही जिम्मेदारी! छुरा के बीईओ के.एल. मतावले पर अब दस्तावेजों ने खड़े किए बड़े सवाल,तबादला नीति के बीच लंबी पदस्थापना पर उठे सवाल,

युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को लेकर कलेक्टर ने भेजा था अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव; लोक शिक्षण संचालनालय ने मांगे थे अभिलेख, अब मुख्यमंत्री पोर्टल में शिकायत की तैयारी

संवाददाता – अनीश सोलंकी 
छुरा। सरकारी व्यवस्था में लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों को लेकर समय-समय पर प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही के सवाल उठते रहे हैं। इसी बीच गरियाबंद जिले के छुरा विकासखंड शिक्षा कार्यालय में बीईओ के.एल. मतावले की लंबे समय से जारी पदस्थापना चर्चा का विषय बन गई है। उपलब्ध पदस्थापना रिकॉर्ड में उनका नाम 28 जुलाई 2021 से छुरा विकासखंड शिक्षा अधिकारी के रूप में दर्ज है। सितंबर 2026 तक यह अवधि पांच वर्ष से अधिक हो चुकी है।
मामला इसलिए भी गंभीर सवाल खड़े करता है क्योंकि उनकी कार्यप्रणाली को लेकर पूर्व में जिला प्रशासन से लेकर लोक शिक्षण संचालनालय तक पत्राचार हो चुका है। दस्तावेजों में युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के दौरान शिक्षकों से संबंधित जानकारी में कथित विसंगतियों का उल्लेख है और तत्कालीन गरियाबंद कलेक्टर द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई से संबंधित प्रस्ताव राज्य स्तर पर भेजे जाने की बात सामने आती है।

28 जुलाई 2021 से एक ही कुर्सी, समीक्षा कब हुई?

छुरा विकासखंड शिक्षा कार्यालय में लगे पदस्थापना संबंधी बोर्ड में के.एल. मतावले का नाम क्रमांक 25 पर दर्ज है। उनके सामने “वि.खं.शि.अधि.” के पद के साथ 28.07.2021 से पदस्थापना अंकित है।

यानी लंबे समय से एक ही कार्यालय में उनकी पदस्थापना बनी हुई है। ऐसे में सवाल है कि इतने लंबे कार्यकाल के दौरान उनकी पदस्थापना की विभागीय समीक्षा कब हुई?

क्या वर्तमान पदस्थापना किसी विशेष आदेश या प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर जारी है? यदि ऐसा है तो संबंधित आदेश क्या है? और क्या लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारी के मामले में विभागीय स्तर पर समीक्षा की गई?

कलेक्टर के पत्र ने मामले को बनाया गंभीर

मामला केवल पदस्थापना तक सीमित नहीं है। उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों के अनुसार 06 जून 2025 को कार्यालय कलेक्टर, जिला गरियाबंद से स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र भेजा गया था। विषय में छुरा के विकासखंड शिक्षा अधिकारी के.एल. मतावले के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई से संबंधित मामला दर्ज है।

पत्र में वर्ष 2025 की शिक्षकों की युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के दौरान छुरा विकासखंड से भेजी गई जानकारी और जिला स्तरीय समिति के परीक्षण का उल्लेख किया गया है।

दस्तावेज में विभिन्न विद्यालयों के मामलों का उल्लेख करते हुए शिक्षकों को अतिशेष मानने तथा वरिष्ठ-कनिष्ठ स्थिति के निर्धारण से संबंधित जानकारी में विसंगतियों की बात सामने रखी गई है। इसके चलते जिला स्तरीय समिति को संबंधित मामलों का परीक्षण करना पड़ा।

युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया में उठे सवाल

दस्तावेजों में प्राथमिक शाला तिलकपारा, प्राथमिक शाला सतनामीपारा तथा अन्य विद्यालयों से जुड़े मामलों का उल्लेख है। इसी तरह माध्यमिक शाला सांकरा और हाईस्कूल/हायर सेकेंडरी स्कूलों से संबंधित मामलों का भी जिक्र किया गया है।

कलेक्टर के पत्र के अनुसार जिला स्तरीय समिति के परीक्षण के दौरान कुछ मामलों में विकासखंड स्तर से उपलब्ध कराई गई जानकारी पर सवाल सामने आए। इसके बाद संबंधित शिक्षकों एवं विद्यालयों की स्थिति को लेकर समिति स्तर पर पुनः परीक्षण किया गया।

इन घटनाक्रमों के आधार पर कलेक्टर कार्यालय से मामले को राज्य स्तर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए भेजे जाने की बात दस्तावेजों में दर्ज है।

लोक शिक्षण संचालनालय ने भी मांगे थे अभिलेख

इस मामले में एक और महत्वपूर्ण दस्तावेज सामने आया है। 03 दिसंबर 2025 को लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ द्वारा गरियाबंद जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजा गया।

इस पत्र में कलेक्टर द्वारा भेजे गए प्रस्ताव का संदर्भ लेते हुए के.एल. मतावले के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई/निलंबन एवं विभागीय जांच से संबंधित प्रस्ताव पर कार्रवाई के लिए संबंधित अभिलेख एवं दस्तावेज संचालनालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

इससे यह स्पष्ट होता है कि मामला स्थानीय स्तर की शिकायत तक सीमित नहीं रहा था, बल्कि जिला प्रशासन से राज्य स्तर के शिक्षा विभाग और लोक शिक्षण संचालनालय तक पहुंच चुका था।

अब सबसे बड़ा सवाल—दिसंबर 2025 के बाद क्या हुआ?

यहीं पूरे मामले का सबसे अहम सवाल सामने आता है।
जब जून 2025 में कलेक्टर कार्यालय से अनुशासनात्मक कार्रवाई संबंधी पत्र भेजा गया और दिसंबर 2025 में लोक शिक्षण संचालनालय ने संबंधित अभिलेख मांगे, तो सितंबर 2026 तक इस प्रकरण में क्या कार्रवाई हुई?

क्या विभागीय जांच शुरू हुई?

क्या जांच पूरी हुई?

क्या संबंधित अधिकारी से जवाब मांगा गया?

क्या आरोपों की पुष्टि हुई या नहीं?

क्या कोई अंतिम आदेश जारी हुआ?

यदि कार्रवाई नहीं हुई तो मामला अब तक लंबित क्यों है?
इन सवालों का जवाब अब संबंधित विभाग से अपेक्षित है।

‘मूल पद’ और बीईओ के प्रभार की स्थिति भी हो साफ

के.एल. मतावले की वर्तमान स्थिति को लेकर यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि वे किस मूल पद पर हैं और किस आदेश के तहत विकासखंड शिक्षा अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।
यदि वे नियमित बीईओ हैं तो उनकी पदस्थापना का आदेश क्या है? यदि प्रभार में हैं तो प्रभार आदेश कब जारी हुआ? क्या इस दौरान पदस्थापना से संबंधित कोई नवीन आदेश जारी हुआ?
इन सभी दस्तावेजों के सामने आने से मामले की वास्तविक प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

अब मुख्यमंत्री पोर्टल में शिकायत की तैयारी

मामले को लेकर अब मुख्यमंत्री पोर्टल में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित शिकायत में छुरा बीईओ की 28 जुलाई 2021 से लगातार पदस्थापना, उनकी वर्तमान पदस्थापना/प्रभार से संबंधित आदेश, युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया से जुड़े विवाद, 06 जून 2025 के कलेक्टर पत्र तथा 03 दिसंबर 2025 को लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा मांगे गए अभिलेखों की वर्तमान स्थिति की जानकारी शासन से मांगी जाएगी।

शिकायत के माध्यम से यह भी मांग किए जाने की तैयारी है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और पूर्व में जिला प्रशासन द्वारा भेजे गए अनुशासनात्मक कार्रवाई संबंधी प्रस्ताव पर अब तक हुई कार्रवाई को स्पष्ट किया जाए।

फाइलों में दबा मामला अब मुख्यमंत्री पोर्टल तक पहुंचने की तैयारी में

एक तरफ पांच वर्ष से अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थ बीईओ, दूसरी तरफ युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया से जुड़े सवाल और तीसरी तरफ कलेक्टर से लेकर लोक शिक्षण संचालनालय तक हुआ पत्राचार—इन तीनों पहलुओं ने छुरा के शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री पोर्टल में शिकायत के बाद विभाग इस पूरे मामले की फाइल को फिर से खोलकर पदस्थापना और पुराने अनुशासनात्मक प्रकरण की वास्तविक स्थिति सामने लाता है या नहीं।

विभाग से सीधे सवाल

पांच वर्ष से अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थ बीईओ की समीक्षा कब हुई?

उनकी वर्तमान पदस्थापना किस आदेश के तहत जारी है?

06 जून 2025 के कलेक्टर पत्र पर क्या कार्रवाई हुई?

03 दिसंबर 2025 को संचालनालय ने जिन अभिलेखों की मांग की थी, वे भेजे गए या नहीं?

युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया से संबंधित शिकायत की जांच का अंतिम निष्कर्ष क्या है?

क्या विभागीय जांच शुरू हुई और यदि हुई तो उसका परिणाम क्या रहा?

यदि प्रकरण लंबित है तो लंबित रहने का कारण क्या है?

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