सीजी मेट्रो न्यूज की खबर का बड़ा धमाका! ‘साहब के शाही दरबार’ पर चला विभाग का डंडा, सरकारी बंगले से 11 कर्मचारी OUT! खबर में उठे सवालों के बाद राजिम एसडीओ बंगले की बदली व्यवस्था—अब सबसे बड़ा सवाल: 11 कर्मचारी वहां किस आदेश से तैनात थे और किस काम में लगाए गए थे?

संवाददाता – अनीश सोलंकी
राजिम। सरकारी बंगला, सरकारी कर्मचारी और सरकारी खजाना… लेकिन जब एक सरकारी आवास पर कथित तौर पर 11 कर्मचारियों की तैनाती की चर्चा सामने आई तो सवालों का उठना स्वाभाविक था। सीजी मेट्रो न्यूज ने इस पूरे मामले को प्रमुखता से उठाते हुए ‘सरकारी बंगला या साहब का शाही दरबार?’ शीर्षक से सवाल खड़े किए थे। खबर सामने आने के बाद अब राजिम स्थित उप वनमंडलाधिकारी के सरकारी बंगले से 11 कर्मचारियों को हटाए जाने की जानकारी सामने आई है।
यानी जिस व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए थे, उसमें अब बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है।
खबर के बाद ‘शाही व्यवस्था’ में बड़ा फेरबदल!
पूर्व उप वनमंडलाधिकारी विकास चंद्राकर के कार्यकाल को लेकर सामने आई चर्चाओं में दावा किया गया था कि सरकारी बंगले की व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारी लगाए गए थे। इन कर्मचारियों से खाना बनाने, साफ-सफाई और अन्य घरेलू कार्य कराए जाने की बातें भी सामने आई थीं।
सीजी मेट्रो न्यूज ने सवाल किया था—अगर यह सरकारी व्यवस्था थी तो इसका लिखित आदेश कहां है?
अब बंगले से 11 कर्मचारियों की छुट्टी के बाद यह सवाल और भी अहम हो गया है।
11 कर्मचारी क्यों? अब रिकॉर्ड खोलने की बारी
कर्मचारियों को हटाने के बाद मामला यहीं खत्म नहीं होता।
असली सवाल अब भी बरकरार हैं—
11 कर्मचारी कब से तैनात थे?
किस अधिकारी के आदेश से तैनात थे?
उनकी आधिकारिक ड्यूटी क्या थी?
उपस्थिति किस रजिस्टर में दर्ज होती थी?
वेतन किस मद से निकला?
क्या उन्हें सरकारी कार्य के लिए लगाया गया था या आवासीय व्यवस्था के लिए?
इन सवालों का जवाब किसी बयान से नहीं, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड से मिलेगा।
बंगले से कर्मचारी हटे, लेकिन सवाल अभी बाकी
11 कर्मचारियों को हटाए जाने की जानकारी ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। यदि उनकी तैनाती नियमों के तहत हुई थी तो विभाग को संबंधित आदेश और नियम सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं यदि तैनाती किसी विशेष प्रशासनिक व्यवस्था के तहत थी, तो उसकी अवधि और कार्यदायित्व भी सामने आना चाहिए।
और यदि जांच में नियमों से इतर सरकारी अमले के इस्तेमाल की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय करने का सवाल भी उठेगा।
अब विभागीय रिकॉर्ड की होगी असली परीक्षा
सीजी मेट्रो न्यूज की खबर के बाद व्यवस्था बदलने की जानकारी सामने आई है, लेकिन अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या विभाग पुराने रिकॉर्ड की भी जांच करेगा?
पूर्व कार्यकाल के दौरान कर्मचारियों की तैनाती सूची, ड्यूटी आदेश, उपस्थिति रजिस्टर, वेतन भुगतान और सक्षम अधिकारी की अनुमति की जांच से पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।
‘11 कर्मचारी OUT’ के बाद अगला सवाल—जवाब कौन देगा?
सरकारी कर्मचारी जनता के पैसे से वेतन पाते हैं। इसलिए उनका इस्तेमाल किस काम में और किस आदेश के तहत हुआ, यह सार्वजनिक जवाबदेही का विषय है।
सीजी मेट्रो न्यूज ने सवाल उठाए—अब बंगले से 11 कर्मचारी हटे।
लेकिन कहानी का सबसे बड़ा सवाल अभी बाकी है—
“11 कर्मचारी आखिर वहां पहुंचे कैसे और उन्हें किसके आदेश पर लगाया गया था?”
अब गेंद वन विभाग के पाले में है। विभाग चाहे तो रिकॉर्ड सामने रखकर तमाम चर्चाओं पर विराम लगा सकता है और स्पष्ट कर सकता है कि राजिम के सरकारी बंगले में 11 कर्मचारियों की तैनाती नियमित प्रशासनिक व्यवस्था थी या किसी विशेष व्यवस्था का हिस्सा।
