“जनसमस्या निवारण शिविर या ‘घोटाले का मंच’?” 3 महीने बाद भी कार्रवाई शून्य, उपसरपंच संघ अध्यक्ष और सभापति का बड़ा खुलासा

रिपोर्टर :- अनीश सोलंकी 

छुरा :– शासन द्वारा आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से लगाए जा रहे जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर अब सवालों के घेरे में हैं। छुरा उपसरपंच संघ के ब्लॉक अध्यक्ष रुपनाथ बंजारे ने ग्राम अकलवारा में तीन माह पूर्व आयोजित शिविर को “खानापूर्ति और भ्रष्टाचार को ढंकने का मंच” करार देते हुए सनसनीखेज आरोप लगाए हैं।
बंजारे ने आरोप लगाया कि इन शिविरों के नाम पर टेंट, माइक और अन्य व्यवस्थाओं में बिल लगाकर लाखों रुपये खर्च की जाती है, जबकि जमीनी स्तर पर जनता की समस्याओं का कोई समाधान नहीं होता। उनका कहना है कि यह पूरा सिस्टम सिर्फ दिखावा बनकर रह गया है।

“साक्ष्य दिए, फिर भी कार्रवाई नहीं”

रुपनाथ बंजारे ने बताया कि उन्होंने सरपंच और सचिव द्वारा किए गए कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ पुख्ता दस्तावेजों के साथ शिविर में लिखित शिकायत दी थी। लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी न जांच शुरू हुई और न ही कोई कार्रवाई की गई। इससे साफ जाहिर होता है कि शिकायतों को जानबूझकर दबाया जा रहा है।

सभापति का आरोप भी ठंडे बस्ते में

मामले को और गंभीर बनाते हुए ग्राम पंचायत हरदी के पंचायत सभापति शत्रुघन कंवर ने भी सरपंच और सचिव पर बिना जानकारी और पंचायत प्रस्ताव के राशि निकालने का आरोप लगाया था। उन्होंने भी जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर,अकलवारा में आवेदन देकर निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की थी।

लेकिन हैरानी की बात यह है कि उनके आवेदन पर भी आज तक कोई जांच या कार्रवाई नहीं हुई। इससे यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर इन शिकायतों को दबाने के पीछे किसका संरक्षण है?

“शिविर बना दिखावा, जनता के साथ छलावा”

बंजारे ने तीखे शब्दों में कहा कि यदि शिविरों में दिए गए आवेदनों पर कार्रवाई ही नहीं होनी है, तो ऐसे आयोजनों का औचित्य क्या है? उन्होंने इसे जनता को गुमराह करने और शासन को झूठी रिपोर्ट भेजने की सुनियोजित साजिश बताया।

ग्रामीणों में आक्रोश,

मामले के उजागर होते ही ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई,तो फिर लोगो का शासन द्वारा लगाये जाने वाली जनसमस्या निवारण शिविर से भरोसा उठ जायेगा

प्रशासन की साख पर बड़ा सवाल

पूरा घटनाक्रम जिला प्रशासन की पारदर्शिता और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जनता की शिकायतों को न्याय मिलेगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

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