₹9.25 लाख की अनियमितता, धारा 40 की अनुशंसा फिर भी कार्रवाई अधर में! मडेली पंचायत में जांच के बाद भी कार्रवाई की रफ्तार पर सवाल; सरपंच से ₹5.71 लाख और सचिव से ₹3.54 लाख वसूली की अनुशंसा, 30 अप्रैल को भेजा गया था मामला

**जांच में डिजिटल सुविधा केंद्र के लिए ₹2 लाख आहरण के बावजूद निर्माण शुरू नहीं होने का खुलासा, बाजार-तालाब की नीलामी और कर वसूली की राशि पंचायत निधि में जमा नहीं होने पर भी उठे सवाल; एसडीएम बोले—न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगी कार्रवाई, जिला पंचायत सीईओ ने वर्तमान स्थिति पता करने की बात कही**
संवाददाता – अनीश सोलंकी
**छुरा :-** ग्राम पंचायत मडेली में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब केवल लाखों रुपये की वसूली तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक कार्रवाई की गति और जिम्मेदारों की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर रहा है। जांच रिपोर्ट में कुल **₹9,25,455 की राशि को लेकर गंभीर वित्तीय आपत्तियां** दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट के आधार पर सरपंच अशोक कुमार ध्रुव से ₹5,71,277.50 और सचिव अंबिका सोनी से ₹3,54,177.50 की वसूली की अनुशंसा की गई है। इसके साथ ही सरपंच के खिलाफ छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए थे।
जिला पंचायत गरियाबंद ने 30 अप्रैल 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) छुरा को पत्र जारी कर सरपंच के खिलाफ धारा 40 के तहत प्रकरण दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। लेकिन अब महीनों बीतने के बाद भी प्रकरण की वर्तमान स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आने से सवाल उठने लगे हैं कि आखिर कार्रवाई किस चरण में है? क्या न्यायिक प्रक्रिया में पेशियां शुरू हो चुकी हैं? वसूली की अनुशंसा पर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं? और पंचायत की राशि से जुड़े मामले में जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया कब पूरी होगी?
जांच में डिजिटल सुविधा केंद्र भवन, साप्ताहिक बाजार की नीलामी, तालाबों से प्राप्त राशि, मकान एवं प्रकाश कर, 15वें वित्त आयोग, मानदेय और मूलभूत मद के खर्चों में गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच के निष्कर्षों के बाद प्रशासनिक कार्रवाई कितनी तेजी से आगे बढ़ती है।
डिजटल सुविधा केंद्र के नाम पर ₹2 लाख आहरित, आठ माह बाद भी काम शुरू नहीं
जांच रिपोर्ट में सबसे गंभीर सवाल अटल डिजिटल सुविधा केंद्र/सीएससी भवन के निर्माण को लेकर उठाया गया है। भवन निर्माण के लिए 17 जून 2025 को ₹5 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई थी। इसके बाद 30 जून को कार्यादेश जारी किया गया। जांच के अनुसार जुलाई, अगस्त और सितंबर 2025 के दौरान अलग-अलग आहरण के माध्यम से ₹2 लाख की राशि निकाली गई।
लेकिन जांच के दौरान करीब आठ माह बाद भी निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं पाया गया। इतना ही नहीं, इस कार्य से संबंधित पंचायत प्रस्ताव और जरूरी दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं किए जा सके। ऐसे में सवाल उठा कि जब निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हुआ, तो राशि के आहरण और उसके उपयोग का आधार क्या था? जांच रिपोर्ट में इस राशि को सरपंच और सचिव से वसूली योग्य माना गया है।
यह मामला पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर राशि निकालने और धरातल पर काम की वास्तविक स्थिति के बीच अंतर की जांच की जरूरत को भी रेखांकित करता है।
बाजार की नीलामी में ₹77 हजार की बोली, पंचायत खाते में जमा राशि पर सवाल
ग्राम पंचायत के साप्ताहिक बाजार की नीलामी को लेकर भी जांच में गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बाजार की नीलामी में ₹77 हजार की बोली लगी थी, जिसमें से ₹67 हजार सरपंच को नकद दिए जाने की बात सामने आई। जांच में यह राशि पंचायत निधि में जमा नहीं होने का उल्लेख करते हुए सरपंच से वसूली योग्य बताया गया।
इसी तरह पंचायत क्षेत्र के पांच तालाबों की नीलामी से प्राप्त ₹37,150 की राशि भी पंचायत खाते में जमा नहीं किए जाने की बात रिपोर्ट में दर्ज है। नीलामी प्रक्रिया में आवश्यक सूचना, अनुबंध और विभागीय नियमों के पालन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
पंचायत की आय के प्रमुख स्रोतों में शामिल बाजार और तालाबों की नीलामी से प्राप्त राशि यदि पंचायत निधि में जमा नहीं हुई, तो इसकी जवाबदेही किसकी बनती है? यही वह सवाल है, जिसका स्पष्ट जवाब अब प्रशासनिक कार्रवाई से सामने आना चाहिए।
753 परिवारों से वसूला गया ₹1.12 लाख का कर, जमा कहां हुआ?
जांच रिपोर्ट में मकान एवं प्रकाश कर की वसूली को लेकर भी गंभीर मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार पंचायत क्षेत्र के 753 परिवारों से ₹150 प्रति परिवार की दर से कुल ₹1,12,950 वसूले जाने की जानकारी दर्ज है। लेकिन यह राशि पंचायत निधि में जमा नहीं होने की बात जांच में सामने आई।
बाजार, तालाब और कर से जुड़ी इन मदों में कुल ₹2,17,100 की राशि सरपंच से वसूली योग्य बताई गई है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि ग्रामीणों से वसूला गया कर पंचायत की आय का हिस्सा होता है। ऐसे में वसूली गई राशि का हिसाब, पंचायत खाते में उसका जमा होना और संबंधित अभिलेखों का उपलब्ध होना पारदर्शिता के लिहाज से जरूरी है।
15वें वित्त आयोग के ₹2.81 लाख के खर्च पर भी उठे सवाल
जांच रिपोर्ट में 15वें वित्त आयोग के तहत 19 कार्यों पर ₹2,81,755 खर्च किए जाने का उल्लेख है। लेकिन इन कार्यों के संबंध में पंचायत प्रस्ताव, ग्रामसभा अनुमोदन, बिल-वाउचर और कार्यों की वास्तविकता से जुड़े पर्याप्त दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
जांच टीम भौतिक सत्यापन और सामग्री की उपलब्धता को भी स्पष्ट रूप से प्रमाणित नहीं कर सकी। ऐसे में खर्च की गई राशि के उपयोग और कार्यों के दस्तावेजी आधार को लेकर सवाल खड़े हुए।
इसके अतिरिक्त ₹22 हजार के मानदेय तथा मूलभूत मद से कुल ₹2,04,600 के आहरण को लेकर भी जांच में आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
रिपोर्ट के अनुसार इन मदों में कुल ₹7,08,355 की राशि को सरपंच और सचिव की संयुक्त जिम्मेदारी से जोड़ते हुए दोनों से बराबर-बराबर ₹3,54,177.50 की वसूली की अनुशंसा की गई है। वहीं बाजार, तालाब और कर से संबंधित ₹2,17,100 की अतिरिक्त राशि सरपंच से वसूली योग्य मानी गई है। इस तरह सरपंच के हिस्से की कुल वसूली ₹5,71,277.50 और सचिव के हिस्से की ₹3,54,177.50 बताई गई है।30 अप्रैल को धारा 40 के तहत कार्रवाई के निर्देश, अब तक क्या हुआ?
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल जांच रिपोर्ट से आगे की कार्रवाई को लेकर है। जिला पंचायत गरियाबंद ने 30 अप्रैल 2026 को एसडीएम छुरा को पत्र जारी कर सरपंच के खिलाफ छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत प्रकरण दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे।
इसके बावजूद प्रकरण की वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं होने से प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। यदि मामला न्यायिक प्रक्रिया के तहत चल रहा है, तो अब तक की कार्यवाही और अगली प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। साथ ही, जांच में वसूली योग्य बताई गई राशि की वसूली को लेकर भी जानकारी सामने आनी चाहिए।
यह भी महत्वपूर्ण है कि जांच रिपोर्ट में जिन वित्तीय मदों पर आपत्तियां दर्ज की गई हैं, उनसे संबंधित अभिलेखों, भुगतान और राशि के उपयोग की स्थिति स्पष्ट की जाए। यदि जांच के बाद भी कोई अतिरिक्त आहरण हुआ है, तो उसकी स्थिति और जवाबदेही का परीक्षण भी आवश्यक होगा।
एसडीएम विशाल महाराणा बोले—मामला आया है, न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगी कार्रवाई
मामले में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) विशाल महाराणा से दूरभाष पर पक्ष जानने पर उन्होंने बताया कि उस समय वे बैठक में थे। उन्होंने कहा कि मामला उनके पास आया है और धारा 40 के प्रकरण में पेशी होती है। इसे न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाता है।
उन्होंने कहा कि कार्यदिवस में छुरा आने के बाद वे मामले को देखेंगे और नियमानुसार आगे की कार्रवाई करेंगे।
एसडीएम के इस बयान के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रकरण में अगली सुनवाई और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं किस चरण में हैं तथा कार्रवाई को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर बोले—वर्तमान स्टेटस पता कर जानकारी लेता हूं
जिला पंचायत गरियाबंद के सीईओ प्रखर चंद्राकर से भी प्रकरण की वर्तमान स्थिति को लेकर सवाल किया गया। उन्होंने कहा कि संबंधित प्रकरण की स्थिति पता कर लेते हैं। मामला एसडीएम के यहां चल रहा है। वे इसका वर्तमान स्टेटस जांचकर जानकारी लेंगे।
सीईओ ने यह भी कहा कि प्रकरण की वर्तमान स्थिति के संबंध में एसडीएम से जानकारी ली जा सकती है।
सीईओ के बयान से स्पष्ट है कि जिला पंचायत स्तर पर भी अब प्रकरण की मौजूदा स्थिति की जानकारी जुटाने की बात कही गई है। ऐसे में यह देखना होगा कि 30 अप्रैल को कार्रवाई के लिए भेजे गए मामले में अब तक क्या प्रगति हुई है और वसूली की अनुशंसा पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
जांच में गंभीर आपत्तियां, अब जवाबदेही तय होने का इंतजार
मडेली पंचायत का मामला पंचायत निधि के उपयोग, विकास कार्यों के दस्तावेज, नीलामी से प्राप्त राशि, कर वसूली और वित्तीय पारदर्शिता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों से जुड़ा है। जांच रिपोर्ट में सरपंच के खिलाफ धारा 40 के तहत कार्रवाई तथा सचिव के विरुद्ध पंचायत सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।
हालांकि, वसूली की अनुशंसा और कार्रवाई के निर्देश अपने आप में अंतिम दोषसिद्धि नहीं हैं। संबंधित पक्षों का जवाब, अभिलेखों का परीक्षण और सक्षम अधिकारी की प्रक्रिया के बाद ही अंतिम निर्णय होगा। इसके बावजूद जांच में दर्ज आपत्तियों और कार्रवाई की वर्तमान स्थिति को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
अब सवाल सीधे हैं—30 अप्रैल को भेजे गए प्रकरण में अब तक क्या कार्रवाई हुई? ₹9.25 लाख की वसूली की अनुशंसा पर क्या प्रगति हुई? और पंचायत निधि से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब कब मिलेगा?**
मडेली पंचायत के ग्रामीणों की नजरें अब एसडीएम छुरा की न्यायिक प्रक्रिया और जिला पंचायत प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। जांच में सामने आई वित्तीय आपत्तियों के बाद अब सबसे बड़ी अपेक्षा यही है कि मामले की वर्तमान स्थिति स्पष्ट हो, प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से आगे बढ़े और नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जाए।
