पालकी में विराजे भोलेनाथ, अघोरी कला और धुमाल की गूंज से शिवमय हुआ छुरा

 

छुरा :- सोमवार की रात छुरा नगर भक्ति, उल्लास और सांस्कृतिक वैभव के अद्भुत संगम का साक्षी बना, जब शिव भक्त परिवार के तत्वावधान में भगवान भोलेनाथ को भव्य रूप से सुसज्जित पालकी में विराजमान कर विशाल नगर भ्रमण कराया गया। ढोल-नगाड़ों, ताशों और धुमाल की गूंज से पूरा नगर देर रात तक शिवमय बना रहा। “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के गगनभेदी नारों से आसमान तक गूंज उठा और वातावरण पूरी तरह भक्तिरस में डूब गया।

 

शोभायात्रा की शुरुआत रावणाभाठा से विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद पालकी बस स्टैंड, बजरंग चौक, सदर बाजार, स्वर्णजयंती चौक और शिव चौक होते हुए नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरी। जहां-जहां से पालकी निकली, वहां श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान भोलेनाथ का स्वागत किया। कई स्थानों पर आरती उतारी गई और प्रसाद वितरण किया गया। मार्ग में जगह-जगह आकर्षक तोरणद्वार और रोशनी की विशेष व्यवस्था की गई थी, जिससे पूरा नगर दुल्हन की तरह सजा नजर आया।

 

इस भव्य शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण रहा बालोद रॉयल अघोरी ग्रुप द्वारा प्रस्तुत की गई अघोरी झांकी। कलाकारों ने अपनी अद्भुत वेशभूषा, भाव-भंगिमा और साधना शैली के प्रभावशाली प्रदर्शन से श्रद्धालुओं को रोमांचित कर दिया। अघोरी कला की अनूठी प्रस्तुति ने लोगों को आध्यात्मिकता और सनातन परंपरा की गहराई से रूबरू कराया। कलाकारों के साथ युवाओं और श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सेल्फी ली और उनकी प्रस्तुति की जमकर सराहना की।

हर हाथ में मोबाइल और चेहरे पर भक्ति की चमक साफ दिखाई दे रही थी। श्रद्धालु शोभायात्रा के हर पल को अपने कैमरे में कैद करते नजर आए। महिलाएं मंगलगीत गाती रहीं तो बच्चे भी शिव भक्ति में रंगे दिखाई दिए। विशेष रूप से युवाओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। धुमाल की थाप पर युवाओं ने घंटों तक नृत्य किया और पूरे नगर को उत्साह से भर दिया।

व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए स्वयंसेवकों और आयोजकों की टीम पूरे मार्ग में सक्रिय रही। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बावजूद अनुशासन और व्यवस्था का सुंदर उदाहरण देखने को मिला। देर रात तक चली इस शोभायात्रा ने धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और युवा ऊर्जा का अद्वितीय संगम प्रस्तुत किया।

नगर में निकली इस विराट शिव शोभायात्रा ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि छुरा की धार्मिक चेतना और सांस्कृतिक एकता आज भी उतनी ही सशक्त है। भोलेनाथ की भक्ति में डूबे इस आयोजन ने पूरे नगर को शिवमय कर दिया और श्रद्धालुओं के हृदय में अविस्मरणीय छाप छोड़ दी।

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