धान बेचने वाले किसानों के लिए बड़ी राहत! संयुक्त खाते में सहखातेदारों का अलग एग्रीस्टेक पंजीयन अब जरूरी नहीं नंबरदार अकेले करा सकेगा एग्रीस्टेक पंजीयन, खाद्य विभाग ने जारी किया स्पष्ट आदेश
संवाददाता – अनीश सोलंकी
छुरा :- खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान बेचने की तैयारी कर रहे किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। संयुक्त खाते में दर्ज किसानों को अब एग्रीस्टेक पंजीयन के लिए अलग-अलग पंजीयन कराने की जरूरत नहीं होगी। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि संयुक्त खाते में धान विक्रय के लिए केवल नंबरदार का एग्रीस्टेक पंजीयन आवश्यक होगा। सहखातेदारों को पृथक से एग्रीस्टेक पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं है।
विभाग ने यह महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण 5 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के माध्यम से दिया है। शासन के इस निर्देश के बाद संयुक्त खातों में दर्ज किसानों के बीच एग्रीस्टेक पंजीयन को लेकर बनी असमंजस की स्थिति दूर हो गई है। अब ऐसे किसानों को अलग-अलग पंजीयन कराने के लिए अनावश्यक भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी।
एक पंजीयन से हो जाएगा काम, सहखातेदारों को नहीं लगाना पड़ेगा चक्कर
शासन के निर्देश के मुताबिक यदि किसी कृषि भूमि का खाता संयुक्त रूप से दर्ज है और उसमें एक नंबरदार के साथ अन्य सहखातेदार शामिल हैं, तो धान विक्रय के लिए नंबरदार का एग्रीस्टेक पंजीयन ही पर्याप्त माना जाएगा। सहखातेदारों को अलग से एग्रीस्टेक पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं होगी।
इस स्पष्टीकरण से खासतौर पर उन परिवारों और किसानों को राहत मिलेगी, जिनकी कृषि भूमि संयुक्त खाते में दर्ज है। अलग-अलग पंजीयन की प्रक्रिया को लेकर किसानों के बीच चल रही दुविधा भी अब दूर हो गई है।
24 जून के निर्देश के बाद शासन ने किया स्थिति साफ
खाद्य विभाग ने अपने आदेश में बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में सभी श्रेणी के किसानों के लिए एग्रीस्टेक पंजीयन अनिवार्य किए जाने के संबंध में पूर्व में 24 जून 2026 को दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इसके बाद संयुक्त खाते में धान विक्रय को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत सामने आई।
इसी को लेकर विभाग ने अब साफ कर दिया है कि संयुक्त खाते में केवल नंबरदार का एग्रीस्टेक पंजीयन आवश्यक होगा। सहखातेदारों के लिए पृथक पंजीयन की अनिवार्यता नहीं है।
धान खरीदी की तैयारी में किसानों को मिलेगी सहूलियत
धान खरीदी की प्रक्रिया शुरू होने से पहले शासन का यह स्पष्टीकरण किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संयुक्त खाते वाले किसानों को अब एग्रीस्टेक पंजीयन को लेकर बार-बार अलग-अलग दस्तावेज और पंजीयन प्रक्रिया पूरी करने की जरूरत नहीं होगी।
किसानों के लिए सबसे अहम बात यह है कि संयुक्त खाते में नंबरदार का एग्रीस्टेक पंजीयन होने पर सहखातेदारों को अलग से एग्रीस्टेक पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे पंजीयन प्रक्रिया सरल होने के साथ किसानों का समय और अनावश्यक भागदौड़ भी बचेगी।
सभी कलेक्टरों को भेजा गया आदेश
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने यह आदेश प्रदेश के समस्त कलेक्टरों, खाद्य विभाग के संचालक तथा एपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक को जारी किया है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शासन के इस निर्देश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संयुक्त खाते में एग्रीस्टेक पंजीयन को लेकर दिए गए इस स्पष्टीकरण के अलावा पूर्व में जारी अन्य सभी निर्देश यथावत रहेंगे।
किसानों के लिए क्या बदला?
पहले: संयुक्त खाते को लेकर सहखातेदारों के अलग एग्रीस्टेक पंजीयन को लेकर असमंजस की स्थिति थी।
अब: धान विक्रय के लिए केवल नंबरदार का एग्रीस्टेक पंजीयन आवश्यक होगा।
सहखातेदार: अलग से एग्रीस्टेक पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं।
शासन का निर्देश: संयुक्त खाते में नंबरदार का पंजीयन पर्याप्त होगा और बाकी निर्देश यथावत रहेंगे।
किसानों के बीच राहत की खबर
धान खरीदी के पहले शासन की ओर से जारी यह स्पष्टीकरण संयुक्त खाताधारक किसानों के लिए महत्वपूर्ण राहत लेकर आया है। खासकर ऐसे परिवारों को अब अलग-अलग सदस्यों का पंजीयन कराने की चिंता नहीं करनी होगी। नंबरदार के एग्रीस्टेक पंजीयन से संयुक्त खाते में धान विक्रय की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है।
खाद्य विभाग के इस आदेश ने संयुक्त खाताधारक किसानों के बीच एग्रीस्टेक पंजीयन को लेकर चल रहे असमंजस पर विराम लगा दिया है।
