महिला आरक्षण या ‘पति राज’? छुरा जनपद की बैठक पर उठे गंभीर सवाल,,निर्वाचित महिला सदस्यों के साथ पति बैठे नजर आए, तस्वीर सामने आने के बाद जनपद की बैठक व्यवस्था पर चर्चा तेज

संवाददाता – अनीश सोलंकी
छुरा :- पंचायतों में महिलाओं को राजनीतिक और प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया में बराबरी की भागीदारी देने के उद्देश्य से आरक्षण व्यवस्था लागू की गई है। लेकिन छुरा जनपद पंचायत की एक बैठक की सामने आई तस्वीरों ने अब बैठक व्यवस्था और निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। तस्वीरों में निर्वाचित महिला जनपद सदस्यों के बाजू में उनके पति बैठे नजर आ रहे हैं। इसके बाद सवाल उठ रहा है कि जनपद पंचायत की बैठक में गैर-निर्वाचित व्यक्ति किस हैसियत से मौजूद थे और क्या उन्हें इसकी अनुमति थी?
मामला केवल किसी व्यक्ति के बैठक में मौजूद होने तक सीमित नहीं है। सवाल यह है कि जब जनपद सदस्य के रूप में महिला प्रतिनिधि निर्वाचित हैं, तो बैठक की औपचारिक प्रक्रिया में उनके साथ बैठने वाले परिजनों की भूमिका क्या थी? क्या वे महज दर्शक के तौर पर मौजूद थे या बैठक की किसी प्रक्रिया में उनकी भागीदारी भी रही?
कुर्सी निर्वाचित महिला की, साथ में पति—नियम क्या कहते हैं?
पंचायत व्यवस्था में निर्वाचित पद की जिम्मेदारी संबंधित निर्वाचित प्रतिनिधि की होती है। ऐसे में यदि किसी गैर-निर्वाचित व्यक्ति को बैठक में बैठने की अनुमति दी गई थी, तो उसका आधार स्पष्ट किया जाना चाहिए। यदि कोई अनुमति नहीं थी, तो बैठक कक्ष में उनकी मौजूदगी कैसे हुई—यह भी जांच का विषय बन सकता है।
तस्वीर सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर इसको लेकर चर्चा तेज है और लोग यह जानना चाहते हैं कि संबंधित बैठक में मौजूद व्यक्तियों की वास्तविक भूमिका क्या थी।
भाजपा कार्यकर्ता होने की चर्चा भी अपुष्ट
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी सामने आई है कि बैठक में मौजूद बताए जा रहे एक व्यक्ति ने स्वयं को भाजपा कार्यकर्ता बताया था। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इसलिए इसे केवल स्थानीय चर्चा के रूप में ही देखा जा रहा है। संबंधित व्यक्ति की राजनीतिक पहचान या बैठक में उनकी भूमिका की पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड से ही हो सकती है।
शासकीय कर्मचारी बताए जा रहे पति भी सवालों के घेरे में
स्थानीय जानकारी के अनुसार संबंधित महिला जनपद सदस्यों के पतियों में से एक के रोजगार सहायक तथा दूसरे के शासकीय उचित मूल्य दुकान के सेल्समैन होने की बात कही जा रही है। यदि यह जानकारी सही है तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि वे बैठक में किस आधिकारिक हैसियत से मौजूद थे और क्या उन्हें बैठक में बैठने की अनुमति प्राप्त थी।
इस संबंध में भी संबंधित विभागीय रिकॉर्ड और जनपद पंचायत के दस्तावेज ही अंतिम स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं।
सीईओ बोले—मेरे कार्यकाल में पति या परिजन सदस्य की जगह नहीं बैठते
मामले में जनपद पंचायत छुरा के सीईओ सतीश चंद्रवंशी ने स्पष्ट किया कि जिस दिन की तस्वीर सामने आई है, उस दिन वे अवकाश पर थे। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में जनपद सदस्यों के पति अथवा परिजन बैठकों या कार्यालयीन कार्यवाही में निर्वाचित सदस्य के स्थान पर उपस्थित नहीं रहते हैं।
सीईओ चंद्रवंशी के अनुसार जनपद पंचायत में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन कराया जाता है। जनपद सदस्य अपने पद से जुड़े दायित्वों का स्वयं निर्वहन करते हैं और कार्यालयीन कार्यवाही में नियमों के पालन को सुनिश्चित किया जाता है।
सीईओ के इस स्पष्टीकरण के बाद अब सवाल उस विशेष बैठक को लेकर और महत्वपूर्ण हो गया है, जिसकी तस्वीर सामने आई है। चूंकि सीईओ के मुताबिक संबंधित दिन वे अवकाश पर थे, इसलिए उस दिन बैठक की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी या संबंधित प्रक्रिया से जुड़े जिम्मेदार कर्मचारियों से स्थिति स्पष्ट होना भी जरूरी है।
उपस्थिति रजिस्टर और सीसीटीवी से सामने आ सकती है पूरी तस्वीर
मामले में संबंधित बैठक की उपस्थिति पंजी, कार्यवाही विवरण, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज तथा यदि किसी गैर-निर्वाचित व्यक्ति को बैठक में बैठने की अनुमति दी गई थी तो उससे संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जाए तो स्थिति पूरी तरह साफ हो सकती है।
इससे यह भी पता चल सकेगा कि तस्वीर में नजर आ रहे व्यक्ति किस उद्देश्य से बैठक में मौजूद थे और क्या उन्होंने किसी प्रकार की आधिकारिक कार्यवाही में हिस्सा लिया था।
महिला आरक्षण की भावना और नियमों के पालन पर बहस
महिला आरक्षण का उद्देश्य निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों को पंचायत की निर्णय प्रक्रिया में प्रत्यक्ष भागीदारी देना है। ऐसे में महिला जनपद सदस्य के साथ पति या परिजन की बैठक में मौजूदगी की तस्वीर सामने आने के बाद सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि इस पूरे मामले में तस्वीर के आधार पर किसी व्यक्ति को नियम उल्लंघन का दोषी ठहराने के बजाय बैठक के आधिकारिक रिकॉर्ड और लागू नियमों के आधार पर स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
फिलहाल छुरा में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ तस्वीरें सवाल खड़े कर रही हैं, वहीं जनपद पंचायत के सीईओ ने अपने कार्यकाल में नियमों के पालन और महिला जनप्रतिनिधियों द्वारा स्वयं अपने दायित्वों के निर्वहन की बात कही है। अब संबंधित बैठक का रिकॉर्ड ही यह स्पष्ट कर सकेगा कि उस दिन बैठक में कौन मौजूद था, किस हैसियत से मौजूद था और क्या उसे वहां बैठने की अनुमति थी।
