कलेक्टर तक पहुंची शिकायत, 3 दिन में जांच का आदेश… 17 दिन बाद भी जांच अधर में!,,,पोंड स्कूल के ₹2.50 लाख के कथित वित्तीय अनियमितता मामले में जांच पर सवाल; जांच टीम बदली, अब डीईओ बोले—दो-तीन दिन में आएगी रिपोर्ट

संवाददाता -अनीश सोलंकी
गरियाबंद :– शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पोंड में ₹2.50 लाख की कथित वित्तीय अनियमितता से जुड़े मामले में जांच की रफ्तार को लेकर सवाल उठने के बाद अब शिक्षा विभाग ने स्थिति स्पष्ट की है। शाला समिति अध्यक्ष द्वारा मामले की जांच के लिए गरियाबंद कलेक्टर को आवेदन सौंपे जाने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने 7 सितंबर 2026 को तीन सदस्यीय जांच दल गठित कर तीन दिवस के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
लेकिन निर्धारित समय-सीमा बीतने के बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी। 17 दिन बाद मामले में जांच टीम बदले जाने की प्रक्रिया सामने आई है। खास बात यह है कि जांच में देरी को लेकर जांच दल के अधिकारियों की ओर से अलग-अलग वजह बताई गई है।
बीईओ बोले—टीम में बदलाव के कारण नहीं हो सकी जांच
जांच अधिकारी एवं छुरा बीईओ के.एल. मतावले से फोन पर जांच में देरी का कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया कि जांच टीम में एक ही कार्यालय से दो सदस्यों को रखे जाने के कारण जांच नहीं हो सकी। उनके अनुसार टीम में बदलाव के लिए जिला कार्यालय को निवेदन किया गया था और अब नई जांच टीम गठित करने का आदेश जारी किया जा रहा है।
वहीं जांच प्रस्तुतकर्ता बनाए गए शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पाटशिवनी के प्राचार्य प्रेमलाल ध्रुव ने फोन पर बताया कि जांच सहयोगी लेखापाल भागवत राम साहू की तबीयत खराब होने के कारण जांच नहीं हो सकी।
दोनों अधिकारियों के बयान में देरी की वजह अलग-अलग सामने आने के बाद मामले में यह सवाल भी उठ रहा है कि जांच आखिर किस कारण से निर्धारित समय में शुरू नहीं हो सकी।
डीईओ राजेश चंद्राकर ने बताया—बीईओ के निवेदन पर बदली गई टीम
मामले में गरियाबंद जिला शिक्षा अधिकारी राजेश चंद्राकर ने विभाग का पक्ष स्पष्ट करते हुए बताया कि पोंड मामले में पहले से ही तीन सदस्यीय जांच दल गठित किया गया था। उनके अनुसार जांच अधिकारी के.एल. मतावले ने जिला कार्यालय को जांच टीम में शामिल लेखापाल को हटाकर उसके स्थान पर दूसरे कर्मचारी को रखने का निवेदन किया था।
डीईओ चंद्राकर के मुताबिक इसी निवेदन के बाद दूसरा जांच आदेश जारी कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि अब नई टीम द्वारा जांच की जाएगी और दो से तीन दिन में जांच रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
तीन दिन की समय-सीमा से अब दो-तीन दिन की नई उम्मीद
विभागीय स्पष्टीकरण के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि जांच में देरी का एक कारण जांच दल में बदलाव की प्रक्रिया रही। हालांकि, मूल आदेश में तीन दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई थी और अब 17 दिन बाद नई टीम से दो-तीन दिन में रिपोर्ट मिलने की बात कही जा रही है।
अब सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि नई जांच टीम वास्तव में मौके पर पहुंचकर कब जांच शुरू करती है और निर्धारित दो-तीन दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करती है या नहीं।
कलेक्टर को शिकायत से शुरू हुआ मामला
पोंड स्कूल में कथित वित्तीय अनियमितता की शिकायत शाला समिति अध्यक्ष द्वारा गरियाबंद कलेक्टर को दिए गए आवेदन के माध्यम से उठाई गई थी। इसके बाद डीईओ कार्यालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच दल गठित किया।
जांच अधिकारी के रूप में बीईओ के.एल. मतावले, प्रस्तुतकर्ता अधिकारी के रूप में प्राचार्य प्रेमलाल ध्रुव और जांच सहयोगी के रूप में लेखापाल भागवत राम साहू को जिम्मेदारी दी गई थी।
अब टीम में बदलाव के बाद विभाग ने दो-तीन दिन में रिपोर्ट मिलने की बात कही है।
₹2.50 लाख के हिसाब पर अब रिपोर्ट का इंतजार
मामला ₹2.50 लाख की कथित वित्तीय अनियमितता से जुड़ा है। इसलिए जांच में स्कूल के बिल-वाउचर, कैशबुक, भुगतान अभिलेख और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल आरोपों की वास्तविकता जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी। विभाग ने भी कहा है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब गेंद नई जांच टीम के पाले में
17 दिन की देरी के बाद जांच दल में बदलाव हो चुका है। जिला शिक्षा अधिकारी ने दो-तीन दिन में रिपोर्ट मिलने की बात कही है। ऐसे में अब पूरे मामले की नजर नई जांच टीम की कार्रवाई पर है।
क्या नई टीम मौके पर पहुंचकर दस्तावेजों की जांच करेगी? क्या तय समय में रिपोर्ट प्रस्तुत होगी? और ₹2.50 लाख की कथित वित्तीय अनियमितता के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं या नहीं?
इन सभी सवालों का जवाब अब जांच रिपोर्ट से ही सामने आएगा।
जांच में देरी पर सामने आए तीन पक्ष
बीईओ के.एल. मतावले:
जांच टीम में एक ही कार्यालय से दो सदस्यों को रखने के कारण जांच नहीं हो सकी; टीम में बदलाव के लिए जिला कार्यालय को निवेदन किया गया।
प्राचार्य प्रेमलाल ध्रुव:
जांच सहयोगी लेखापाल भागवत राम साहू की तबीयत खराब होने के कारण जांच नहीं हो सकी।
डीईओ राजेश चंद्राकर:
तीन सदस्यीय जांच दल पहले ही गठित था। जांच अधिकारी के निवेदन पर लेखापाल को बदलने के लिए दूसरा आदेश जारी किया गया है। दो से तीन दिन में जांच रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है और रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई होगी।
