‘मांगें पूरी नहीं हुईं तो इच्छा मृत्यु की अनुमति दें’ बरगद के नीचे जिंदगी काट रहे दिव्यांग की कलेक्टर से गुहार—आवास, रोजगार, इलाज और ट्राइसाइकिल की मांग; 3 दिन की मोहलत, समाधान नहीं हुआ तो आमरण अनशन की चेतावनी

संवाददाता – अनीश सोलंकी 

गरियाबंद। एक तरफ शासन-प्रशासन गरीबों और दिव्यांगों के लिए योजनाओं के माध्यम से आवास, रोजगार, उपचार और सहायता उपलब्ध कराने के दावे करता है, वहीं गरियाबंद में एक दिव्यांग व्यक्ति बरगद के पेड़ के नीचे खुले आसमान के नीचे जिंदगी गुजारने को मजबूर होने का दावा करते हुए प्रशासन के सामने अपनी पीड़ा लेकर पहुंचा है। वार्ड क्रमांक 15, काली मंदिर के पास बरगद के पेड़ के नीचे रहने वाले अनिल यादव, पिता स्व. शशि यादव ने कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी सहित जिले के अन्य अधिकारियों को आवेदन देकर चार प्रमुख मांगें रखी हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि आवेदन में उन्होंने मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में ‘इच्छा मृत्यु की अनुमति’ दिए जाने की मांग की है।

“तीन दिन में समाधान नहीं तो कलेक्ट्रेट में आमरण अनशन”

अनिल यादव ने आवेदन के माध्यम से प्रशासन को तीन दिवस का समय देते हुए कहा है कि यदि उनकी समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया तो वह कलेक्ट्रेट परिसर में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन (भूख हड़ताल) पर बैठने के लिए मजबूर होंगे। इसके साथ ही उन्होंने अपनी मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में इच्छा मृत्यु की अनुमति दिए जाने की बात आवेदन में कही है।

यह चेतावनी अब जिला प्रशासन के लिए गंभीर मानवीय और प्रशासनिक मामला बन गई है।

बरसात, धूप और ठंड के बीच बरगद बना आशियाना

आवेदन में अनिल यादव ने बताया है कि उनके पास रहने के लिए पक्का मकान नहीं है। वर्तमान में वह बरगद के पेड़ के नीचे रहकर जीवन गुजार रहे हैं। धूप, बारिश और ठंड के मौसम में खुले में रहने की परेशानी का उल्लेख करते हुए उन्होंने शासन की आवास योजना के तहत तत्काल पक्का मकान उपलब्ध कराने की मांग की है।

उनकी स्थिति का सबसे मार्मिक पहलू यह है कि जिस पेड़ को आमतौर पर लोग गर्मी में छांव के लिए इस्तेमाल करते हैं, वही उनके लिए फिलहाल घर की छत बना हुआ है।

वन विभाग में काम किया, बकाया मजदूरी और रोजगार की भी मांग

अनिल यादव ने बताया कि वह पूर्व में वन विभाग में दैनिक वेतनभोगी (डेली वेजेस) के रूप में काम कर चुके हैं। उन्होंने अपने पूर्व कार्य की बकाया मजदूरी का भुगतान कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने वन विभाग में अथवा किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर पुनः रोजगार उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है, ताकि वह अपनी आजीविका चला सकें।

इलाज और ट्राइसाइकिल की भी दरकार

दिव्यांगता एवं आर्थिक तंगी के चलते आवागमन और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का हवाला देते हुए अनिल यादव ने नि:शुल्क उपचार की समुचित व्यवस्था कराने तथा आवागमन के लिए ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने की मांग की है।

उनका कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे स्वयं इन जरूरतों की व्यवस्था कर सकें। इसलिए उन्होंने शासन-प्रशासन से तत्काल सहायता की मांग की है।

पहले भी लगा चुके हैं गुहार, अब कार्रवाई का इंतजार

आवेदन में अनिल यादव ने कहा है कि वह अपनी समस्याओं को लेकर पूर्व में भी संबंधित अधिकारियों के समक्ष गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी है। यही वजह है कि इस बार उन्होंने कलेक्टर, एसपी, एसडीएम और तहसीलदार सहित संबंधित अधिकारियों को आवेदन देकर अपनी स्थिति से अवगत कराया है।

अब सबकी नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर है। एक दिव्यांग व्यक्ति का बरगद के नीचे जीवन गुजारने का दावा और मांगें पूरी नहीं होने पर आमरण अनशन के साथ इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगने वाला आवेदन प्रशासन के सामने गंभीर सवाल खड़े करता है। जरूरत इस बात की है कि मामले की वास्तविक स्थिति की जांच कर संबंधित विभाग तत्काल कार्रवाई करें और पात्रता के अनुसार शासन की योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाएं।

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