45 दिन का इंतजार, फिर भी नहीं मिला सिलेंडर! OTP आया, रिकॉर्ड में डिलीवरी पूरी… अब एजेंसी पर भ्रष्टाचार का आरोप छुरा इंडेन गैस एजेंसी पर गंभीर सवाल: उपभोक्ता बोले– “मैंने सिलेंडर लिया ही नहीं, फिर किसे दे दिया?”

छुरा। छुरा ग्रामीण इंडेन गैस एजेंसी एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। आवासपारा निवासी अकबर अली ने एजेंसी पर गंभीर अनियमितता और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने अपने मोबाइल से घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग कराई थी।
बुकिंग के बाद उनके मोबाइल पर OTP भी प्राप्त हुआ, लेकिन जब वे गैस गोदाम पहुंचकर OTP दिखाकर सिलेंडर लेने पहुंचे तो उन्हें चौंकाने वाला जवाब मिला।
एजेंसी के कर्मचारियों ने कहा कि सिलेंडर पहले ही वितरित किया जा चुका है। इस पर उपभोक्ता ने विरोध जताते हुए कहा कि उन्होंने तो सिलेंडर लिया ही नहीं, फिर आखिर वह किसे दिया गया? इस सवाल का कर्मचारियों के पास कोई स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं था।
OTP आया, लेकिन सिलेंडर गायब… आखिर जिम्मेदार कौन?
उपभोक्ता का कहना है कि यदि OTP उनके मोबाइल पर आया था और उन्होंने किसी को OTP साझा भी नहीं किया, तो फिर एजेंसी के रिकॉर्ड में सिलेंडर की डिलीवरी कैसे दिखा दी गई? यह पूरी प्रक्रिया संदेह के घेरे में है और इससे एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
एजेंसी संचालक ने नहीं उठाया फोन
अकबर अली ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में एजेंसी संचालक से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनका फोन नहीं उठाया गया। इससे उपभोक्ता की परेशानी और बढ़ गई।
45 दिन तक दोबारा रिफिल नहीं, बारिश में बढ़ी मुश्किल
सबसे बड़ी समस्या यह है कि अब सिस्टम में सिलेंडर वितरित दिखने के कारण उपभोक्ता को अगली रिफिल के लिए 45 दिन का इंतजार करने को कहा जा रहा है। बारिश के मौसम में सूखी लकड़ियां भी आसानी से उपलब्ध नहीं होतीं, ऐसे में गरीब परिवार के सामने खाना बनाने का संकट खड़ा हो गया है।
उपभोक्ता फोरम जाने की तैयारी
अकबर अली ने कहा कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे इस पूरे मामले की शिकायत उपभोक्ता फोरम सहित संबंधित अधिकारियों से करेंगे। उनका आरोप है कि बिना वास्तविक वितरण के सिलेंडर की डिलीवरी दर्ज होना गंभीर अनियमितता है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
जांच की मांग, कई सवालों के जवाब बाकी
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यदि OTP उपभोक्ता के पास था, तो बिना उसकी अनुमति के सिलेंडर किसे दिया गया? क्या एजेंसी में वितरण प्रक्रिया में लापरवाही हुई है या किसी स्तर पर गड़बड़ी? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
फिलहाल, इस मामले में एजेंसी प्रबंधन का पक्ष सामने नहीं आया है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
