बारिश ने खोली सड़क मरम्मत की सच्चाई! 10 महीने में बिखरी डामर की परत, गड्ढों में बदल गई सड़कें, हर दिन खतरे में हजारों लोगों की जान,छुरा की प्रमुख सड़कों पर जगह-जगह जानलेवा गड्ढे, बारिश के साथ बढ़ रहा हादसों का खतरा; जनता बोली—हर साल मरम्मत, फिर भी वही बदहाल हालात

गरियाबंद :-मानसून की बारिश ने छुरा क्षेत्र की सड़कों की बदहाली को पूरी तरह उजागर कर दिया है। पिछले वर्ष जिन सड़कों की मरम्मत और डामरीकरण पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे, वे अब पहली ही बारिश के सामने टिक नहीं पाईं। सड़कों की डामर परत उखड़ चुकी है और जगह-जगह बने गहरे गड्ढे अब लोगों की जान के लिए खतरा बन गए हैं। हालात ऐसे हैं कि वाहन चालक सफर कम और गड्ढों से बचने की जद्दोजहद ज्यादा करते नजर आ रहे हैं।
छुरा शराब दुकान मार्ग, मडेली रोड तथा छुरा-टेंगनाबासा-रसेला मुख्य मार्ग सबसे अधिक प्रभावित हैं। इन मार्गों पर कई स्थानों पर सड़क पूरी तरह टूट चुकी है। बारिश का पानी गड्ढों में भर जाने से उनकी गहराई दिखाई नहीं देती, जिससे दुपहिया वाहन चालक अचानक संतुलन खोकर गिर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रोजाना छोटे-बड़े हादसे हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक कोई ठोस कदम उठाता नजर नहीं आ रहा।
विडंबना यह है कि लोक निर्माण विभाग ने पिछले वर्ष इन सड़कों की मरम्मत कर इसे बेहतर और सुरक्षित बनाने का दावा किया था। लेकिन मरम्मत के महज 10 महीने बाद ही सड़कों का इस तरह उखड़ जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। आखिर ऐसी कौन-सी मरम्मत हुई, जो एक बारिश भी नहीं झेल सकी? यदि निर्माण कार्य गुणवत्ता के अनुरूप हुआ था तो सड़कें इतनी जल्दी क्यों टूट गईं? इन सवालों का जवाब अब जनता मांग रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर साल सड़क मरम्मत के नाम पर सरकारी धन खर्च किया जाता है, लेकिन बारिश आते ही सड़कें फिर उसी बदहाल स्थिति में पहुंच जाती हैं। इससे न केवल लोगों की परेशानी बढ़ती है, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। लोगों ने सड़क मरम्मत कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते गड्ढों की मरम्मत नहीं कराई गई, तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। स्कूल जाने वाले बच्चे, किसान, मजदूर और रोजाना आवागमन करने वाले सैकड़ों लोग इन सड़कों से गुजरते हैं। ऐसे में प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी बनती है कि तत्काल मरम्मत कर लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

जनता के निशाने पर विभाग, उठ रहे हैं ये सवाल…

क्या सड़क मरम्मत केवल कागजों तक सीमित थी?
10 महीने में ही सड़क की परत क्यों उखड़ गई?
निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच किस अधिकारी ने की?
अगर सड़क ठीक थी तो पहली ही बारिश में गड्ढे कैसे बन गए?
हादसा होने का इंतजार क्यों कर रहा है विभाग?

अब निगाहें प्रशासन और लोक निर्माण विभाग पर टिकी हैं। सवाल केवल टूटी सड़क का नहीं, बल्कि उन हजारों लोगों की सुरक्षा का है, जो रोज इन्हीं रास्तों से गुजरते हैं। यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो ये गड्ढे किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।

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