वन पट्टाधारी किसानों की खेती एग्रीस्टैक से गायब! पी-2 एवं फसल विवरण में फसल दर्ज नहीं होने से किसानों की बढ़ी मुश्किलें, कलेक्टर के जनदर्शन में पहुंचकर लगाई गुहार

रिपोर्टर – अनीश सोलंकी 

छुरा। शासन द्वारा किसानों को खेती-किसानी के लिए विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाने और कृषि व्यवस्था को ऑनलाइन करने के लिए एग्रीस्टैक जैसी डिजिटल व्यवस्था लागू की गई है, लेकिन वन पट्टाधारी किसानों के लिए यही व्यवस्था अब परेशानी का कारण बनती नजर आ रही है। छुरा विकासखंड के ग्राम गोंदलाबाहरा, पोस्ट अकलवारा के वन पट्टाधारी किसानों ने मंगलवार को जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर के जनदर्शन कार्यक्रम में अपनी समस्या रखी और फसल की ऑनलाइन प्रविष्टि तत्काल दुरुस्त कराने की मांग की।
किसानों द्वारा सौंपे गए आवेदन में बताया गया है कि वे वर्षों से वन पट्टा प्राप्त भूमि पर खेती-किसानी कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। वन भूमि का पट्टा मिलने के बाद वे नियमित रूप से कृषि कार्य करते आ रहे हैं। पूर्व में उन्हें सोसायटियों के माध्यम से खाद-बीज सहित कृषि कार्य के लिए आवश्यक सुविधाओं और राशि का लाभ मिलता रहा है, लेकिन अब वर्ष 2026-27 के पी-2 एवं फसल विवरण में उनकी फसल दिखाई नहीं दे रही है।

फसल खेत में, लेकिन रिकॉर्ड में गायब!

किसानों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि खेतों में फसल खड़ी है, किसान दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, लेकिन सरकारी ऑनलाइन रिकॉर्ड में उनकी फसल का विवरण दर्ज नहीं दिखाई दे रहा है। किसानों का कहना है कि एग्रीस्टैक में फसल की जानकारी नहीं होने के कारण उन्हें कृषि से जुड़े जरूरी लाभ प्राप्त करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों के मुताबिक फसल प्रविष्टि नहीं होने से खाद-बीज प्राप्त करने, कृषि कार्य के लिए ऋण लेने और आगामी समय में अपनी उपज की बिक्री करने को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। यदि समय रहते रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं किया गया तो इसका सीधा असर उनकी खेती और परिवार की आजीविका पर पड़ सकता है।

पटवारी और संबंधित विभाग के चक्कर काट रहे किसान

किसानों ने बताया कि अपनी समस्या के समाधान के लिए वे संबंधित पटवारी एवं विभागीय अधिकारियों से संपर्क कर चुके हैं। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने के कारण उन्हें जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर के जनदर्शन में आवेदन देना पड़ा।
किसानों का कहना है कि वन पट्टा मिलने के बाद वे उसी भूमि पर लगातार कृषि कार्य कर रहे हैं। ऐसे में उनकी वास्तविक खेती का विवरण सरकारी रिकॉर्ड और एग्रीस्टैक में दर्ज होना बेहद जरूरी है। यदि ऑनलाइन रिकॉर्ड में फसल दर्ज नहीं होगी तो भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी परेशानी उत्पन्न हो सकती है।

धान की बिक्री को लेकर भी बढ़ी चिंता

वन पट्टाधारी किसानों की चिंता केवल खाद-बीज तक सीमित नहीं है। किसानों को आशंका है कि यदि समय रहते पी-2 एवं फसल विवरण में आवश्यक सुधार नहीं किया गया तो आने वाले समय में धान पंजीयन और उपज बिक्री के दौरान भी उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। किसानों का कहना है कि खेती के पूरे सीजन मेहनत करने के बाद यदि तकनीकी अथवा रिकॉर्ड संबंधी खामी के कारण उपज बेचने में दिक्कत आती है तो इसका सीधा नुकसान उन्हें उठाना पड़ेगा।

कलेक्टर से तत्काल जांच और सुधार की मांग

किसानों ने कलेक्टर को सौंपे आवेदन में मांग की है कि मामले की गंभीरता से जांच कर संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जाए तथा वन पट्टाधारी किसानों की भूमि और फसल का वास्तविक सत्यापन कराकर पी-2, फसल विवरण एवं एग्रीस्टैक में फसल की प्रविष्टि तत्काल कराई जाए।
किसानों ने कहा कि वे किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि जिस भूमि पर वे वर्षों से खेती कर रहे हैं, उस पर बोई गई फसल का सही विवरण सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराने की मांग कर रहे हैं, ताकि उन्हें शासन की कृषि योजनाओं, खाद-बीज, ऋण और उपज बिक्री जैसी सुविधाओं का लाभ मिल सके।

19 किसानों के नाम आवेदन में शामिल

कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन में ग्राम गोंदलबाहरा के कई वन पट्टाधारी किसानों के नाम और उनके भूमि संबंधी विवरण भी दर्ज किए गए हैं। किसानों ने सामूहिक रूप से प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। आवेदन सौंपते समय बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे और उन्होंने अपनी समस्या के शीघ्र निराकरण की मांग की।
अब देखना होगा कि खेतों में लहलहाती किसानों की फसल सरकारी रिकॉर्ड में कब तक दिखाई देती है और एग्रीस्टैक की तकनीकी/रिकॉर्ड संबंधी समस्या का समाधान कब तक होता है। किसानों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग को तत्काल कार्रवाई के निर्देश देगा।

मुख्य खबरें