ओ पी चौधरी के बजट पर छिड़ी सियासी जंग: भाजपा ने बताया ‘विकास का विजन’, कांग्रेस ने कहा– ‘जनता के साथ छल’

छुरा :- छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश होते ही राजनीतिक पारा चढ़ गया है। वित्त मंत्री ओ पी चौधरी द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत बजट को लेकर क्षेत्र में तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इसे “विकास, सुशासन और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव” बताया, वहीं कांग्रेस ने बजट को “दिशाहीन, जनविरोधी और पूरी तरह फेल” करार देते हुए सरकार पर आंकड़ों की बाजीगरी का आरोप लगाया है।
छुरा क्षेत्र में भी पक्ष-विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है और दोनों दलों के नेता आमने-सामने आ गए हैं।

भाजपा: “यह बजट बदलेगा प्रदेश की तस्वीर”

भाजपा मंडल अध्यक्ष खोमन चंद्राकर ने बजट को दूरदर्शी और संतुलित बताते हुए कहा कि सरकार ने हर वर्ग का ध्यान रखा है। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए योजनाओं का विस्तार, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, महिलाओं के लिए सशक्तिकरण की योजनाएं और अधोसंरचना विकास के लिए बड़े प्रावधान इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार विकास को लेकर गंभीर है।
उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस सकारात्मक सोच के बजाय केवल आलोचना की राजनीति कर रही है।

भाजपा नेता व जनपद अध्यक्ष मीरा ठाकुर ने कहा कि यह बजट गांव-गरीब-किसान के सपनों को साकार करने वाला है। शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क निर्माण जैसे मूलभूत क्षेत्रों में भारी निवेश से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह बजट प्रदेश को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने वाला है।

भाजपा नेता रिंकू सचदेव ने कहा कि बजट में युवाओं के लिए कौशल विकास और स्वरोजगार योजनाओं को प्राथमिकता दी गई है। इससे बेरोजगारी दर में कमी आएगी और प्रदेश की आर्थिक रफ्तार तेज होगी।

भाजपा नेता भोलेशंकर जायसवाल ने कहा कि सरकार ने संतुलित वित्तीय प्रबंधन के साथ विकास कार्यों के लिए पर्याप्त राशि का प्रावधान किया है। उन्होंने इसे “नए छत्तीसगढ़ का ब्लूप्रिंट” बताया।

भाजपा पार्षद चित्ररेखा ध्रुव ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, स्वावलंबन और शहरी विकास से जुड़ी योजनाएं इस बजट की बड़ी उपलब्धि हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने सामाजिक समावेशन को प्राथमिकता दी है।

कांग्रेस: “बजट में नहीं दिखी जमीनी सच्चाई”

वहीं कांग्रेस नेताओं ने बजट को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे आम जनता की उम्मीदों पर खरा न उतरने वाला बताया है।

ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष माहेश्वरी शाह ने कहा कि बजट में महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की कर्ज समस्या के समाधान का ठोस रोडमैप नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल बड़े-बड़े आंकड़े पेश कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर राहत का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष रमेश शर्मा ने कहा कि बजट में युवाओं के लिए रोजगार के नाम पर केवल घोषणाएं हैं, ठोस योजना का अभाव है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने आम आदमी को राहत देने के बजाय प्रचार को प्राथमिकता दी है।

ब्लाक कोषाध्यक्ष सलीम मेमन ने कहा कि व्यापारियों, छोटे उद्यमियों और मध्यम वर्ग के लिए बजट में कोई बड़ी राहत नहीं दी गई। उन्होंने इसे “झुनझुना बजट” बताते हुए कहा कि जनता को वास्तविक लाभ नहीं मिलेगा।

जिला महामंत्री अवधेश प्रधान ने कहा कि किसानों और मजदूरों के हितों की अनदेखी की गई है। उन्होंने कहा कि बजट में सामाजिक सुरक्षा और रोजगार गारंटी पर पर्याप्त फोकस नहीं दिखता।

कांग्रेस नेता हरीश यादव ने कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए ठोस रणनीति की जरूरत थी, लेकिन बजट में केवल घोषणाएं नजर आ रही हैं। उन्होंने कहा कि यह बजट उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता।

जनता की निगाहें अब अमल पर
बजट को लेकर छुरा सहित पूरे क्षेत्र में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भाजपा जहां इसे विकास और सुशासन का दस्तावेज बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे जनविरोधी और निराशाजनक करार दे रही है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बजट में की गई घोषणाएं कितनी तेजी से धरातल पर उतरती हैं और आम जनता को इसका कितना वास्तविक लाभ मिल पाता है।
प्रदेश की राजनीति में बजट को लेकर यह सियासी घमासान आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रहा है।

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