सलाखों के उस पार भाई, इस पार बहन… राखी बांधते ही छलक पड़ा दर्द, गरियाबंद सेंट्रल जेल में भावुक हुआ रक्षाबंधन,भाई की कलाई पर राखी बांधते ही नम हुई बहनों की आंखें, किसी ने आंसुओं से तो किसी ने मुस्कान के पीछे छिपाया अपना दर्द

संवाददाता – अनीश सोलंकी 
गरियाबंद। रक्षाबंधन का पर्व वैसे तो भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और अपनत्व का त्योहार है, लेकिन गरियाबंद सेंट्रल जेल में इस बार यही पर्व खुशियों के साथ दर्द और भावनाओं का ऐसा संगम लेकर आया, जिसे देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। जेल की ऊंची दीवारों और लोहे की सलाखों के बीच जब बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने पहुंचीं तो कुछ पल के लिए मानो दुनिया की सारी दूरियां सिमट गईं। बहनों के हाथों में राखी थी, आंखों में भाई के लिए प्यार था और दिल में उसके बेहतर भविष्य की दुआ।

रक्षाबंधन के अवसर पर अपने भाइयों को राखी बांधने के लिए बड़ी संख्या में बहनें गरियाबंद सेंट्रल जेल पहुंचीं। जेल परिसर में पहुंचते ही बहनों के चेहरों पर अपने भाई से मिलने की खुशी साफ दिखाई दे रही थी, लेकिन जैसे ही मुलाकात का पल आया, भावनाएं आंखों से छलक पड़ीं। भाई की कलाई पर राखी बांधते समय कई बहनों की आंखें भर आईं। वहीं भाइयों के चेहरों पर भी भावुकता साफ नजर आई।

सलाखें रोक नहीं पाईं रिश्तों की डोर

जेल की चारदीवारी ने भले ही भाइयों को उनकी बहनों से दूर कर रखा हो, लेकिन भाई-बहन के रिश्ते में बंधी प्रेम और विश्वास की डोर को कोई सलाख नहीं रोक सकी। बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके जीवन में सुख, शांति और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। राखी बांधने के बाद भाइयों ने भी अपनी बहनों को भरोसा दिलाया कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, भाई-बहन का रिश्ता हमेशा कायम रहेगा।

मुलाकात के दौरान कई ऐसे भावुक पल भी सामने आए, जब बहनें अपने भाई को देखकर खुद को रोक नहीं पाईं। किसी की आंखों से आंसू छलक पड़े तो किसी ने मुस्कुराते हुए अपने दर्द को छिपाने की कोशिश की। राखी की डोर में इस दिन सिर्फ धागा नहीं था, बल्कि उसमें बहन की दुआ, भाई के लिए चिंता और वर्षों से कायम रिश्ते की भावनाएं बंधी थीं।

भाई की कलाई पर राखी, आंखों में आंसू और दिल में दुआ

रक्षाबंधन के इस खास मौके पर जेल पहुंचे परिजनों के लिए यह मुलाकात बेहद भावुक रही। बहनों ने अपने भाइयों के लिए राखी, स्नेह और आशीर्वाद लेकर जेल का दरवाजा पार किया। भाई की कलाई पर राखी बांधने के बाद कई बहनों ने उसकी सलामती और जल्द ही अच्छे दिनों की वापसी की प्रार्थना की।

वहीं भाइयों के लिए भी यह पल किसी भावुक याद से कम नहीं था। जिस कलाई पर बहन हर साल घर के आंगन में राखी बांधती थी, उसी कलाई पर इस बार जेल परिसर में राखी बंधी। जगह बदली थी, परिस्थितियां बदली थीं, लेकिन रिश्ते की गर्माहट और बहन के हाथों की राखी में छिपा प्यार वही था।

जेल प्रशासन ने किए सुरक्षा के कड़े इंतजाम

रक्षाबंधन पर्व को देखते हुए गरियाबंद सेंट्रल जेल प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए गए। जेल परिसर में आने वाले परिजनों की जांच और निर्धारित प्रक्रिया के बाद मुलाकात की व्यवस्था की गई। सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी में बहनों को अपने भाइयों से मिलने और उनकी कलाई पर राखी बांधने का अवसर दिया गया।

त्योहार के दौरान जेल परिसर में सुरक्षा के साथ-साथ मुलाकात की व्यवस्था को भी व्यवस्थित रखा गया, ताकि रक्षाबंधन के इस पावन अवसर पर बहनें अपने भाइयों से मिलकर राखी बांध सकें।

चारदीवारी के बीच मनाया गया रिश्तों का सबसे खूबसूरत त्योहार

गरियाबंद सेंट्रल जेल में रक्षाबंधन का यह दृश्य यह संदेश दे गया कि रिश्तों को दीवारें कैद नहीं कर सकतीं और सच्चे प्रेम को सलाखें रोक नहीं सकतीं। भाई की कलाई पर बंधी राखी के साथ बहन की आंखों से निकला आंसू और दिल से निकली दुआ इस पूरे माहौल को बेहद मार्मिक बना रही थी।

रक्षाबंधन के इस अवसर पर जेल परिसर में जहां एक ओर सुरक्षा और नियमों की सख्ती थी, वहीं दूसरी ओर भाई-बहन के प्रेम की ऐसी भावनात्मक तस्वीर दिखाई दी, जिसने हर किसी के दिल को छू लिया। किसी बहन के हाथ में राखी थी, किसी की आंखों में आंसू थे और हर बहन के दिल में बस एक ही दुआ थी—भाई हमेशा खुश रहे, सुरक्षित रहे और जीवन में फिर से अच्छे दिनों की वापसी हो।

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