किसके संरक्षण में डाला जा रहा है गरीबों के राशन पर डाका? एक के बाद एक खुल रहे घोटाले, फिर भी कार्रवाई नहीं… क्या फाइलों में दफन हो जाएगा यह मामला?

छुरा। छुरा विकासखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की व्यवस्था पर लगातार गंभीर सवाल उठ रहे हैं। एक के बाद एक राशन दुकानों से सामने आ रहे कथित गड़बड़ियों के मामलों ने गरीब और आदिवासी परिवारों के हक पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। मडेली, जरगांव और खड़मा के बाद अब कोठीगांव और कनसिंघी की राशन दुकानें भी विवादों के घेरे में हैं।

सवाल यह है कि आखिर गरीबों के हिस्से का राशन किसके संरक्षण में गायब हो रहा है?

और क्या इस बार दोषियों पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी पहले की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?

कोठीगांव की राशन दुकान में उस समय हड़कंप मच गया जब बड़ी संख्या में महिला हितग्राहियों ने मीडिया के सामने खुलकर आरोप लगाया कि जून माह का चावल उन्हें दिया ही नहीं गया, जबकि राशन कार्ड में दो माह के राशन की एंट्री दर्ज कर दी गई।

महिलाओं का कहना है कि जून में केवल चना और शक्कर देकर यह कहकर लौटा दिया गया कि “चावल का आबंटन नहीं आया है, आने पर दे दिया जाएगा।”

लेकिन जुलाई में भी जब केवल एक माह का चावल, शक्कर, चना और नमक दिया गया और जून का चावल नहीं मिला, तब महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा। राशन दुकान में ही जमकर हंगामा हुआ और महिलाओं ने खुलेआम सेल्समैन पर गरीबों का राशन हड़पने का आरोप लगाया।

मामला तब और गंभीर हो गया जब मीडिया ने राशन दुकान के सेल्समैन रामसिंह मरकाम से सवाल किया। पहले उन्होंने दावा किया कि जून माह का पूरा राशन सभी हितग्राहियों को वितरित कर दिया गया था।

लेकिन जैसे ही महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि उन्हें जून का चावल नहीं मिला और सेल्समैन झूठ बोल रहे हैं, तब आखिरकार सेल्समैन ने स्वीकार किया कि जून माह का चावल नहीं

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