प्यास ने छीनी जान, कुत्तों ने नोच डाला हिरण! छुरा जंगल बना मौत का मैदान, वन विभाग बेखबर या बेपरवाह?” करोड़ों की जल योजनाएं फाइलों में कैद, जमीन पर सूखे तालाब—लापरवाही या बड़ा खेल? लगातार मर रहे वन्यप्राणी, जिम्मेदार कौन?

रिपोर्टर :- अनीश सोलंकी
छुरा:- गरियाबंद जिले के छुरा वनपरिक्षेत्र में वन्यजीवों की दर्दनाक मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला पटपरपाली गांव से लगे जंगल का है, जहां पानी की तलाश में भटकते एक हिरण को कुत्तों के झुंड ने बेरहमी से नोच-नोचकर मार डाला। यह घटना केवल एक वन्यप्राणी की मौत नहीं, बल्कि वन विभाग की जमीनी नाकामी और लापरवाही की पोल खोलती है।
मंगलवार को प्यास से बेहाल हिरण जंगल से निकलकर गांव की ओर पहुंचा, लेकिन उसे पानी नहीं, मौत मिली। कुत्तों के झुंड ने उसे चारों तरफ से घेर लिया और तब तक हमला करते रहे जब तक उसकी जान नहीं चली गई। यह पूरी घटना इस बात का सबूत है कि जंगलों में बुनियादी संसाधनों की भारी कमी है।
चेतावनी के बाद भी नहीं जागा विभाग
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पहली घटना नहीं है। महज एक सप्ताह पहले खरखरा गांव के पास भी कुत्तों के झुंड ने एक हिरण को दौड़ा लिया था। उस समय लोगों की तत्परता से उसकी जान बच गई थी। यह घटना वन विभाग के लिए साफ चेतावनी थी, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
सवाल यह उठता है कि
क्या विभाग जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है?
“करोड़ों खर्च” का दावा, लेकिन जमीनी सच्चाई शून्य
वन विभाग हर साल गर्मी से पहले वन्यप्राणियों के लिए जल प्रबंधन के बड़े-बड़े दावे करता है। फाइलों में तालाब, टंकियां और जलस्रोतों की लंबी सूची दिखाई जाती है
लेकिन हकीकत यह है—
जंगलों के तालाब सूखे पड़े हैं
पानी की टंकियां या तो खाली हैं या अस्तित्व में ही नहीं
कहीं कोई नियमित मॉनिटरिंग नहीं
ऐसे में बड़ा सवाल—
क्या पानी के नाम पर सिर्फ कागजी खेल खेला जा रहा है?
लापरवाही या भ्रष्टाचार? उठ रहे गंभीर सवाल
लगातार हो रही घटनाओं ने अब पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है।
वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि—
अगर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं, तो पानी क्यों नहीं?
क्या अधिकारियों द्वारा जमीनी निरीक्षण नहीं किया जाता?
क्या जल व्यवस्था के नाम पर बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हो रहा है?
लोगों की मांग है कि
पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।
वन्यजीव प्रेमियों में आक्रोश, प्रशासन पर दबाव
घटना के बाद वन्यजीव प्रेमियों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में और भी वन्यप्राणी इसी तरह तड़प-तड़प कर मरेंगे।
कटघरे में वन विभाग
चेतावनी के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं
जल प्रबंधन के दावे फेल
लगातार हो रही वन्यप्राणियों की मौत
जमीनी स्तर पर निगरानी नदारद
ऐसे में साफ है कि
वन विभाग की कार्यप्रणाली पूरी तरह कटघरे में है।
बड़ा सवाल (जनता पूछ रही है):
जब कागजों में पानी बह रहा है, तो जंगल में जानवर प्यास से क्यों मर रहे हैं?
क्या जिम्मेदारों पर गिरेगी गाज, या यूं ही दम तोड़ते रहेंगे बेजुबान?
