फाइलों में दबा 20 साल पुराना ‘शिक्षाकर्मी भर्ती कांड’ फिर गरमाया, 111 नामों ने बढ़ाई हलचल—अब नए कलेक्टर के दरवाजे पर टिकी निगाहें,संदिग्ध दस्तावेजों की लंबी सूची ने खोले पुराने राज! अंकसूची से लेकर बीएड-डीएड और अनुभव प्रमाण-पत्र तक सवालों के घेरे में, पीड़ित पक्ष ने दी आंदोलन की चेतावनी

रिपोर्टर :- अनीश सोलंकी 
गरियाबंद। वर्ष 2005 से 2007 के बीच मैनपुर जनपद पंचायत में हुई शिक्षाकर्मी भर्ती का करीब दो दशक पुराना मामला एक बार फिर गरमाता नजर आ रहा है। 111 नामों वाली सामने आई सूची ने इस पूरे प्रकरण को फिर सुर्खियों में ला दिया है। सूची में कई अभ्यर्थियों के दस्तावेजों को लेकर गंभीर आपत्तियां और सत्यापन की जरूरत का उल्लेख होने की बात सामने आ रही है। अब इस पूरे मामले की निगाहें गरियाबंद जिले के नवनियुक्त कलेक्टर रणबीर शर्मा पर टिक गई हैं।

सवाल सिर्फ 111 नामों का नहीं, बल्कि उन फाइलों का है जो वर्षों से जांच, रिपोर्ट और दस्तावेजों के फेर में उलझी हुई हैं। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि यदि पुराने मामले में दस्तावेजों की सत्यता के आधार पर कुछ लोगों पर कार्रवाई हो सकती है, तो जांच में संदिग्ध पाए गए अन्य मामलों में भी समान मापदंड क्यों नहीं अपनाया गया?

111 नामों की सूची ने फिर मचाई खलबली

मामले में सामने आई सूची में 111 नामों के सामने अलग-अलग दस्तावेजों को लेकर आपत्तियों का उल्लेख बताया जा रहा है। इनमें अंकसूची, अनुभव प्रमाण-पत्र, बीएड-डीएड प्रमाण-पत्र, खेलकूद प्रमाण-पत्र, विकलांगता प्रमाण-पत्र सहित अन्य दस्तावेज शामिल हैं।

कहीं अंकसूची संदिग्ध बताई गई है, कहीं अनुभव प्रमाण-पत्र की जांच की जरूरत बताई गई है तो कहीं दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने या निर्धारित पात्रता को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
हालांकि, किसी सूची में नाम दर्ज होना अपने आप में किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करता। वास्तविक स्थिति मूल दस्तावेजों के सत्यापन और विधिवत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।

दो दशक से सवाल कायम—आखिर फाइल आगे क्यों नहीं बढ़ी?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि वर्षों से जांच और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया चलने के बावजूद मामला निर्णायक मुकाम तक क्यों नहीं पहुंच पाया?

बताया जाता है कि पूर्व में भी शिक्षाकर्मी भर्ती में दस्तावेजों को लेकर जांच हुई थी और कई मामलों में कार्रवाई की गई थी। जुलाई 2026 में भी संबंधित शिक्षकों की अद्यतन सूची मांगे जाने की बात सामने आई थी।

लेकिन अब भी शिकायतकर्ता पक्ष का सवाल कायम है—जांच

रिपोर्टों और दस्तावेजों के बाद अगला कदम आखिर कब उठेगा?
नए कलेक्टर के सामने पुरानी फाइल, फैसले का इंतजार
छत्तीसगढ़ शासन के प्रशासनिक फेरबदल के बाद रणबीर शर्मा को गरियाबंद जिले का नया कलेक्टर बनाया गया है। उन्होंने 21 अगस्त को पदभार ग्रहण किया है।

ऐसे में मैनपुर की यह पुरानी फाइल नए प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती के रूप में देखी जा रही है। अब देखना यह होगा कि कलेक्टर इस मामले की फाइल मंगाकर केवल समीक्षा करते हैं या फिर 111 नामों में दर्ज आपत्तियों का मूल दस्तावेजों के आधार पर दोबारा निष्पक्ष सत्यापन कराने की दिशा में ठोस पहल करते हैं।

दूसरे जिलों में कार्रवाई, फिर गरियाबंद में इंतजार क्यों?

फर्जी शिक्षाकर्मी भर्ती से जुड़े मामलों में प्रदेश के अन्य जिलों में कार्रवाई के उदाहरण सामने आते रहे हैं। धमतरी जिले में वर्ष 2007 की शिक्षाकर्मी भर्ती से जुड़े मामले में जनवरी 2026 में आठ प्रधान पाठकों को बर्खास्त किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।

वहीं गरियाबंद के मैनपुर क्षेत्र में एक अलग फर्जी प्रमाण-पत्र मामले में 11 शिक्षाकर्मियों को न्यायालय से तीन-तीन वर्ष की सजा और जुर्माने का फैसला भी हो चुका है।

इन घटनाओं के बीच वर्ष 2005-07 की भर्ती का यह मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है।

‘समान दस्तावेज, समान जांच और समान कार्रवाई’ की उठी मांग
मामले में कार्रवाई की मांग कर रहे पक्ष का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी के दस्तावेजों को फर्जी या अपात्र मानकर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है, तो जांच में सवालों के घेरे में आए अन्य दस्तावेजों का भी उसी कसौटी पर परीक्षण होना चाहिए।

संबंधित पक्ष द्वारा जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग किए जाने की बात सामने आई है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाया जाएगा।

उनका सवाल सीधा है—जब एक मामले में दस्तावेजों की सत्यता जांचकर कार्रवाई हो सकती है, तो अन्य संदिग्ध दस्तावेजों की जांच पूरी कर जिम्मेदारी तय करने में वर्षों क्यों लग रहे हैं?

अब चार बड़े सवालों पर टिकी नजर

मैनपुर की इस पुरानी भर्ती फाइल को लेकर अब चार सवाल सबसे अहम हो गए हैं—

क्या 111 नामों में शामिल प्रत्येक व्यक्ति के मूल दस्तावेजों का निष्पक्ष सत्यापन होगा?

क्या जांच में दस्तावेज फर्जी या पात्रता के विपरीत पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई होगी?

क्या तत्कालीन भर्ती प्रक्रिया में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होगी?

और सबसे बड़ा सवाल—क्या इस बार करीब दो दशक पुरानी फाइल सच में आगे बढ़ेगी या फिर एक बार फिर जांच, रिपोर्ट और पत्राचार के बीच दबकर रह जाएगी?

अब फैसला नई प्रशासनिक पारी के हाथ में

मैनपुर का यह मामला केवल 111 नामों की सूची तक सीमित नहीं है। यह सवाल उस भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता, दस्तावेजों की सत्यता और वर्षों से लंबित प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ा है।
अब जिले में नया प्रशासनिक नेतृत्व आ चुका है। ऐसे में लोगों की निगाहें कलेक्टर रणबीर शर्मा की ओर हैं। यदि प्रशासन मूल दस्तावेजों का निष्पक्ष सत्यापन कराकर दोषी पाए जाने वालों की जिम्मेदारी तय करता है, तो करीब दो दशक पुराने इस मामले को निर्णायक दिशा मिल सकती है।

फिलहाल सवालों की फाइल खुल चुकी है, 111 नाम फिर चर्चा में हैं और अब सबकी नजर इस बात पर है कि नए कलेक्टर के कार्यकाल में यह मामला कार्रवाई की चौखट तक पहुंचता है या फिर एक बार फिर सरकारी फाइलों के ढेर में दबकर रह जाता है।

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चरौदा को स्वास्थ्य केंद्र की सौगात, विधायक रोहित साहू ने किया लोकार्पण; विकास कार्यों के लिए घोषणाओं की झड़ी ### अब गांव में ही मिलेगी प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा, पंचायत भवन से लेकर सीसी रोड और स्कूल के अतिरिक्त कमरों तक निर्माण की घोषणा **छुरा :-** ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में ग्राम पंचायत चरौदा को बड़ी सौगात मिली है। विकासखंड छुरा के ग्राम चरौदा में नवनिर्मित उप स्वास्थ्य केंद्र का लोकार्पण हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस स्वास्थ्य केंद्र के शुरू होने से चरौदा सहित आसपास के ग्रामीणों को प्राथमिक उपचार और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूर-दराज के अस्पतालों पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है। लोकार्पण समारोह में राजिम विधानसभा क्षेत्र के विधायक रोहित साहू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि जनपद पंचायत छुरा की अध्यक्ष मीरा ठाकुर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। जिला पंचायत गरियाबंद के कृषि सभापति लेखराज ध्रुवा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, स्थानीय पदाधिकारियों और ग्रामीणों की मौजूदगी के बीच नवनिर्मित स्वास्थ्य केंद्र का लोकार्पण किया गया। ग्रामीणों ने क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध होने पर प्रसन्नता जताई। अब सामान्य बीमारियों, प्राथमिक उपचार तथा स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक सेवाओं के लिए ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर सुविधा मिलने का रास्ता खुला है। विशेषकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को इससे राहत मिलने की उम्मीद है। ## स्वास्थ्य सेवाओं को गांव तक पहुंचाना प्राथमिकता : रोहित साहू लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए विधायक रोहित साहू ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार और स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। गांव के लोगों को छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए दूर न जाना पड़े, इसके लिए स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं का मजबूत होना जरूरी है। चरौदा में उप स्वास्थ्य केंद्र की शुरुआत इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार आवश्यक है। विधायक ने कहा कि क्षेत्र की आवश्यकताओं और ग्रामीणों की मांगों के अनुरूप विकास कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। इस दौरान उन्होंने चरौदा के विकास से जुड़ी विभिन्न मांगों पर कई घोषणाएं भी कीं। पंचायत भवन से स्कूल तक, कई निर्माण कार्यों की घोषणा कार्यक्रम के दौरान विधायक रोहित साहू ने ग्रामीणों की मांग पर ग्राम चरौदा में नवीन पंचायत भवन निर्माण की घोषणा की। इसके साथ ही कमारपारा चरौदा में सीसी रोड निर्माण के लिए 5 लाख रुपये देने की घोषणा की गई। गांव में व्यावसायिक परिसर के लिए शेड निर्माण, मुक्तिधाम सह प्रतीक्षालय निर्माण, प्राथमिक शाला चरौदा में अतिरिक्त कक्ष तथा प्राथमिक शाला पटपरपाली में अतिरिक्त कक्ष निर्माण जैसे कार्यों की भी घोषणा की गई। इन घोषणाओं से गांव में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और सार्वजनिक उपयोग के निर्माण कार्यों को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, स्वास्थ्य सुविधा के साथ पंचायत भवन, सड़क और विद्यालयों से जुड़े कार्य भी गांव की जरूरतों में शामिल हैं। ## महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को मिलेगी राहत : मीरा ठाकुर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं जनपद पंचायत छुरा की अध्यक्ष मीरा ठाकुर ने कहा कि चरौदा में उप स्वास्थ्य केंद्र शुरू होने से ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इसका लाभ विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को मिल सकता है। उन्होंने क्षेत्रवासियों को नई स्वास्थ्य सुविधा की बधाई देते हुए कहा कि जनहित से जुड़े ऐसे कार्य ग्रामीण जीवन को सुविधाजनक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने ग्रामीणों से स्वास्थ्य केंद्र का लाभ लेने और उपलब्ध सुविधाओं का समुचित उपयोग करने की अपील की। ## जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की रही उपस्थिति समारोह में ग्राम पंचायत चरौदा की सरपंच श्रीमती लालता घनश्याम नागेश, जनपद सदस्य लच्छन कुमार नेताम, जिला अल्पसंख्यक मोर्चा गरियाबंद के अध्यक्ष इमरान अली, भाजपा मंडल महामंत्री रामलाल कुलदीप, उपसरपंच दिलीप सोरी, ग्राम पंचायत सभापति नकछेड़ा नागेश, ग्राम समिति अध्यक्ष टीकुम सोरी, बूथ अध्यक्ष देवेंद्र शर्मा, ग्राम पटेल सोमनाथ नागेश और ग्राम प्रमुख रामचरण नागेश सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। इसके अलावा जिला पंचायत प्रतिनिधि एवं सतनामी समाज तहसील परिक्षेत्र के अध्यक्ष कोमल ढीढ़ी, सहकारी समिति लचकेरा के अध्यक्ष, मडेली के उपसरपंच हैप्पी सिंह, दिशांक चंद्राकर, भाजपा मंडल खड़मा के महामंत्री पुरुषोत्तम गोस्वामी, ब्रजलाल, बलिराम नागेश, महेश नागेश, रमादेवी अग्रवाल, सुनीता सिन्हा, धनसिंह टांडे, पटपरपाली के पूर्व सरपंच सुंदर ठाकुर, पूर्व उपसरपंच पदुराम मरकाम, हुमेश्वर कुंजाम, कौशल जगत, डिगेश नागेश, घनश्याम नागेश, संतोष ध्रुव, जहूर सिंह नागेश, हाईस्कूल के प्राचार्य ध्रुव तथा स्वास्थ्य विभाग के सीबी दीवान सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन मौजूद रहे। चरौदा में उप स्वास्थ्य केंद्र के लोकार्पण और विभिन्न निर्माण कार्यों की घोषणाओं के साथ ग्रामीणों की लंबे समय से महसूस की जा रही बुनियादी सुविधाओं की जरूरतों को लेकर नई उम्मीद जगी है। अब इन घोषणाओं को धरातल पर उतारने और स्वास्थ्य केंद्र में नियमित एवं बेहतर सेवाएं सुनिश्चित करने पर ग्रामीणों की नजर रहेगी।