*खबर का असर या महज़ दिखावा? अवैध ईंट भट्टों पर कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति!,नोटिसों की बौछार, लेकिन बड़े संचालक अब भी बेखौफ — खनिज, राजस्व और वन विभाग कटघरे में*

छुरा :- जंगलों की अवैध कटाई और धधकते अवैध ईंट भट्टों को लेकर प्रकाशित समाचार के बाद प्रशासनिक हलचल जरूर तेज हुई है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई वास्तविक है या सिर्फ सुर्खियां बटोरने तक सीमित?
जिला कलेक्टर के निर्देश पर गरियाबंद खनिज विभाग ने छुरा विकासखंड में कार्रवाई करते हुए खरखरा में 3, पंडरीपानी में 3, रसेला में 3, मोंगरा में 2, पाठशिवनी में 2 और नयापारा में 1 अवैध ईंट भट्टा संचालकों को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि जब महीनों से भट्टे धधक रहे थे, जंगलों में पेड़ों की बलि दी जा रही थी, तब विभागीय अमला आखिर कहां था? क्या कार्रवाई केवल खबर के बाद ही संभव होती है?

*पत्थर्री में विरोधाभास, विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल*

खनिज विभाग का दावा है कि ग्राम पत्थर्री में अवैध भट्टा संचालित नहीं हो रहा, जबकि ग्रामीणों का आरोप है कि शिवनी धान खरीदी केंद्र से जुड़े भोजराम साहू द्वारा वहां ईंट निर्माण कराया जा रहा है। ईंट पकाने के लिए बड़ी मात्रा में लकड़ी का भंडारण भी बताया जा रहा है।
यदि यह सही है तो विभाग की जानकारी पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगते हैं। क्या सूचना तंत्र कमजोर है या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है?

*सैकड़ों भट्टे सक्रिय, कार्रवाई सीमित क्यों?*

छुरा ब्लॉक में बड़ी संख्या में अवैध ईंट भट्टों के संचालन की चर्चा है। छोटे संचालकों को नोटिस देकर कार्रवाई का दावा करना आसान है, लेकिन बड़े और प्रभावशाली संचालकों पर सख्ती क्यों नहीं दिख रही?

कुछ भट्टा संचालकों का खुलेआम कहना है कि “छोटा चालान भरकर फिर से काम शुरू हो जाएगा।” यदि ऐसी मानसिकता पनप रही है तो यह प्रशासन की सख्ती पर सीधा सवाल है।

*वन संपदा पर प्रहार, जवाबदेही तय होगी?*

ईंट भट्टों में जलावन के लिए भारी मात्रा में लकड़ी की खपत होती है, जिससे वन संपदा पर सीधा प्रहार होता है। ऐसे में यह मामला केवल खनिज विभाग तक सीमित नहीं, बल्कि वन और राजस्व विभाग की भी संयुक्त जिम्मेदारी बनती है।

जंगलों से लकड़ी कट रही है, ट्रैक्टरों में भरकर भट्टों तक पहुंचाई जा रही है—फिर भी कार्रवाई सीमित क्यों?

*जनता की मांग: नोटिस नहीं, निर्णायक कदम*

अब देखना यह होगा कि—
क्या अवैध भट्टे सील होंगे?

क्या अवैध लकड़ी जब्त होगी?

क्या आपराधिक प्रकरण दर्ज होंगे?

क्या लापरवाह अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी?

यदि कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रही तो यह संदेश जाएगा कि अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं और विभाग केवल औपचारिकता निभा रहा है।

छुरा की जनता अब दिखावे नहीं, ठोस और स्थायी कार्रवाई की उम्मीद कर रही है।

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