“रोज हजारों कमाई” के दावे से शुरू हुई कहानी, एक लाख की शिकायत पर आकर अटकी! माता कृपा स्व-सहायता समूह ने जैन ट्रेडर्स पर लगाया गंभीर आरोप, कलेक्टर से शिकायत कर रकम वापस कराने और पूरे मामले की जांच की मांग

संवाददाता – अनीश सोलंकी
गरियाबंद। जिले के जनदर्शन में मंगलवार को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने स्व-सहायता समूहों के नाम पर चल रहे व्यवसायिक लेन-देन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्राम मालगांव की माता कृपा स्व-सहायता समूह ने रायपुर के जैन ट्रेडर्स के प्रोपराइटर कुशल जैन पर एक लाख रुपये लेने के बाद कथित रूप से सामान उपलब्ध नहीं कराने का गंभीर आरोप लगाया है। समूह ने मामले की शिकायत प्रशासन से करते हुए अपनी रकम वापस दिलाने और पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की है।

कमाई का सपना दिखाकर लिया एक लाख!

समूह द्वारा दिए गए आवेदन के मुताबिक, कुशल जैन द्वारा समूह से संपर्क कर शासन के लोगो वाला पंपलेट दिखाते हुए व्यवसाय करने का प्रस्ताव दिया गया।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि समूह को प्रतिदिन 2500 से 3000 रुपये तक की कमाई होने का भरोसा दिलाया गया। कमाई के इस कथित प्रलोभन में आकर समूह ने व्यवसाय शुरू करने के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की गरियाबंद शाखा से एक लाख रुपये निकाले।

आवेदन में बताया गया है कि इसके बाद संबंधित ट्रेडर के साथ एग्रीमेंट किया गया और एक लाख रुपये की राशि एचडीएफसी बैंक रायपुर के खाते में भेजी गई। समूह ने राशि जमा किए जाने की रसीद भी आवेदन के साथ संलग्न किए जाने की बात कही है।

पैसा गया, सामान नहीं आया—अब जवाब मांग रहा समूह

शिकायत का सबसे गंभीर पहलू यह है कि समूह के अनुसार राशि लेने के बाद भी अब तक सामान उपलब्ध नहीं कराया गया। आवेदन में कहा गया है कि मामले को लेकर संबंधित व्यक्ति से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कथित तौर पर फोन का जवाब नहीं दिया जा रहा है।

इसके बाद समूह ने जनदर्शन में प्रशासन के सामने अपनी शिकायत रखी। अब सवाल उठ रहा है कि यदि एक लाख रुपये व्यवसाय के लिए लिए गए थे तो उसके बदले सामान क्यों नहीं दिया गया? राशि किस खाते में गई और उसका उपयोग किस उद्देश्य से किया गया? क्या एग्रीमेंट के मुताबिक प्रक्रिया पूरी की गई थी?

शासन के नाम वाले पंपलेट ने बढ़ाई गंभीरता

शिकायत में शासन के लोगो वाला पंपलेट दिखाकर व्यवसाय का प्रलोभन देने का भी उल्लेख किया गया है। यही बात पूरे मामले को और गंभीर बना रही है। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

समूह ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, संबंधित दस्तावेजों एवं बैंक लेन-देन की जांच की जाए तथा यदि शिकायत सही पाई जाती है तो समूह की एक लाख रुपये की राशि वापस दिलाई जाए।

अब जांच से खुलेगा “एक लाख” का राज!

जनदर्शन में शिकायत पहुंचने के बाद इस मामले ने प्रशासन का ध्यान खींचा है। एक ओर स्व-सहायता समूह की महिलाओं की मेहनत की रकम का सवाल है, तो दूसरी ओर शासन के नाम और लोगो के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों ने भी मामले को गंभीर बना दिया है।

अब निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। क्या वास्तव में एक लाख रुपये लेकर सामान नहीं दिया गया? क्या व्यवसाय के नाम पर महिलाओं को कमाई का लालच दिया गया था? और शासन के लोगो वाले पंपलेट का इस्तेमाल किस आधार पर किया गया? इन तमाम सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।

दिनांक 08 सितंबर 2026 को दिए गए शिकायत आवेदन में माता कृपा स्व-सहायता समूह, ग्राम मालगांव ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

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