चुरकीदादर पंचायत में पैसों के हिसाब पर घमासान! 3.03 लाख की वसूली से आगे बढ़ी कार्रवाई की मांग,पूर्व सरपंच चरण सिंह जगत के पास 1.48 लाख रुपये नगद होने का दस्तावेज,

वर्तमान सरपंच विशाखा मरकाम बोलीं—“मेरी जानकारी के बगैर हुआ राशि आहरण, सूक्ष्म जांच हो; दोषी मिले तो सचिव डेरहा राम पर कानूनी कार्रवाई जरूरी”

संवाददाता – अनीश सोलंकी 

छुरा। जनपद पंचायत छुरा अंतर्गत ग्राम पंचायत चुरकीदादर में पंचायत की राशि के कथित अनियमित आहरण का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। पूर्व सचिव डेरहा राम कुर्रे से 3 लाख 3 हजार 50 रुपये की वसूली के लिए जारी नोटिस के बीच अब पंचायत के वर्तमान जनप्रतिनिधियों ने पूरे मामले की सूक्ष्म और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

मामला केवल राशि की वापसी तक सीमित न रहकर पंचायत की वित्तीय व्यवस्था, राशि आहरण की प्रक्रिया और जिम्मेदारी तय करने का मुद्दा बन गया है।

मामले से जुड़े दस्तावेजों में पूर्व सरपंच चरण सिंह जगत के पास 1 लाख 48 हजार 630 रुपये नगद होने का उल्लेख सामने आया है।

वहीं वर्तमान सरपंच विशाखा मरकाम ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि उनकी जानकारी के बगैर पंचायत की राशि का आहरण हुआ है, जो गंभीर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है।

वर्तमान सरपंच का दो टूक बयान—“जांच हो, दोषी मिले तो कानूनी कार्रवाई हो”

वर्तमान सरपंच विशाखा मरकाम का कहना है कि पंचायत की राशि उनके संज्ञान और जानकारी के बिना आहरित की गई है। उन्होंने पूरे मामले की सूक्ष्मता से जांच कराने की मांग की है।

उनका कहना है कि यदि जांच में पूर्व सचिव डेरहा राम कुर्रे की भूमिका और जिम्मेदारी सामने आती है तथा वे दोषी पाए जाते हैं, तो सिर्फ राशि की वसूली पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि उनके विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई भी की जानी चाहिए।

सरपंच के इस बयान के बाद मामला और गंभीर हो गया है, क्योंकि अब पंचायत की निर्वाचित वर्तमान प्रतिनिधि स्वयं राशि आहरण की प्रक्रिया और अपनी जानकारी के अभाव पर सवाल उठा रही हैं।

“पंचायत का पैसा जनता का है, निजी रकम नहीं”—ग्रामीणों की आवाज बुलंद

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि पंचायत में आने वाली राशि गांव के विकास, मूलभूत सुविधाओं और जनता की जरूरतों के लिए होती है। यदि इस राशि के आहरण में किसी भी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।

ग्रामीणों की मांग है कि एक-एक रुपये का हिसाब सामने लाया जाए। बैंक खाते से लेकर कैशबुक, चेक, वाउचर, लेजर, पंचायत प्रस्ताव और संबंधित दस्तावेजों की जांच हो, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पैसा कब, किस मद में और किस प्रक्रिया के तहत निकाला गया।

उनका साफ कहना है—

“रकम वापस करा देना ही पूरी कार्रवाई नहीं है। अगर जांच में गड़बड़ी साबित होती है तो जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में पंचायत की राशि के साथ ऐसी कथित अनियमितता दोबारा न हो।”

3.03 लाख की वसूली का नोटिस पहले ही जारी

मामले में जनपद पंचायत छुरा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा पूर्व सचिव डेरहा राम कुर्रे से 3 लाख 3 हजार 50 रुपये पंचायत खाते में जमा कराने को कहा गया है। इसमें कथित रूप से बिना कार्य के आहरित 2 लाख 83 हजार 50 रुपये तथा करीब 20 हजार रुपये मकान कर की राशि शामिल बताई गई है।

निर्धारित समय में राशि जमा नहीं करने पर नियमानुसार वसूली और आगे की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

पूर्व सरपंच के पास 1.48 लाख नगद—अब इस रकम का भी मांगा जा रहा पूरा हिसाब

दस्तावेज में पूर्व सरपंच चरण सिंह जगत के पास 1 लाख 48 हजार 630 रुपये नगद होने का उल्लेख सामने आया है। इस रकम को लेकर भी ग्रामीणों में सवाल उठ रहे हैं।

अब मांग है कि इस राशि का मदवार और दस्तावेजी हिसाब भी सामने रखा जाए। रकम किस उद्देश्य से थी, किसके पास रखी गई थी और पंचायत के वित्तीय अभिलेखों में इसका क्या उल्लेख है—इन तमाम बिंदुओं की जांच की जाए।

चरौदा पंचायत की 40 हजार की वसूली का मामला भी चर्चा में

बताया जा रहा है कि पूर्व सचिव डेरहा राम कुर्रे के संबंध में चरौदा पंचायत में भी करीब 40 हजार रुपये की वसूली लंबित होने का दावा है। इसके अलावा वे करीब 11 महीने निलंबित भी रहे थे।

बहाली के बाद उन्हें सेमरा पंचायत की जिम्मेदारी दी गई, लेकिन वहां भी ग्रामीणों और पंचायत स्तर पर विरोध की बात सामने आ रही है।

सीईओ सतीश चन्द्रवंशी—“वसूली होगी, वेतन से कटेगा पैसा”

मामले को लेकर जनपद पंचायत छुरा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सतीश चन्द्रवंशी ने कहा कि संबंधित सचिव के ऊपर वसूली बनती है और वसूली की जाएगी। राशि उनके वेतन से काटी जाएगी।

हालांकि, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि वसूली के साथ-साथ यदि जांच में वित्तीय अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारी तय कर कठोर कार्रवाई भी होनी चाहिए।
अब जनता की नजर जांच पर
छुरकीदादर पंचायत का मामला अब सिर्फ 3.03 लाख रुपये की वसूली का मामला नहीं रह गया है।

वर्तमान सरपंच के बयान, पूर्व सरपंच के पास बताई गई नगद राशि, कथित जाली दस्तखत से राशि आहरण के आरोप और पूर्व सचिव से जुड़े पुराने वसूली प्रकरण ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

जनता अब साफ शब्दों में कह रही है—

पंचायत का पैसा जनता का है, उसका पूरा हिसाब चाहिए। यदि जांच में दोष साबित होता है तो सिर्फ पैसा वापस लेकर मामला रफा-दफा नहीं होना चाहिए, बल्कि जिम्मेदारों पर ऐसी कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, जो आने वाले समय में पंचायतों में वित्तीय अनियमितता करने वालों के लिए कड़ा संदेश बने।

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