बिना काम लाखों का खेल! पंचायत खाते से राशि आहरण का आरोप, पूर्व सचिव से 3.03 लाख की वसूली का नोटिस

छुरकीदादर पंचायत में वित्तीय अनियमितता से मचा हड़कंप, 7 दिन में रकम जमा करने का अल्टीमेटम; नहीं तो पंचायत राज अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई

संवाददाता :- अनीश सोलंकी 
छुरा। जनपद पंचायत छुरा अंतर्गत ग्राम पंचायत छुरकीदादर में पंचायत की राशि के कथित अनियमित आहरण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पंचायत के दस्तावेजों और जनपद पंचायत कार्यालय से जारी पत्र ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। ग्राम पंचायत की ओर से पूर्व सचिव श्री डेरहा राम कुर्रे के विरुद्ध बिना कार्य कराए पंचायत की राशि आहरित किए जाने का आरोप लगाया गया है।

मामले में जनपद पंचायत छुरा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने पूर्व सचिव को कुल 3 लाख 3 हजार 50 रुपये पंचायत खाते में वापस जमा करने का नोटिस जारी किया है। वहीं निर्धारित समय में राशि जमा नहीं करने पर छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम के तहत कार्रवाई एवं वसूली की चेतावनी दी गई है।

अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच राशि आहरण का आरोप

ग्राम पंचायत छुरकीदादर द्वारा जनपद पंचायत छुरा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को प्रस्तुत आवेदन के अनुसार, 3 अप्रैल 2025 से 28 सितंबर 2025 के बीच पंचायत में बिना कार्य कराए राशि का आहरण किए जाने का आरोप लगाया गया है। पंचायत द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों में आहरित राशि और उसे वापस जमा कराने से संबंधित जानकारी का उल्लेख किया गया है।

दस्तावेजों के अनुसार, इस संबंध में पूछताछ किए जाने पर पूर्व सचिव द्वारा राशि वापस करने की बात लिखित रूप से कही गई थी। पंचायत के रिकॉर्ड में 2 लाख 83 हजार 50 रुपये की राशि को दो माह के भीतर वापस करने का उल्लेख बताया गया है, लेकिन पंचायत का कहना है कि निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी राशि वापस जमा नहीं की गई।

2.83 लाख के साथ मकान कर की राशि जोड़कर 3.03 लाख का हिसाब

मामले में सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, बिना कार्य के कथित रूप से आहरित 2 लाख 83 हजार 50 रुपये के अलावा मकान कर की लगभग 20 हजार रुपये की राशि भी शामिल है। इस तरह पंचायत द्वारा पूर्व सचिव से कुल 3 लाख 3 हजार 50 रुपये वापस जमा कराने की मांग की गई है।

पंचो का कहना है कि उक्त राशि वापस नहीं आने के कारण पंचायत के खाते में आवश्यक राशि उपलब्ध नहीं हो पा रही है, जिससे गांव के विकास एवं अन्य पंचायत संबंधी कार्यों पर भी इसका असर पड़ रहा है।

जनपद पंचायत का सख्त रुख, 7 दिन में राशि जमा करने का आदेश

मामले को गंभीरता से लेते हुए जनपद पंचायत छुरा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने पूर्व सचिव को 7 दिवस के भीतर 3,03,050 रुपये की संपूर्ण राशि ग्राम पंचायत के खाते में जमा करने का निर्देश दिया है। साथ ही राशि जमा करने के बाद उसका पालन प्रतिवेदन भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समयावधि में राशि पंचायत खाते में जमा नहीं की जाती है तो संबंधित के विरुद्ध छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी तथा राशि की वसूली के लिए उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भेजा जाएगा।

विधायक से लेकर कलेक्टर तक भेजी गई प्रतिलिपि

मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जनपद पंचायत कार्यालय से जारी पत्र की प्रतिलिपि राजिम विधानसभा क्षेत्र के विधायक, कलेक्टर गरियाबंद, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत गरियाबंद तथा ग्राम पंचायत छुरकीदादर के सरपंच को भी भेजी गई है। इससे अब पूरे मामले पर प्रशासनिक स्तर पर भी नजर टिक गई है।

पंचायत के विकास कार्यों पर भी उठने लगे सवाल

ग्राम पंचायत की ओर से दिए गए आवेदन में राशि वापस नहीं मिलने के कारण पंचायत के कार्य प्रभावित होने की बात कही गई है। पंचायत का तर्क है कि गांव के विकास, मूलभूत सुविधाओं और विभिन्न आवश्यक कार्यों में उपयोग होने वाली राशि यदि पंचायत खाते में उपलब्ध नहीं होगी तो विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में परेशानी होगी।

ऐसे में ग्रामीणों के बीच भी यह सवाल उठने लगा है कि आखिर पंचायत खाते से बिना कार्य के राशि का आहरण कैसे हुआ? राशि किस मद से निकाली गई? किस कार्य के नाम पर भुगतान किया गया? आहरित राशि का उपयोग कहां हुआ और राशि वापस करने की लिखित बात के बावजूद अब तक पंचायत खाते में रकम क्यों जमा नहीं की गई?

दस्तावेज सामने आने के बाद जांच की मांग तेज

पंचायत के आवेदन, उपलब्ध अभिलेखों और जनपद पंचायत कार्यालय से जारी नोटिस के सामने आने के बाद मामला गरमा गया है। हालांकि, पूर्व सचिव की ओर से इस पूरे मामले में उनका पक्ष सामने नहीं आया है। इसलिए लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि विभागीय जांच, पंचायत अभिलेखों, भुगतान संबंधी दस्तावेजों एवं अन्य रिकॉर्ड के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।

अब 7 दिन में होगा फैसला—राशि लौटेगी या शुरू होगी वसूली की कार्रवाई?

फिलहाल पूरे मामले में प्रशासन के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। जनपद पंचायत द्वारा पूर्व सचिव को 7 दिन की मोहलत दी गई है। अब देखना होगा कि निर्धारित समय के भीतर 3 लाख 3 हजार 50 रुपये पंचायत खाते में वापस जमा होते हैं या फिर प्रशासन द्वारा वसूली और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि पंचायत की राशि के कथित आहरण की वास्तविकता क्या है और यदि राशि बिना कार्य के निकाली गई तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है? आने वाले दिनों में विभागीय जांच और दस्तावेजों के परीक्षण से इस पूरे मामले की तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।

सागौन के अवैध कारोबार पर वन विभाग का बड़ा शिकंजा! दो घरों में दबिश देकर 21 नग सागौन चिरान जब्त, ₹22 हजार की लकड़ी बरामद कैंटपदर और बरकानी में सर्च वारंट के तहत कार्रवाई, दोनों मामलों में वन अपराध प्रकरण दर्ज देवभोग,। वन संपदा की अवैध कटाई, तस्करी और अवैध रूप से लकड़ी के संग्रहण के खिलाफ वन विभाग ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। देवभोग क्षेत्र में विभागीय टीम ने दो अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर कुल 21 नग सागौन प्रजाति के इमारती चिरान जब्त किए हैं। जब्त सागौन चिरान की कुल मात्रा 0.257 घन मीटर बताई गई है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 22 हजार रुपये आंकी गई है। कार्रवाई के बाद वन विभाग ने दोनों मामलों में वन अपराध प्रकरण दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। यह कार्रवाई मुख्य वनसंरक्षक रायपुर वृत्त रायपुर मणिवासगन एस. के मार्गदर्शन तथा वनमंडलाधिकारी गरियाबंद मयंक पाण्डेय एवं उपवनमंडलाधिकारी देवभोग मनोज चन्द्राकर के निर्देशन में की गई। वन विभाग को क्षेत्र में सागौन चिरान के अवैध रूप से संग्रहण की सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना को गंभीरता से लेते हुए विभाग द्वारा सर्च वारंट जारी कर संबंधित स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया। कैंटपदर में घर के अंदर छिपाकर रखे थे 11 नग सागौन चिरान वन विभाग की टीम ने सर्च वारंट क्रमांक 87, दिनांक 30 अगस्त 2026 के आधार पर वन परिक्षेत्र इंदागांव (देवभोग) अंतर्गत ग्राम कैंटपदर निवासी लालसिंह वल्द परमानंद मांझी के घर में तलाशी ली। तलाशी के दौरान घर के अंदर सागौन प्रजाति के 11 नग इमारती चिरान अवैध रूप से रखे हुए पाए गए। इन चिरानों की कुल मात्रा 0.115 घन मीटर थी। वन अमले ने मौके पर पंचनामा कार्रवाई करते हुए सभी चिरानों को विधिवत जब्त कर लिया। इस मामले में वन विभाग द्वारा वन अपराध प्रकरण क्रमांक 20961/16, दिनांक 31 अगस्त 2026 पंजीबद्ध किया गया है तथा प्रकरण में नियमानुसार अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। बरकानी में भी मिला सागौन का अवैध भंडारण वन विभाग की कार्रवाई यहीं नहीं रुकी। इसी अभियान के तहत सर्च वारंट क्रमांक 88, दिनांक 30 अगस्त 2026 के आधार पर ग्राम बरकानी निवासी जगताराम वल्द गोरांगो यादव के घर की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान घर के अंदर सागौन प्रजाति के 10 नग इमारती चिरान बरामद हुए। इनकी कुल मात्रा 0.142 घन मीटर पाई गई। विभागीय टीम ने मौके से सभी चिरानों को विधिवत जब्त करते हुए संबंधित के विरुद्ध वन अपराध प्रकरण क्रमांक 20961/17, दिनांक 31 अगस्त 2026 दर्ज किया है। दो कार्रवाई में 21 नग सागौन चिरान जब्त वन विभाग द्वारा की गई दोनों अलग-अलग कार्रवाई में कुल 21 नग सागौन प्रजाति के इमारती चिरान जब्त किए गए हैं। जब्त लकड़ी की कुल मात्रा 0.257 घन मीटर है। विभाग के अनुसार इसकी अनुमानित कीमत लगभग ₹22,000 है। वन विभाग की इस कार्रवाई से यह साफ है कि जंगलों से निकलने वाली बेशकीमती सागौन लकड़ी के अवैध संग्रहण और परिवहन पर विभाग की नजर लगातार बनी हुई है। सूचना मिलते ही सर्च वारंट के माध्यम से संदिग्ध स्थानों पर तलाशी लेकर अवैध वन संपदा को जब्त किया जा रहा है। वन अमले की मौजूदगी में हुई पूरी कार्रवाई सर्च कार्रवाई के दौरान वन परिक्षेत्र अधिकारी इंदागांव (देवभोग) छबीलाल ध्रुव, परिक्षेत्र सहायक देवभोग, परिक्षेत्र सहायक पैण्ड्रा (मैनपुर परिक्षेत्र), सर्च वारंट प्रभारी कविन्द्र मिश्रा सहित देवभोग परिक्षेत्र का वन अमला मौजूद रहा। वन विभाग की टीम ने पूरी कार्रवाई नियमानुसार करते हुए बरामद सागौन चिरानों को जब्त किया और संबंधित मामलों में वन अपराध प्रकरण दर्ज किया। अवैध कटाई और लकड़ी के अवैध संग्रहण पर जारी रहेगा अभियान वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवैध कटाई, अवैध परिवहन और वन उपज के अवैध संग्रहण के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। जंगल और वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी प्रकार के अवैध कृत्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा ऐसे मामलों में नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। देवभोग क्षेत्र में एक ही अभियान के दौरान दो अलग-अलग घरों से सागौन चिरान की बरामदगी ने यह भी दर्शाया है कि वन विभाग अब अवैध रूप से संग्रहित वन संपदा को लेकर लगातार सक्रिय है। विभाग ने वन संपदा की सुरक्षा को प्राथमिकता बताते हुए आम लोगों से भी अपील की है कि जंगलों की अवैध कटाई अथवा वन उपज के अवैध संग्रहण से संबंधित किसी भी जानकारी की सूचना विभाग को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

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