तीन माह का राशन हजम: जांच के नाम पर खानापूर्ति, 150 गरीबों के हक पर डाका,शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, फूड इंस्पेक्टर और विभागीय सिस्टम पर उठे सवाल

रिपोर्टर :- अनीश सोलंकी
छुरा।छुरा विकासखंड के ग्राम पंचायत जरगांव के आश्रित ग्राम रवेली से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां गरीबों के हक का राशन ही घोटाले की भेंट चढ़ गया। गांव के राशन दुकान संचालक पर आरोप है कि उसने लगभग 150 हितग्राहियों का तीन माह का राशन (जनवरी, फरवरी और मार्च) हजम कर लिया, और विभागीय जांच सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई।
ग्रामीणों के अनुसार, जनवरी और फरवरी माह में राशन नहीं मिलने पर उन्होंने फरवरी में ही फूड इंस्पेक्टर को शिकायत दी थी। शिकायत के बाद फूड इंस्पेक्टर गांव पहुंचीं, जांच की और पंचनामा तैयार कर जल्द राशन दिलाने का आश्वासन देकर लौट गईं। लेकिन आश्वासन केवल कागजों तक ही सीमित रहा—न राशन मिला और न ही दोषी पर कोई कार्रवाई हुई।
हद तो तब हो गई,
जब दो माह का राशन गायब करने के बाद संचालक ने मार्च माह का राशन भी हितग्राहियों को नहीं दिया। लगातार तीन माह तक राशन से वंचित रहने के बाद ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा।
ग्रामसभा में गूंजा मुद्दा
शुक्रवार को रवेली में आयोजित ग्रामसभा में यह मुद्दा जोर-शोर से उठा। बड़ी संख्या में मौजूद राशनकार्डधारियों ने एक सुर में आरोप लगाया कि उन्हें तीन माह से राशन नहीं मिला है। ग्रामीणों ने बताया कि सेल्समेन ने उनके राशन कार्ड भी अपने पास रख लिए हैं, जिससे वे किसी अन्य कार्य में भी उनका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री, खाद्य मंत्री और कलेक्टर गरियाबंद को ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और बकाया राशन दिलाने की मांग की है।
खाद्य विभाग की भूमिका संदिग्ध
इस पूरे मामले में खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होना, और लगातार तीन माह तक राशन का वितरण न होना विभाग की मौन सहमति या लापरवाही को उजागर करता है।
मामले ने उस वक्त और तूल पकड़ लिया जब सी. ज़ी. मेट्रो न्यूज संवाददाता ने ग्रामसभा के दौरान फूड इंस्पेक्टर से फोन पर बात कराई। पहले तो उन्होंने मामले की जानकारी से इनकार किया, फिर कहा कि वे जांच कर चुकी हैं। लेकिन मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया।
इतना ही नहीं, फूड इंस्पेक्टर ने यह भी कहा कि जांच फाइल एसडीएम कार्यालय भेज दी गई है, लेकिन जब इस संबंध में एसडीएम अंजली खलको से जानकारी ली गई तो उन्होंने साफ कहा कि उनके पास ऐसी कोई फाइल नहीं आई है।
बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?
इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—
क्या जांच सिर्फ कागजों में पूरी की गई?
क्या विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से गरीबों का हक मारा जा रहा है?
आखिर तीन माह का राशन कहां गया?
