**आदिवासी समाज का सरकार को अल्टीमेटम,कार्रवाई नहीं तो NH-130 जाम!,मुख्यमंत्री के नाम SDM को ज्ञापन,पीड़ित परिवार को 1 करोड़ मुआवजे की मांग**

**विपक्ष का सीधा हमला—
“यह हादसा नहीं, सरकारी हत्या है**

गरियाबंद:- आदिवासी बालक आश्रम बड़े गोहरा में 12 वर्षीय छात्र की मौत अब राजनीतिक महा-टकराव में बदल चुकी है।
एक ओर आदिवासी समाज सड़क पर उतरने की चेतावनी दे रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे ‘सरकारी हत्या’ करार दिया है।

आदिवासी समाज ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नाम SDM को ज्ञापन सौंपकर साफ चेतावनी दी है कि
यदि दोषियों पर 10 दिनों के भीतर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो 19 फरवरी 2026 को NH-130 पर चक्काजाम किया जाएगा।
मौत नहीं, सिस्टम की क्रूरता

ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि

24 जनवरी को छात्र की तबीयत बिगड़ने के बावजूद
✔️ न समय पर अस्पताल ले जाया गया
✔️ न ORS जैसी बुनियादी सुविधा दी गई
✔️ अधीक्षक ने लापरवाही बरतते हुए बच्चे को तड़पता छोड़ा
परिणामस्वरूप 29 जनवरी को इलाज के दौरान छात्र की मौत हो गई।

आदिवासी समाज की प्रमुख मांगें

पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा
परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी
दोषी अधीक्षक व जिम्मेदार अधिकारियों पर आपराधिक मामला
प्रदेश के सभी आदिवासी छात्रावासों का स्वास्थ्य व प्रशासनिक ऑडिट

विपक्ष का तीखा राजनीतिक वार

मामले में विपक्ष ने सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा—
“आदिवासी बच्चों की जान इस सरकार के लिए कोई मायने नहीं रखती।
सरकारी आश्रम अब शिक्षा के केंद्र नहीं,
लापरवाही से चलने वाले मौतघर बन चुके हैं।”
विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि
सरकार दोषियों को बचाने में लगी है,
और यदि यही घटना किसी शहरी या प्रभावशाली वर्ग के बच्चे के साथ हुई होती,
तो अब तक निलंबन और गिरफ्तारी हो चुकी होती।
सत्ता बनाम विपक्ष—आदिवासी सवाल बनाम राजनीतिक चुप्पी
विपक्ष ने सरकार से पूछा—
दोषी अधीक्षक अब तक जेल में क्यों नहीं?

आदिवासी विकास और स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही तय क्यों नहीं?

क्या आदिवासी सिर्फ चुनावी नारे बनकर रह गए हैं?

NH-130 बनेगा सियासी रणभूमि?

आदिवासी समाज और विपक्ष दोनों ने साफ कर दिया है कि
यदि सरकार ने इस मौत को भी फाइलों में दबाने की कोशिश की,
तो सड़क से सदन तक आंदोलन होगा।

यह सिर्फ एक खबर नहीं,
यह आदिवासी अस्मिता, सत्ता की जवाबदेही
और विपक्ष के आक्रामक तेवरों की सीधी टक्कर है।

अब सवाल यह है—
सरकार कार्रवाई करेगी
या NH-130 पर उठे जनआक्रोश का सामना करेगी?

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